“वंदे मातरम्” (Vande Mataram) भारत की राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है. यह कविता महान लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में अपनी प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में लिखी थी. इस कविता के शब्द मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करते हैं.
“वंदे मातरम्” का अर्थ है “मां, मैं तुझे नमन करता हूं।” इसमें भारत को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो हरियाली, नदियों और समृद्धि से परिपूर्ण है. यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के समय देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी. जन आंदोलनों और सभाओं में इसे गाया जाता था, जिससे लोगों में देशभक्ति की भावना प्रबल हुई.
1905 में बंग-भंग आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया. बाद में 1950 में भारतीय संविधान ने “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया.
“वंदे मातरम्” न केवल एक कविता है, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और एकता का अमर प्रतीक है.
शुभेंदु सरकार ने पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. अब राज्य के सभी मदरसों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य हो गया है. इससे पहले यह नियम केवल स्कूलों पर लागू था, लेकिन अब मदरसों को भी इस नियम में शामिल किया गया है. इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा देना और सामाजिक एकता को मजबूत करना है.
बंगाल में हिंदुत्व के रथ पर सवार शुभेंदु सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. बंगाल के सभी मदरसों को जारी फऱमान में वंदे मातरम को गाना जरूरी कर दिया गया है. इससे पहले सीएम शुभेंदु अधिकारी ने मुसलमानों को लेकर एक के एक बाद कई फैसले लिए. फिर चाहे वो सार्वजनिक जगहों पर नमाज पर रोक हो...या फिर इमामों और मुअज्जिनों को मिलने वाले भत्ते को खत्म करना. देखें आज सुबह.
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है. फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है.
वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर से विवाद बढ़ गया है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस पर विरोध व्यक्त किया है और इसे विवादित गीत बताया है. इससे पहले भी वंदे मातरम को लेकर कई बार बहस होती रही है और यह विवादित मुद्दा बना हुआ है.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है. उन्होंने कहा कि संगठन इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगा.
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार की वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने की कड़ी निंदा की है. मदनी ने इसे मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है. उन्होंने कहा कि उनका संगठन सरकार के इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगा. मदनी ने ये भी आरोप लगाया कि देश में मुसलमानों और इस्लाम धर्म को निशाना बनाया जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में मॉर्निंग असेंबली के दौरान वंदे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है. शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रमुखों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू करने को कहा है. सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी छात्र इसमें भाग लें और स्कूल वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए इसका रिकॉर्ड भी रखें.
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में मॉर्निंग असेंबली के दौरान वंदे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है. नए निर्देश के अनुसार अब हर छात्र को प्रार्थना सभा में इस राष्ट्रगीत में शामिल होना होगा. सरकार ने स्कूलों को आदेश के पालन की वीडियो रिकॉर्डिंग रखने के निर्देश भी दिए हैं. इस फैसले के बाद शिक्षा व्यवस्था और असेंबली में गीतों के क्रम को लेकर नई बहस शुरू हो गई है
तमिलनाडु में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में 'वंदे मातरम' को 'तमिल थाई वलथु' से पहले बजाने को लेकर विवाद हो रहा है. इसे लेकर सत्तारूढ़ टीवीके के सहयोगी दल VCK ने भी CM विजय को घेर लिया है. VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने इसे परंपरा का उल्लंघन बताया और उनकी विचारधारा पर सवाल खड़े कर दिए.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में दो बार 'वंदे मातरम' गाया गया. केंद्र सरकार के नए निर्देशों का पालन करते हुए 'वंदे मातरम' के सभी छह छंद राष्ट्रगान से भी पहले गाए गए.
अब वंदे मातरम् को भी राष्ट्रगान के बराबर दर्जा मिलने वाला है, जिसके बाद से वंदे मातरम् के अपमान पर जेल भी हो सकती है. तो जानते हैं कि आखिर इसके नए नियम हैं क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के समान दर्जा देने का निर्णय लिया गया. सरकार ने इसके लिए 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकार किया है.
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. प्रस्तावित बदलाव में अपमान पर सजा का प्रावधान भी शामिल बताया जा रहा है.
बिहार के लोकभवन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह में पूरा वंदे मातरम् छह छंदों के साथ गाया गया. फरवरी 2026 में सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को अनिवार्य किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी संस्थानों और स्कूलों में प्रतिदिन 'वंदे मातरम' गायन अनिवार्य करने के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. अदालत ने याचिका को 'प्री-मैच्योर' करार देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार की यह गाइडलाइन केवल एक सलाह है और इसके उल्लंघन पर किसी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी विधान परिषद में दावा किया कि 2017 के पहले का यूपी और आज के यूपी में बदलाव आ चुका है. उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्र के आन-बान-शान का प्रतीक बताया. अखिलेश यादव ने भी आज वंदे मातरम् का जिक्र किया, लेकिन उन्होंने ये कहकर सवाल उठाया कि ये लोग तो आजादी के पहले भी वंदे मातरम् नहीं गाते थे. क्या आक्रांताओं का महिमामंडन और वंदे मातरम् जैसे मुद्दे यूपी चुनाव में अहम बनने जा रहे हैं? देखें हल्ला बोल.
'हल्ला बोल' में वंदे मातरम गीत पर देश की नई सियासी बहस को लेकर चर्चा की गई. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वंदे मातरम के सभी छह छंद सरकारी कार्यक्रमों में गाने के नए नियम जारी किए गए हैं. इस निर्णय के बाद राजनीतिक दलों के बीच धार्मिक ध्रुवीकरण की अफवाहें तेज हुई हैं. विभिन्न मेहमानों और नेताओं ने इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार साझा किए.
वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मकसूद इमरान रशादी ने पीेम मोदी से गुहार लगाते हुए कहा कि अपने प्रधानमंत्री से उम्मीद करते हैं कि वे हमारे दर्द को समझेंगे और हमारी बात पर ध्यान देंगे. हम चाहते हैं कि हमारे मुद्दों और समस्याओं पर गंभीरता से गौर किया जाए और किसी भी प्रकार के इंतजार को बढ़ने न दिया जाए.
वंदे मातरम विवाद के बी मकसूद इमरान रशीदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वंदे मातरम के तराने में कुछ अशार ऐसे हैं जो हमारे ईमान और अकीदों के खिलाफ माने जा रहे हैं. इसलिए यह कहना जरूरी है कि नेशनल एंथम, जिसे शुरू से पढ़ा जा रहा है और जिसे सभी मुसलमान सम्मान की निगाह से देखते हैं, उसे ऐसे ही बनाए रखा जाए.
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्र गीत में जिन पंक्तियों का उल्लेख है, जिनमें माँ दुर्गा और सरस्वती को जन्म देने वाली और ज्ञान देने वाली बताया गया है, वह हमारी आस्था के खिलाफ हैं. ये पंक्तियाँ देश की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं से मेल नहीं खाती हैं और इसलिए विवादास्पद मानी जा रही हैं.
मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुसलमानों के पास सरकारी नौकरियां और बड़े कारोबार तो कम ही होते हैं. इसके बावजूद उनके पास अपनी आस्था है जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है. अगर वे अपनी आस्था खो बैठें तो उनके पास कुछ बच नहीं पाएगा. यह आस्था ही उनकी पहचान और मजबूती का स्रोत है.