दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन... बिना PUC नहीं मिलेगा फ्यूल, बाहरी गाड़ियों पर भी नजर

इस बार दिल्ली में सर्दियों के साथ प्रदूषण से निपटने की चुनौती भी बढ़ने वाली है. रेखा सरकार ने गाड़ियों, निर्माण स्थलों और दफ्तरों को लेकर कई कदम तय किए हैं. अब देखना यह होगा कि इन नियमों से दिल्ली की हवा में वाकई सुधार आएगा, या हर साल की तरह प्रदूषण पर बहस ही होती रहेगी?

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दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए रेखा सरकार का विंटर प्लान (Photo-File) दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए रेखा सरकार का विंटर प्लान (Photo-File)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली ,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST

दिल्ली में सर्दियां आते ही प्रदूषण का खतरा बढ़ने लगता है. धुंध, जहरीली हवा और सांस लेने में परेशानी से बचने के लिए इस बार दिल्ली सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक के लिए विंटर एक्शन प्लान तैयार किया है. इसमें बिना PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन न देने से लेकर बाहरी गाड़ियों की एंट्री पर रोक, निर्माण स्थलों की निगरानी और वर्क फ्रॉम होम तक के कदम शामिल हैं.

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विंटर एक्शन प्लान के तहत 'No PUC, No Fuel' नीति लागू करने की बात कही गई है. यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना गाड़ी चलाने वालों पर सख्ती बढ़ेगी और ऐसे वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने पर रोक रहेगी.

इसके अलावा BS-VI मानक से नीचे के बाहरी वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना है. इसका मकसद दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही कम करना है. हालांकि, इन नियमों का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें किस तरह लागू किया जाता है और निगरानी कितनी प्रभावी रहती है.

यह भी पढ़ें: ई-रिक्शा में ‘ओवरलोडिंग’ पर लगेगा ब्रेक? दिल्ली सरकार ने खोला नियमों का नया पिटारा

निर्माण स्थलों पर AI कैमरों से निगरानी

दिल्ली में प्रदूषण की एक बड़ी वजह निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी है. इसे रोकने के लिए सरकार निर्माण स्थलों पर सख्ती बढ़ाने और AI कैमरों के जरिए निगरानी करने पर जोर दे रही है. नियमों का उल्लंघन करने वाले स्थलों पर कार्रवाई करना इस व्यवस्था की अहम कड़ी होगी.

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वर्क फ्रॉम होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर

योजना में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है. इसके साथ बसों, मेट्रो और आखिरी दूरी तक पहुंचाने वाली परिवहन सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता घट सके.

चार महिने तक चलने वाले इस प्लान के  सामने असल चुनौती इसके पालन को लेकर है. इसके लिए वाहन, निर्माण कार्य और रोजाना की आवाजाहीतीनों पर एक साथ काम करना होगा.

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