दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे ने पांच घरों के सपने हमेशा के लिए तोड़ दिए. रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस हादसे में कुल सात लोगों की जान चली गई, जबकि पांच लोग अब भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जिनमें तीन की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है.
एम्स में पोस्टमार्टम के बाद मरने वालों की पहचान हो चुकी है, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच छात्र शामिल हैं. वहीं हादसे के आरोपी बिल्डिंग मालिक परिवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जा चुका है.
यह हादसा दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ था, जहां एक बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई और कई जिंदगियां मलबे के नीचे दब गईं. मौके पर पहुंची एजेंसियों ने रात दिन एक करके मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की. करीब सत्ताईस घंटे तक रेस्क्यू का काम बिना रुके चलता रहा. बचाए गए सभी लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुल बारह लोगों को भर्ती कराया गया था.
इनमें से सात लोग अपनी जिंदगी की जंग हार गए, जिनमें एक शख्स की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. बाकी पांच लोगों का इलाज अभी चल रहा है, जिनमें से तीन की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है.
एम्स में पोस्टमार्टम के बाद हुई मृतकों की पहचान
एम्स दिल्ली की तरफ से बताया गया कि मरने वाले सात लोगों का पोस्टमार्टम कर दिया गया है और पहचान सामने आ गई है. मरने वालों में पांच छात्र शामिल हैं, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग अलग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे और इसी बिल्डिंग में किराए पर रहते थे. इनमें मध्य प्रदेश के अर्पित राज और अक्षत सिंह, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के युवराज सोनी, उत्तर प्रदेश के अभिषेक कुमार और उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के पवन कुमार शामिल हैं. इन सभी की उम्र सिर्फ 16 से 20 साल के बीच थी.
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पवन औरैया के रहने वाले थे और मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीएससी के छात्र थे. अर्पित जहाज देवास जिले के रहने वाले थे और रक्षाबंधन की छुट्टियां बिताकर लौटे ही थे कि कुछ ही घंटों बाद हादसे ने उनकी जान ले ली. अक्षत सिंह यादव कटनी जिले से थे और बीकॉम के छात्र थे. युवराज सोनी दुर्ग शहर के रहने वाले थे और अपने पिता की दवा दुकान के इकलौते बेटे थे. अभिषेक सोनभद्र जिले के रेणुकूट इलाके के रहने वाले थे.
होशियार छात्र, फुटबॉलर और वक्ता… IPS बनना चाहता था हादसे में जान गंवाने वाला अक्षत
अक्षत यादव का पार्थिव शरीर मध्य प्रदेश के कटनी स्थित उनके पैतृक घर पहुंचा. इस दौरान उनकी शिक्षिका सीमा यादव ने अक्षत को याद करते हुए बताया कि वह बेहद होनहार छात्र थे. उन्होंने कहा कि अक्षत एक अच्छे फुटबॉलर और वक्ता थे.
उनका सपना IPS अधिकारी बनने का था. सीमा यादव ने बताया कि हादसे की खबर वे टीवी पर देख रहे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि हादसे का शिकार उनके अपने परिवार का बच्चा है. रात करीब 9 बजे उन्हें अक्षत के वहां फंसे होने की जानकारी मिली और अगले दिन सुबह करीब 9:30 बजे उनके निधन की पुष्टि हुई.
हादसे में दो मजदूरों की भी मौत, एक मृतक की पहचान बाकी
मरने वालों में दो मजदूर भी शामिल हैं. एम्स ट्रॉमा सेंटर में सोमवार को परम लाल कोरी और सुरेंद्र सिंह का भी पोस्टमार्टम किया गया और उनके शव परिवार वालों को सौंप दिए गए. इसके अलावा जिस एक शख्स की पहचान नहीं हो सकी है, उसकी जानकारी जुटाने की कोशिश जारी है.
घायलों में असगर अली, नीरज बावा, आदित्य कुमार, नितीश चिब और मोहम्मद अयान शामिल हैं. इनकी उम्र अठारह से तीस साल के बीच है और डॉक्टरों की टीम इन सभी की हालत पर लगातार नजर रखे हुए है.
बिल्डिंग मालिक परिवार गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग मालिक परिवार को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार किए गए लोगों में हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और उनका बेटा महेश शामिल हैं. दिल्ली पुलिस इन तीनों को आरके पुरम थाने लेकर आई और बाद में कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है.
लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या सिर्फ बिल्डिंग मालिक को गिरफ्तार कर लेना काफी है, या फिर उन नगर निगम और प्रशासनिक विभागों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, जिनके पास इन बिल्डिंगों की जांच और मंजूरी का जिम्मा होता है. आखिर यह बिल्डिंग बिना पूरी जांच के इतने सालों तक कैसे खड़ी रही, इसका जवाब भी जरूरी है.
हादसे के बाद PG छोड़कर कॉलेज में शरण लेने पहुंचे छात्र
इस हादसे का असर सिर्फ पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं रहा. सत्य निकेतन में पीजी में रहने वाले बाकी छात्रों में भी दहशत का माहौल फैल गया है. हादसे के बाद बड़ी संख्या में छात्र डर के मारे पीजी छोड़कर श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में शरण लेने पहुंच गए. कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल इन छात्रों के लिए क्लासरूम में रहने और खाने का इंतजाम किया है, लेकिन यह व्यवस्था कब तक चलेगी, यह साफ नहीं है.
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PG बिल्डिंगों की सुरक्षा पर उठे सवाल, छात्रों में दहशत का माहौल
छात्रों का कहना है कि उन्हें अपने पीजी की बिल्डिंग की मजबूती पर अब भरोसा नहीं रह गया है. उनके पास यह जांचने का कोई तरीका नहीं है कि उनकी बिल्डिंग सुरक्षित है या नहीं. सवाल यह भी उठ रहा है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने अब तक इन पीजी बिल्डिंगों की नियमित जांच क्यों नहीं करवाई, और पीजी चलाने वालों के सुरक्षा प्रमाण पत्रों की जांच कभी हुई भी थी या नहीं.
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में हॉस्टल सीटें सीमित होने से हजारों छात्र निजी पीजी के भरोसे रहते हैं, ऐसे में यह हादसा सिर्फ एक बिल्डिंग का मामला नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी कहता है.
छात्रों की मांग- सभी PG बिल्डिंगों की हो तुरंत सुरक्षा जांच
छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी पीजी बिल्डिंगों की सुरक्षा जांच तुरंत कराई जाए और असुरक्षित बिल्डिंगों में रह रहे छात्रों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए. साथ ही दोषी पीजी संचालकों और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है. छात्रों ने बताया कि कॉलेज में फिलहाल जगह मिल गई है, लेकिन मन से डर अभी नहीं गया है और जब तक सरकार सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं देती, यह डर बना रहेगा.
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