कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) की तमिलनाडु इकाई ने राज्य सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रैली को इजाजत देने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने की मांग की है. पार्टी के राज्य सचिव पी. शनमुगम की तरफ से जारी बयान में कोर्ट के फैसले पर चिंता जताई गई. CPI(M) का दावा है कि RSS के इतिहास और उससे जुड़े हिंसा के आरोपों को देखते हुए रैली की इजाजत देना शांति और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है.
CPI(M) ने अपने बयान में आरोप लगाया कि RSS ने अपनी स्थापना के बाद से संगठन के विस्तार के लिए हिंसा का सहारा लिया है. पार्टी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर, कन्याकुमारी और कृष्णागिरि जैसे जिलों का जिक्र करते हुए वहां हिंसा की घटनाओं का दावा किया.
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पार्टी ने RSS पर कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर आधिकारिक रजिस्ट्रेशन और चंदे पर टैक्स से जुड़े दायित्वों से बचने का आरोप भी लगाया. बयान में यह भी कहा गया कि संगठन राहत और चैरिटी से जुड़ी गतिविधियों के जरिए अपनी गैर-राजनीतिक छवि पेश करता है. ये सभी आरोप CPI(M) ने अपने बयान में लगाए हैं.
रैली की इजाजत पर उठाए सवाल
CPI(M) का आरोप है कि RSS के प्रशिक्षण शिविरों, रैलियों और कक्षाओं के जरिए देशभक्ति और अनुशासन के नाम पर नफरत फैलाई जाती है. पार्टी ने दावा किया कि इस तरह की गतिविधियां देश में हुई कई हिंसक घटनाओं की वजह रही हैं. उसने यह भी आरोप लगाया कि संगठन अपने सदस्यों की पारदर्शी सूची नहीं रखता, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल होता है.
लेफ्ट पार्टी ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि RSS की रैली को इजाजत देना हिंसा के बीज बोने जैसा है. CPI(M) के मुताबिक, ऐसे फैसलों से यह संदेश जा सकता है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और पिछली घटनाओं के बावजूद रैलियों को इजाजत दी जा सकती है.
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CPI(M) की राज्य सचिवालय ने दोहराया कि तमिलनाडु सरकार को हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देनी चाहिए और कानूनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए. पार्टी ने कहा कि यह कदम राज्य में शांति बनाए रखने और उसकी शांतिपूर्ण पहचान की रक्षा करने के लिए जरूरी है.
अपूर्वा जयचंद्रन