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वंदे मातरम्

वंदे मातरम्

वंदे मातरम्

“वंदे मातरम्” (Vande Mataram) भारत की राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है. यह कविता महान लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में अपनी प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में लिखी थी. इस कविता के शब्द मातृभूमि के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करते हैं.

“वंदे मातरम्” का अर्थ है “मां, मैं तुझे नमन करता हूं।” इसमें भारत को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो हरियाली, नदियों और समृद्धि से परिपूर्ण है. यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के समय देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी. जन आंदोलनों और सभाओं में इसे गाया जाता था, जिससे लोगों में देशभक्ति की भावना प्रबल हुई.

1905 में बंग-भंग आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया. बाद में 1950 में भारतीय संविधान ने “वंदे मातरम्” को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया.

“वंदे मातरम्” न केवल एक कविता है, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और एकता का अमर प्रतीक है.

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वंदे मातरम् न्यूज़

  • समाजवादी पार्टी नेता अराधना मिश्रा ने BJP पर लगाया ये आरोप

    समाजवादी पार्ची की नेता अराधना मिश्रा ने वंदे मातरम पर बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया. उन्होनें कहा कि 1998 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी जब कल्याण सिंह सीएम थे और स्कूलों में सरस्वती वंदना और वंदे मातरम अनिवार्य कर दी गई थी और इसका विरोध होने पर इस आदेश को वापिस लिया गया.

  • CM योगी आदित्यनाथ ने बताया वंदे मातरम का महत्व, देखें

    यूपी विधानसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस गीत के देश की स्वतंत्रता संग्राम में निभाए गए योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि वंदे मातरम ने आजादी के आंदोलन को दिशा दी और इसका इतिहास बेहद गौरवशाली है. इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस द्वारा जबर्दस्ती लागू की गई इमरजेंसी और संविधान पर उस समय हुए प्रहार की भी आलोचना की.

  • विपक्षी पार्टियों को लेकर क्या बोले केशव प्रसाद मौर्य?

    केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि आज के राजनीतिक परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी ने जय मातरम और जय श्रीराम जैसे नारे बुलंद किए हैं. भाजपा के इस रुख के कारण अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को भी जनता के बीच अपनी हिंदू पहचान जताने के लिए वंदे मातरम कहना और मंदिरों में जाना जरूरी हो गया है. इस बदलाव ने राजनीति की दिशा बदल दी है, जहां सभी पार्टियों को अपनी पृष्ठभूमि एवं विचारधारा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना पड़ रहा है. धीरे-धीरे यह विषय सभी के लिए अहम होता जा रहा है और अब यह केवल एक पार्टी का मुद्दा नहीं रहा बल्कि हर राजनीतिक दल के लिए आवश्यक हो गया है. इससे राजनीतिक क्षेत्र में धार्मिक पहचान की भूमिका और भी बढ़ गई है.

  • CM योगी ने वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

    वंदे मातरम के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है और यह गीत राजनीति की चपेट में आ गया है. योगी ने बताया कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर समझौता किया है जबकि इसका इतिहास देश के आंदोलन से जुड़ा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम की शताब्दी मनाते समय भी देश में ब्रिटिश हुकूमत थी और तब की कांग्रेस ने आपातकाल लगा कर संविधान को कमजोर करने का प्रयास किया था. आज जब वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मविश्वास के साथ एक विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है. योगी ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के द्वारा रचित इस गीत का सपना आज के भारत में साकार हो रहा है, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में श्रेष्ठ भारत की संकल्पना के रूप में आगे बढ़ रहा है. इसलिए इस विषय पर संसद में चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है.

  • UP विधानसभा में वंदे मातरम पर चर्चा, CM योगी आदित्यनाथ ने बताया महत्व

    उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि वंदे मातरम ने देश की आजादी के आंदोलन को सही दिशा दी और यह राष्ट्रीय एकता एवं देशभक्ति का प्रतीक रहा है. स्वतंत्रता संग्राम के समय वंदे मातरम ने लोगों को प्रेरित किया और आंदोलन को नई ऊर्जा दी.

  • 'अखिलेश यादव ज्ञान...', वंदे मातरम पर बोले केशव प्रसाद मौर्य

    उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के वंदे मातरम वाले बयान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उनपर हमला किया है. उन्होनें कहा कि अकिलेश यादव जी ज्ञान न दें, वंदे मातरम पर चर्चा करना भारत के उस महा मंत्र का गान करना है जिस उल्लेख करते ही अंग्रेज भारत छोड़ कर भाग गए.

