AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के पर्सनल बॉन्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है और कल इस मामले में फैसला सुनाया जाएगा. सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की छवि को लेकर कोर्ट की टिप्पणी और सरकार की ओर से दी गई दलील चर्चा में रही. कोर्ट ने कहा कि नेहा को पहले ही 'बैड बॉय' की तरह पेश कर दिया गया है और अब उनसे अच्छे व्यवहार का वादा करने को कहा जा रहा है.
इस पर एएसजी चेतन शर्मा ने सवाल उठाया कि छह FIR का सामना कर रहे व्यक्ति को क्या 'दूध का धुला' माना जा सकता है. सरकार ने यह भी दावा किया कि नेहा बोरा ऐसी बैठक में शामिल थीं, जहां 'रिजीम चेंज' की बात कही गई थी.
यह भी पढ़ें: नेहा बोरा के पर्सनल बॉन्ड केस में फैसला कल, दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी
'बैड बॉय' की छवि पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान चेतन शर्मा ने कहा कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने नोटिस जारी करने से पहले मामले पर विचार किया था. उनके मुताबिक, इसके लिए जनरल डायरी की एंट्री, पहले दर्ज FIR, अपराधों के रिकॉर्ड और उस समय सड़कों पर बने हालात को आधार बनाया गया. उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी को बुलाकर मामले की जानकारी भी मांगी थी.
इस पर कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति से अच्छे व्यवहार का वादा मांगने से यह धारणा बन सकती है कि वह पहले ठीक व्यवहार नहीं कर रहा था. बेंच ने टिप्पणी की कि व्यक्ति पर लगा यही दाग ऐसी कार्यवाही की वजह बना है और इसका संबंध संविधान के अनुच्छेद 21 से भी है. जवाब में चेतन शर्मा ने कहा कि छह FIR का सामना कर रहे व्यक्ति को पूरी तरह निर्दोष या 'दूध का धुला' कैसे माना जा सकता है.
'रिजीम चेंज' की लड़ाई का भी जिक्र
एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि नेहा बोरा के खिलाफ कार्रवाई बिना किसी आधार के शुरू नहीं की गई. उन्होंने दावा किया कि नेहा ने CJP के नेताओं और प्रशांत भूषण के साथ एक संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया था, जहां कथित तौर पर कहा गया, "यह रिजीम चेंज की लड़ाई है और हम रिजीम चेंज करवाकर रहेंगे."
यह भी पढ़ें: CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से रिहा, इस शर्तों पर मिली बेल
इस पर नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की बात करने में कुछ गलत नहीं है. नेहा ने SEM के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने को कहा गया है. उनके वकील का तर्क है कि नेहा ने केवल मंडी हाउस में जुटने की अपील की थी, हिंसा या कानून तोड़ने का आह्वान नहीं किया था.
संजय शर्मा