ओल्ड मंक (Old Monk) भारत की सबसे पहचानी जाने वाली डार्क रम ब्रांड्स में से एक है. इसे Mohan Meakin Limited बनाती है और इसका उत्पादन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में होता है. यह रम वर्ष 1954 में भारतीय बाजार में पेश की गई थी.
ओल्ड मंक की कहानी मोहन मीकिन के इतिहास से जुड़ी है. इस कंपनी की जड़ें 1855 में कासौली में शुरू हुई एक ब्रुअरी तक जाती हैं. बाद में कारोबार का नाम बदलकर मोहन मीकिन किया गया. कंपनी ने आगे चलकर शराब के साथ खाद्य और अन्य उत्पादों के क्षेत्र में भी विस्तार किया.
ओल्ड मंक को 1954 में बाजार में उतारा गया. उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इसके नाम और पहचान के पीछे बेनेडिक्टाइन भिक्षुओं से जुड़ी प्रेरणा की कहानी बताई जाती है. ब्रांड का नाम भी इसी संदर्भ से जोड़ा जाता है.
यह एक गहरे रंग की रम है, जिसे आम तौर पर इसकी खास बोतल और उस पर बने साधु के चेहरे वाली पहचान से आसानी से पहचाना जाता है. नियमित ओल्ड मंक की अल्कोहल मात्रा 42.8 प्रतिशत ABV बताई जाती है. इसके अलग-अलग संस्करण और पैक आकार समय के साथ बाजार में उपलब्ध रहे हैं.
ओल्ड मंक की लोकप्रियता की एक खास बात यह रही कि लंबे समय तक इसके प्रचार का बड़ा हिस्सा पारंपरिक विज्ञापनों के बजाय वर्ड ऑफ माउथ से हुआ. ग्राहकों के बीच इसकी पहचान और पुरानी यादों से जुड़ाव ने इसे एक अलग ब्रांड इमेज दी.
कंपनी के इतिहास में ब्रिगेडियर कपिल मोहन का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा. उन्होंने लंबे समय तक मोहन मीकिन का नेतृत्व किया और Old Monk को भारतीय बाजार में मजबूत ब्रांड बनाने में अहम भूमिका निभाई. जनवरी 2018 में 88 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ.
आज Old Monk भारत की चर्चित रम ब्रांड्स में शामिल है और इसकी पहचान कई दशकों से भारतीय शराब बाजार के साथ बनी हुई है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ शराबों की बिक्री पर रोक लगाई है, जिसके खिलाफ यूनाइटेड स्पिरिट्स और मोहन मेकिन जैसी बड़ी कंपनियां बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची हैं. FSSAI का आरोप है कि कंपनियां गलत लेबलिंग और बिना अनुमति फ्लेवर मिलाकर शराब बेच रही हैं.
FSSAI की कार्रवाई के बाद ओल्ड मोंक, एंटिक्विटी ब्लू, रॉयल चैलेंज और बैगपाइपर डीलक्स की कुछ वैरायटी चर्चा में हैं. जानिए नियामक ने आखिर क्यों उठाया यह कदम