भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और प्रसिद्ध शराब ब्रांड 'Old Monk' के निर्माता मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड के बीच विवाद गहराता जा रहा है. सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में FSSAI ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह ओल्ड मंक की बिक्री की अनुमति तभी देगा जब कंपनी अपने लेबल में संशोधन कर उत्पाद को 'Rum' के बजाय 'Rum-like' (रम जैसा) के रूप में दर्शाने पर सहमत होगी.
निर्माता कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने मुख्य न्यायाधीश एम.सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ को बताया कि ठाणे जिले की इकाई से बिक्री पर लगी रोक के कारण कंपनी को 500 करोड़ रुपये से अधिक का कॉर्पोरेट नुकसान हुआ है.
उन्होंने कहा कि बिक्री पर इस बैन से महाराष्ट्र आबकारी विभाग को भी लगभग 350 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उत्पाद की बिक्री केवल महाराष्ट्र में रोकी गई है, जबकि अन्य राज्यों में यह सुचारू रूप से बिक रहा है. इस पाबंदी के कारण करीब 300 कर्मचारी बेकार बैठे हैं.
यह भी पढ़ें: Old Monk Case: ओल्ड मॉन्क अब नहीं कहलाएगी रम? ‘7 साल पुराने’ दावे पर बॉम्बे HC में छिड़ी बहस
क्या है पूरा विवाद?
FSSAI का तर्क है कि ओल्ड मंक में न्यूट्रल स्पिरिट के साथ ऊपर से 'रम फ्लेवर' मिलाया जाता है, जो मूल स्पिरिट के प्राकृतिक संरचना को ढक देता है. प्राधिकरण का कहना है कि मानक उत्पाद नाम के तहत ऐसे फ्लेवर जोड़ना उपभोक्ताओं के लिए भ्रमित करने वाला है, जब तक कि इसे 'फ्लेवर्ड स्पिरिट' या 'रम-लाइक' न लिखा जाए. इसके अलावा FSSAI ने '7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड' और 'वेरी ओल्ड वैटेड' जैसे एजिंग डिस्क्रिप्टर्स पर भी आपत्ति जताई है.
दूसरी ओर, निर्माता कंपनी का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विनियम स्वीकृत एडिटिव्स के साथ न्यूट्रल स्पिरिट के उपयोग की अनुमति देते हैं. कंपनी का यह भी दावा है कि बाजार में उसके अन्य प्रतिस्पर्धी भी इसी प्रक्रिया का उपयोग करते हैं, लेकिन केवल ओल्ड मंक पर ही इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है.
यह भी पढ़ें: 'रातोरात बिक्री बंद करने से होगा नुकसान', FSSAI के नियमों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची Old Monk
अदालत ने मामले को गुण-दोष के आधार पर अंतिम सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तारीख तय की है. इससे पहले हाई कोर्ट ने बिक्री पर रोक के खिलाफ तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था.
विद्या