बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उम्मीद से बहुत कम मतदान हुआ है. इसके बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. इस कम वोटिंग प्रतिशत को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने सूबे की सत्ताधारी बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा है. कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने एक वीडियो जारी पर पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और राज्य सरकार पर निशाना साधा है.
राजेश राठौड़ ने कहा कि बांकीपुर में हुआ रिकॉर्ड कम मतदान यह साफ-साफ दिखाता है कि बिहार की मौजूदा बीजेपी सरकार को लेकर आम जनता और मतदाताओं में भारी उदासीनता है. उन्होंने कहा कि अगर जनता सरकार के कामकाज से खुश होती या उसमें किसी तरह का उत्साह होता, तो बांकीपुर में अब तक का सबसे कम मतदान दर्ज नहीं हुआ होता. लोग अपने घरों से बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं हैं. ये सरकार के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है.
नितिन नवीन और सम्राट चौधरी पर साधा निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी के दो बड़े चेहरों राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की साख पर सीधे सवाल उठाए हैं. राजेश राठौड़ ने तीखे लहजे में कहा कि नितिन नवीन इस क्षेत्र का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. अब वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे बड़े पद पर हैं. अगर उनके अध्यक्ष बनने से जनता में खुशी होती तो बांकीपुर के वोटर्स को भारी संख्या में घरों से निकलकर मतदान करना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
राजेश राठौड़ ने आगे कहा कि बिहार में पहली बार बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री बना है. ऐसे में बीजेपी समर्थकों और वोटर्स में एक अलग ही जोश होना चाहिए था. लेकिन वोटिंग का गिरा हुआ स्तर यह साबित करता है कि जनता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, दोनों के ही नेतृत्व को लेकर पूरी तरह उदासीन है.
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वीडियो जारी कर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर उपचुनाव में पूरी फौज खड़ी कर दी. लगभग 300 एमपी, एमएलए राज्यसभा सदस्यों को लगाया.भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित केंद्रीय मंत्री उसमें लगे रहे.लगभग 6 हजार से अधिक वरिष्ठ नेताओं को लगाया. बावजूद इसके बांकीपुर का वोटिंग प्रतिशत मात्र 34 पर सिमटना ये दर्शाता है कि बांकीपुर की जनता सम्राट सरकार और नीतिन नबीन से काफी दुखी है. इसलिए वोटरों में काफी उदासीनता रही.
उन्होंने आगे कहा कि अगर लोगों में उत्साह होता तो नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए, भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई, सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए...तब भी इतना कम वोटिंग परसेंटेज क्यों हुआ ये सवाल है.
उपचुनाव के वोटिंग ट्रेंड के सियासी मायने
बांकीपुर और मांजलपुर दोनों ही पूरी तरह शहरी और अर्बन सीटें हैं. उपचुनावों में अक्सर आम मतदाताओं (विशेषकर कॉस्मोपॉलिटन और मध्यम वर्ग) में मुख्य आम चुनावों की तरह उत्साह नहीं होता है, उन्हें लगता है कि एक विधायक के बदलने से सरकार या व्यवस्था पर कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा,जिसके कारण बड़ी संख्या में मतदाता पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच पाते.
परंपरागत रूप से यह माना जाता है कि कम मतदान अक्सर सत्ताधारी दल या उस दल के पक्ष में जाता है, जिसका संगठन और कैडर जमीन पर सबसे मजबूत होता है. बांकीपुर और मांजलपुर दोनों ही लंबे समय से बीजेपी के गढ़ रहे हैं, इसलिए कम मतदान को बीजेपी के वफादार वोटों के ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा सकता है.
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शशि भूषण कुमार