  • 'वंदे मातरम पर नहीं, प्रदूषण पर चर्चा होनी चाहिए', बोलीं रेणुका चौधरी

    रेणुका चौधरी का कहना है कि हमारे बच्चे, हमारे बुजुर्ग, हमारे देशवासी, हमारे दिल्लीवासी शर्मिंदा हो रहे हैं. हम दुनिया के नज़रों में ये सोचते हैं कि भारत जो एक बड़ा लोकतंत्र है उसकी राजधानी में हम सांस तक नहीं ले पा रहे हैं. और इन लोगों को ये अहसास नहीं हो रहा कि ये एक बहुत बड़ा मुद्दा है. संसद में इस पर कम से कम दस घंटे की चर्चा होनी चाहिए थी. वंदे मातरम एक सम्मानित गीत है जिसे हम सभी जानते हैं, लेकिन आज कुछ लोग इसे एक नए नशे की तरह लेकर हमें समझा रहे हैं कि इसका मतलब क्या है. लेकिन हमारे रग रग में वंदे मातरम समाया हुआ है.

  • इथियोपिया में PM मोदी के सम्मान में गूंजा 'वंदे मातरम्', प्रधानमंत्री ने हाथ उठाकर बजाई तालियां- VIDEO

    इथियोपिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक वीडियो साझा कर बताया कि प्रधानमंत्री अबी अहमद द्वारा आयोजित डिनर में इथियोपियाई गायकों ने 'वंदे मातरम्' का गायन किया. 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा के बीच इस गीत का गाया जाना भारत–इथियोपिया संबंधों की गहराई को दर्शाता है.

  • वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर क्या बोला बंकिमचंद्र चटर्जी का परिवार?

    एजेंडा आजतक में मशहूर कवि कुमार विश्वास ने वंदे मातरम् के मुद्दे पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे धर्म से ऊपर संविधान को मानते हैं और इसे सबसे पहले प्राथमिकता देते हैं. इस दौरान उन्होंने इशारों-इशारों में देश के सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का उल्लेख भी किया.

  • अंडमान में वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण, हिंदुत्व को दी जा रही धार?

    अंडमान निकोबार की राजधानी में वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण हुआ. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अनावरण किया. संसद में वंदे मातरम पर चर्चा के बाद यह घटना हिंदुत्व की नई रफ्तार को दर्शाती है. सरकार अब आरएसएस के साथ खुले तौर पर कदम मिला रही है.

  • Retro Review: एक ऐसी फिल्म जिसने 'वंदे मातरम्' से भरा राष्ट्रवाद का जोश, संन्यासी विद्रोह की कहानी लेकर आई थी 'आनंद मठ'

    रेट्रो रिव्यू सीरीज के तहत इस बार हम 1952 में रिलीज हुई फिल्म 'आनंद मठ' पर नजर डालते हैं. जिसमें संन्यासी और देशभक्त मिलकर अंग्रेजों से लड़ते हैं, और यह फिल्म देशभक्ति, त्याग और 'वंदे मातरम' गीत के माध्यम से राष्ट्रीय भावना को दर्शाती है.

  • 'बंकिम दा ने हमें सिखाया देश से बड़ा कोई नहीं होता'

    बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के सदस्य ने कहा कि बंकिम बाबू ने हमें सिखाया कि देश से बड़ा कोई नहीं होता है. देश हमारे अस्तित्व का एक नाम है. जब कोई व्यक्ति फाँसी की घड़ी में भी वंदे मातरम बोलता है, तो इसका मतलब है कि इस मंत्र में अनंत शक्ति और साहस छुपा है.

  • वंदे मातरम पर क्या बोले BJP नेता दिलीप घोष?

    BJP नेता दिलीप घोष ने वंदे मातरम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होनें कहा कि देशभक्ति से भरपूर वंदेमातरम का संदेश हर स्कूल और कॉलेज में बच्चों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है. यह मंत्र हमारे स्वतंत्रता संग्राम की अहम पहचान है जिसमें लाखों लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया. नई पीढ़ी को देशभक्ति की महत्ता समझाने के लिए वंदेमातरम को अनिवार्य करना चाहिए.

