'सिर्फ छापेमारी नहीं, सुधार भी जरूरी...', तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर पूर्व FDA आयुक्त महेश जगदे ने उठाए सवाल

पूर्व FDA कमिश्नर ने महाराष्ट्र के खाद्य प्रतिष्ठानों में चल रही मौजूदा कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा सुधार करने से सही भोजन मिलेगा, डर पैदा करने से नहीं.

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FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे सुर्खियों में हैं FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे सुर्खियों में हैं

मुस्तफा शेख

  • नई दिल्ली,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:27 PM IST

महाराष्ट्र में  Safe Food, Safe Maharashtra’ अभियान के तहत खाद्य प्रतिष्ठानों पर FDA की कार्रवाई चर्चा में है. इसी बीच महाराष्ट्र FDA के पूर्व आयुक्त और पूर्व IAS अधिकारी महेश जगदे ने विभाग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं.उनका कहना है कि 'फूड सेफ्टी कानून का मकसद सिर्फ छापेमारी या प्रतिष्ठान बंद करना नहीं, बल्कि खाने की क्वालिटी में लगातार सुधार लाना है.'

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महेश ने कहा कि 1954 के Prevention of Food Adulteration Act में मिलावट के खिलाफ छापेमारी पर ज्यादा जोर था. उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में अधिकरियों के वसूली जैसे मामले भी सामने आए. इसके बाद Food Safety and Standards Act, 2006 में खाने की क्वालिटी पर फोकस किया गया. उनका तर्क है कि किसी कारोबारी पर कार्रवाई तब होती है, जब कस्टमर तक खराब खाना पहुंच चुका होता है. इसलिए कार्रवाई से ज्यादा जरूरी है कि पहले सिस्टम में सुधार किया जाए. 

अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए  उन्होंने कहा कि उस दौरान ज्यादा प्रचार के बजाय सुधार पर ध्यान दिया गया. इसका असर जुहू चौपाटी के कारोबारियों पर भी दिखा, जहां सफाई और बेहतर फूड क्वालिटी देखने को मिली.

मौजूदा छापेमारी को लेकर महेश ने चेताया कि डर के माहौल से और कई दूसरी मुसीबतें पैदा हो सकती हैं. उनके मुताबिक, नियमों के हिसाब से पहले सुधार नोटिस दिया जाना चाहिए. उसके बावजूद पालन न होने पर लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि लगातार छापेमारी से स्थानीय कारोबारियों की छवि खराब हो सकती है और फर्जी FDA अधिकारी बनकर लोगों से ठगी का खतरा बढ़ सकता है.

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पुणे के एक मामले का जिक्र करते हुए जगदे ने कहा कि “मेरे कार्यकाल में कई सुधार नोटिस जारी किए गए और कुछ मामलों में लाइसेंस भी निलंबित किए गए  लेकिन इसके विरुद्ध कोई अदालती फैसला नहीं आया. पुणे मामले में अदालत ने 98 परसेंट अनुपालन रिपोर्ट होने के बावजूद लाइसेंस निलंबित रखने के लिए एफडीए पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इससे साफ है कि एफडीए को अपनी कार्यप्रणाली बदलने की जरूरत है.”

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वहीं विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर तीन अभिनेताओं को नोटिस दिए जाने पर उन्होंने कहा कि तंबाकू, पान मसाला और सुगंधित सुपारी पर उनके कार्यकाल में ही प्रतिबंध लगाया गया था. भ्रामक विज्ञापनों पर Food Safety Act की धारा 53 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. उनका कहना है कि जिम्मेदारी सिर्फ विज्ञापन में दिखने वाले व्यक्ति की नहीं, बल्कि उत्पाद बनाने वाले और विज्ञापन प्रसारित करने वालों की भी तय होनी चाहिए.

जगदे ने आखिर में एक अहम बात कही, कि घरों में भी खाना बनता है. अगर घर की रसोई में कॉकरोच मिल जाएं तो रसोई बंद करने के बजाय सफाई की जाती है. फूड सेफ्टी कानून का असली मकसद प्रतिष्ठानों को बंद करना नहीं, बल्कि सबसे कमजोर वर्ग तक सुरक्षित भोजन पहुंचाना और खाद्य व्यवस्था में स्थायी सुधार लाना है.

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