गुजरात विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन 'वंदे मातरम' के अपमान का मामला सामने आया है. राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला अपनी सीट पर ही बैठे रहे. इस मामले पर गुजरात सरकार के मंत्री प्रवीण माली ने आपत्ति जताई है.
प्रवीण माली ने इसे संसदीय परंपराओं का उल्लंघन बताया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के दौरान न खड़ा होना देश, भारत माता और हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली का सीधा अपमान है.
प्रवीण माली ने कहा, 'कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने सिर्फ वंदे मातरम का नहीं पूरे देश का अपमान किया है. कांग्रेस को इस पूरे मामले पर अपना स्टैंड क्लियर करना चाहिए कि ये इमरान खेड़ा वाला का व्यक्तिगत मामला है या कांग्रेस भी इसके समर्थन में है.'
बीजेपी मंत्री ने आगे कहा कि हम विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर इस पूरे मामले की शिकायत करेंगे और संवैधानिक प्रक्रिया के मुताबिक कार्रवाई की मांग करेंगे.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल गृह मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी कार्यक्रमों में पूरे तीन मिनट और 10 सेकंड तक 'वंदे मातरम' बजाया जाना अनिवार्य है. लेकिन 15 अगस्त के कार्यक्रम दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के कार्यक्रम में सोनिया गांधी ने 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों के गाए जाने पर आपत्ति जताई थी.
'वंदे मातरम' पर कांग्रेस और NC का अलग-अलग स्टैंड
कांग्रेस ने CWC में भी साफ किया था कि पार्टी 'वंदे मातरम' को लेकर 1937 का वर्जन ही फॉलो करेगी. कांग्रेस ने कहा था कि पार्टी कार्यसमिति के प्रस्ताव के तहत इस गीत के दो पैरा ही गाएगी. लेकिन 'वंदे मातरम' को लेकर INDIA गठबंधन में शामिल नेशनल कॉन्फ्रेंस का हाल ही में अलग स्टैंड देखने को मिला था.
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श्रीनगर में आयोजित पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 'वंदे मातरम' के दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला इसके सम्मान में पूरे तीन मिनट और 10 सेकंड तक खड़े रहे.
ब्रिजेश दोशी