  • बड़ी बेटी को पसंद नहीं आया था वंदे मातरम्, तब बंकिम बाबू ने कहा था, एक दिन...

    वंदे मातरम् गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के सदस्य सजल और जॉयदीप चट्टोपाध्याय ने 'एजेंडा आजतक' मंच पर बंकिम बाबू के जीवन से जुड़ी खास बातें और वंदे मातरम् गीत के पीछे की कहानी साझा की.

  • कैसे ल‍िखा गया राष्ट्रगीत वंदेमातरम? बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के परपोते ने सुनाए अनसुने क‍िस्से

    एक बार फिर सज चुका है एजेंडा आजतक का महामंच. देश के सबसे व‍िश्वन‍ीय न्यूज चैनल आजतक के इस दो द‍िवसीय कार्यक्रम का ये 14वां संस्करण है. ज‍िसके दूसरे द‍िन मंच पर व‍िशेष तौर पर आमंत्रित थे-कुमार विश्वास, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के परपोते सजल चट्टोपाध्याय, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के परपोते जॉयदीप चट्टोपाध्याय. सेशन 'वंदे मातरम के 150 वर्ष' में उनसे हुई क्या खास बातचीत, जानने के ल‍िए देखें ये पूरा सेशन.

  • 'बंकिम बाबू के नाम से बने यूनिवर्सिटी...', वंदे मातरम् पर हंगामे के बीच परिवार ने उठाई ये मांग

    वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद के दोनों सदनों में गहन बहस हुई. कवि कुमार विश्वास ने इसे भारत की मूल भावना का मंत्र बताया. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के सदस्यों ने विश्वविद्यालय और रिसर्च सेंटर बनाने की इच्छा जताई.

  • वंदे मातरम पर क्या बोले कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल?

    कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने वंदे मातरम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होनें अंग्रेज हेनरी क्रेक का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होनें कहा था 1937 में वंदे मातरम वास्तव में उन स्वतंत्र सेनानियों की लड़ाई की आवाज थी जिन्हें आतंकवादी कहा गया. इसका मतलब यह था कि जो लोग कॉलोनियल पावर के खिलाफ लड़ रहे थे.

  • बंकिम दा vs बंकिम बाबू... पीएम मोदी की 'चूक' को ममता बनर्जी कितना बड़ा अपराध बना पाएगी?

    वंदे मातरम् पर संसद में बहस हुई, और ममता बनर्जी को मजबूरी में समर्थन करना पड़ा. क्योंकि, पश्चिम बंगाल में अगले साल चुनाव होने वाले हैं. बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बात को ममता बनर्जी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि वो तत्काल प्रभाव से भूल सुधाकर कर चुके होते हैं.

  • 'आप तर्क और तथ्य के आधार पर बात करते', बोले मुख्तार अब्बास नकवी

    मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि वंदे मातरम और इलेक्टोरल रिफॉर्म जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हमेशा गंभीर और तर्कसंगत होनी चाहिए. ये ऐसे विषय हैं जिन पर नॉनसेंस और गैर-गंभीर तरीके से बात नहीं की जा सकती. इन्हें तथ्य और तर्क आधारित दृष्टिकोण से समझना और बात करना आवश्यक है ताकि सही समाधान निकाले जा सकें. इस संदर्भ में, सभी को जिम्मेदाराना और सूझ-बूझ वाली बातचीत करनी चाहिए.

  • Agenda Aajtak 2025: 'एजेंडा आजतक' का हुआ आगाज, सिंगर दिवाकर शर्मा की आवाज में सुनें 'वंदे मातरम'

    एक बार फिर सज चुका है एजेंडा आजतक का महामंच. देश के सबसे व‍िश्वन‍ीय न्यूज चैनल आजतक के इस दो द‍िवसीय कार्यक्रम का ये 14वां संस्करण है. ज‍िसका आगाज सिंगर द‍िवाकर शर्मा ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाकर क‍िया. देखें वीड‍ियो.

  • पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर कौन थे? वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में क्यों हुआ जिक्र

    राज्यसभा में वंदे मातरम् को लेकर हुई बहस में बीजेपी सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर का जिक्र किया. उन्होंने 1923 के काकीनाडा अधिवेशन का हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली जौहर ने पलुस्कर को वंदे मातरम् गाने से रोका था, जबकि पलुस्कर ने विरोध स्वरूप पूरा गीत गाया.

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