CJP प्रोटेस्ट के दौरान 5 राज्यों में दर्ज सभी FIR होंगी रद्द, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से जुड़े सभी FIR को संविधान के आर्टिकल 142 के तहत रद्द कर दिया है. कोर्ट ने पांच राज्यों की ओर से दाखिल आवेदनों को स्वीकार करते हुए कहा कि इन FIR पर अब कोई कार्रवाई या जांच नहीं होगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनकारियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है (फोटो: PTI) सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनकारियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है (फोटो: PTI)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दिया है. शीर्ष अदालत ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उसके समक्ष सूचीबद्ध सभी FIR रद्द की जाती हैं. कोर्ट ने पांच राज्यों की ओर से FIR रद्द करने के लिए दाखिल आवेदनों को भी स्वीकार कर लिया.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुई समान घटनाओं को लेकर देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज FIR पर अब न तो आगे कार्रवाई की जाएगी और न ही उनकी जांच जारी रहेगी. ऐसी सभी FIR को हर उद्देश्य के लिए बंद माना जाएगा.

20 से 26 जुलाई की घटनाओं पर नई FIR भी नहीं

शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि 20 से 26 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाए.

हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की छूट दी है, जिनका उल्लेख अदालत के समक्ष दाखिल आवेदन में किया गया है. अगर जांच में इन लोगों के दो अपराधों में शामिल होने की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ नई FIR दर्ज की जा सकेगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज होने वाली किसी भी नई FIR से उनके कानूनी उपाय अपनाने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वे कानून के तहत उपलब्ध राहत के लिए अदालत का रुख कर सकेंगे.

देशभर के लिए बनेगा मुआवजे का मैकेनिज्म

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों के साथ ही देशव्यापी मुआवजा व्यवस्था तैयार करने का भी निर्देश दिया है. केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर मुआवजे के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करना होगा.

कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस फ्रेमवर्क को मुआवजा देने की नियमित व्यवस्था के रूप में अपनाएंगे. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को NEET 2026 से जुड़ी आत्महत्या के मामलों में तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर CJP के प्रवक्ता ने अदालत का आभार जताया. उन्होंने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज जो किया है, वह बेहद महत्वपूर्ण है.

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