“वंदे मातरम्” (Vande Mataram) भारत की राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है. यह कविता महान लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में अपनी प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में लिखी थी. इस कविता के शब्द मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करते हैं.
“वंदे मातरम्” का अर्थ है “मां, मैं तुझे नमन करता हूं।” इसमें भारत को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो हरियाली, नदियों और समृद्धि से परिपूर्ण है. यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के समय देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी. जन आंदोलनों और सभाओं में इसे गाया जाता था, जिससे लोगों में देशभक्ति की भावना प्रबल हुई.
1905 में बंग-भंग आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया. बाद में 1950 में भारतीय संविधान ने “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया.
“वंदे मातरम्” न केवल एक कविता है, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और एकता का अमर प्रतीक है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधान परिषद में दावा किया कि 2017 के पहले का यूपी और आज के यूपी में बदलाव आ चुका है. उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्र के आन-बान-शान का प्रतीक बताया. अखिलेश यादव ने भी आज वंदे मातरम् का जिक्र किया, लेकिन उन्होंने ये कहकर सवाल उठाया कि ये लोग तो आजादी के पहले भी वंदे मातरम् नहीं गाते थे. क्या आक्रांताओं का महिमामंडन और वंदे मातरम् जैसे मुद्दे यूपी चुनाव में अहम बनने जा रहे हैं? देखें हल्ला बोल.
'हल्ला बोल' में वंदे मातरम गीत पर देश की नई सियासी बहस को लेकर चर्चा की गई. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वंदे मातरम के सभी छह छंद सरकारी कार्यक्रमों में गाने के नए नियम जारी किए गए हैं. इस निर्णय के बाद राजनीतिक दलों के बीच धार्मिक ध्रुवीकरण की अफवाहें तेज हुई हैं. विभिन्न मेहमानों और नेताओं ने इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार साझा किए.
वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मकसूद इमरान रशादी ने पीेम मोदी से गुहार लगाते हुए कहा कि अपने प्रधानमंत्री से उम्मीद करते हैं कि वे हमारे दर्द को समझेंगे और हमारी बात पर ध्यान देंगे. हम चाहते हैं कि हमारे मुद्दों और समस्याओं पर गंभीरता से गौर किया जाए और किसी भी प्रकार के इंतजार को बढ़ने न दिया जाए.
वंदे मातरम विवाद के बी मकसूद इमरान रशीदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वंदे मातरम के तराने में कुछ अशार ऐसे हैं जो हमारे ईमान और अकीदों के खिलाफ माने जा रहे हैं. इसलिए यह कहना जरूरी है कि नेशनल एंथम, जिसे शुरू से पढ़ा जा रहा है और जिसे सभी मुसलमान सम्मान की निगाह से देखते हैं, उसे ऐसे ही बनाए रखा जाए.
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्र गीत में जिन पंक्तियों का उल्लेख है, जिनमें माँ दुर्गा और सरस्वती को जन्म देने वाली और ज्ञान देने वाली बताया गया है, वह हमारी आस्था के खिलाफ हैं. ये पंक्तियाँ देश की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं से मेल नहीं खाती हैं और इसलिए विवादास्पद मानी जा रही हैं.
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुसलमानों के पास सरकारी नौकरियां और बड़े कारोबार तो कम ही होते हैं. इसके बावजूद उनके पास अपनी आस्था है जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है. अगर वे अपनी आस्था खो बैठें तो उनके पास कुछ बच नहीं पाएगा. यह आस्था ही उनकी पहचान और मजबूती का स्रोत है.
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम गाने को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम अपने विश्वास और आस्था के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते. चाहे सरकार इस पर कुछ भी कहे, हमारे देश का संविधान हमें पूर्ण आज़ादी देता है. यदि कोई हमारी आस्था पर अपनी मनमानी थोपने की कोशिश करेगा तो हम उसे सहजता से स्वीकार नहीं करेंगे.
Vande Mataram Row: बेंगलुरु की जामिया मस्जिद के चीफ इमाम की ओर से आए इस बयान ने 'वंदे मातरम' के अनिवार्य गायन वाले सरकारी आदेश को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. मौलाना इमरान मकसूद ने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए इस आदेश पर अपनी असहमति दर्ज कराई है.
वंदे मातरम् को लेकर मध्यप्रदेश का सियासी पारा एक बार फिर से गरम हो गया है और इसकी अनिवार्यता को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है कि अब स्कूलों में रोज और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के 6 छंदों वाला गीत गाया या बजाया जाना अनिवार्य होगा. इसे लेकर मुस्लिम समुदाय की ओर से आपत्ति शुरू हो गई है. मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि वंदे मातरम् के 6 छंदों में मूर्ति पूजा की पंक्तियां हैं जो इस्लाम धर्म के खिलाफ हैं. ऐसे में आज हम दंगल में यही चर्चा करेंगे कि क्या स्कूलों में वंदे मातरम् की अनिवार्यता मुस्लिम धर्म विरोधी है या वंदे मातरम् का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्र के उस आदेश का स्वागत किया जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सभी छह छंदों को गाना जरूरी कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य में इस आदेश को लागू करेगी.
राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. गृह मंत्रालय के आदेशानुसार सरकारी कार्यक्रमों, विद्यालयों और औपचारिक आयोजनों में अब वंदे मातरम बजाना और उसके सम्मान में सभी को खड़ा होना अनिवार्य होगा. यदि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान साथ बज रहे हों तो वंदे मातरम पहले बजेगा और सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा. नए नियम के अनुसार वंदे मातरम का पूरा छह पैराग्राफ वाला संस्करण तीन मिनट दस सेकंड का बजाया जाएगा.
वंदे मातरम् को लेकर सरकार ने नए नियम जारी किए हैं, जिनके आधार पर अब राष्ट्रीय गीत को राष्ट्र गान जन गण मन से पहले गाया जाएगा.
गृह मंत्रालय ने Vande Mataram को लेकर नए नियम जारी किए। अब राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रीय गीत गाया जाएगा. जानिए कहां अनिवार्य है, कितनी अवधि होगी और कब खड़ा होना जरूरी नहीं.
सरकार ने आधिकारिक अधिकारियों के लिए वंदे मातरम के छह छंदों वाले संस्करण को अनिवार्य कर दिया है. इस संस्करण की अवधि तीन मिनट दस सेकंड है और इसे सभी सरकारी समारोहों में बजाना आवश्यक होगा. यह फैसला वंदे मातरम के एक सौ पचास वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिया गया.
केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् के छह छंदों को 3 मिनट 10 सेकंड अवधि में सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान के बाद जरूरी कर दिया है.
केंद्र सरकार ने आधिकारिक समारोहों के लिए राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन और वादन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब सरकारी कार्यक्रमों में इस गीत के छह अंतरा वाले संस्करण को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है.
बीटिंग रिट्रीट समारोह में वंदे मातरम् की धुन बजाई गई. सुनिए विजय चौक पर देश की शौर्य गाथा.
77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य ताकत, स्वदेशी हथियार सिस्टम, ऑपरेशन सिंदूर की झलक और 'वंदे मातरम्' के 150 वर्षों की थीम के साथ सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला.
रिपब्लिक डे परेड में क्या रहा खास. भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन किया.
गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड निकाली गई. जिसमें 'वंदे मातरम' पर कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी. इस दौरान बंकिम चंद्र चटर्जी की फूलों से बनाई गई तस्वीर का भी प्रदर्शन किया गया. देखें वीडियो.