महाराष्ट्र सरकार दही हांडी उत्सव को UNESCO की हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी. इसके साथ ही दही हांडी में ऊंचे ह्यूमन पिरामिड बनाने वाले 'गोविंदाओं' को स्पेन भेजने की भी योजना है, जहां वे महाराष्ट्र की इस पारंपरिक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे. महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने रविवार को इसकी जानकारी दी.
मुंबई के परेल में महाराष्ट्र राज्य दही हांडी गोविंदा एसोसिएशन की ओर से आयोजित 'कृष्णानंद सोहला' कार्यक्रम में शेलार ने ये बातें कहीं. कार्यक्रम में महिला और पुरुष दही हांडी टीमों के प्रतिनिधियों, गोविंदाओं और इस उत्सव से जुड़े विभिन्न संगठनों ने हिस्सा लिया. आशीष शेलार ने कहा, 'हम दही हांडी उत्सव को UNESCO की विरासत सूची (हेरिटेज लिस्ट) में शामिल कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं. इसके साथ ही हम अपने गोविंदाओं को स्पेन भी भेजेंगे.'
स्पेन से क्या है दही हांडी का कनेक्शन?
महाराष्ट्र के दही हांडी उत्सव और स्पेन की एक पारंपरिक प्रथा के बीच एक खास समानता है. दही हांडी में गोविंदा एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर ऊंचा ह्यूमन पिरामिड बनाते हैं. वहीं स्पेन में समुदायों के बीच 'कास्टेल्स' (Castells) नाम से ह्यूमन टावर बनाने की परंपरा है. इसी समानता के कारण स्पेन की टीमें नियमित रूप से मुंबई और ठाणे आती रही हैं और दही हांडी उत्सव में हिस्सा लेती हैं. अब महाराष्ट्र सरकार राज्य के गोविंदाओं को स्पेन भेजकर वहां दही हांडी की परंपरा प्रदर्शित कराने की तैयारी कर रही है.
दही हांडी का आयोजन कृष्ण जन्माष्टमी के दौरान किया जाता है. यह उत्सव भगवान कृष्ण के बचपन और माखन-दही से जुड़ी उनकी लीलाओं की याद में मनाया जाता है. इसमें गोविंदाओं की टीमें कई स्तरों वाला मानव पिरामिड बनाती हैं और ऊंचाई पर लटकाई गई दही, मक्खन और दूध से भरी मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ने का प्रयास करती हैं.
सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील
सांस्कृतिक मामलों के मंत्री ने दही हांडी मंडलों से उत्सव के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि आयोजकों और गोविंदा टीमों को सुरक्षा संबंधी नियमों, ट्रैफिक नियमों और अन्य जरूरी सावधानियों का सख्ती से पालन करना चाहिए. शेलार ने कहा कि आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दही हांडी उत्सव की वजह से पैदल चलने वाले लोगों और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के पारंपरिक त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के लिए काम करेगी, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और आम लोगों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा. दही हांडी को UNESCO की विरासत सूची में स्थान दिलाने की पहल इसी दिशा में एक कदम के तौर पर देखी जा रही है.
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