दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत के ढहने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी बिल्डिंग मालिक हरिराम, उसकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. वहीं, कई अफसरों को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
अदालत ने आरोपी हरिराम और उसकी पत्नी उर्मिला गुप्ता को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. वहीं, उसके बेटे महेश गुप्ता को दो दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. लेकिन इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी और सस्पेंशन से व्यवस्था सुधर जाएगी?
इस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया और इसी कड़ी में MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. सस्पेंड होने वाले अधिकारियों में राकेश कुमार (डिप्टी कमिश्नर), रणवीर सिंह- (सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर), ललित कुमार गोयल (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर), सुनील चौहान (असिस्टेंट इंजीनियर) और आशीष कुमार राय (जूनियर इंजीनियर) शामिल हैं.
दिलचस्प और हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें से तीन अधिकारी- DC राकेश कुमार, SE रणवीर सिंह और JE आशीष कुमार राय, मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में हुए रेस्टोरेंट अग्निकांड के समय भी MCD के दक्षिण जोन में ही तैनात थे. मालवीय नगर हादसे के दौरान बिल्डिंग विभाग के इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. लेकिन सत्य निकेतन हादसे के बाद इन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया गया.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए आदेश
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सख्त निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने दिल्ली के तमाम पेइंग गेस्ट हॉस्टलों के 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' के आदेश दिए हैं. छात्रों के गढ़ माने जाने वाले इलाकों जैसे- मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, साकेत और सत्य निकेतन पर कड़ी नजर रखने और चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
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गिरफ्तारी-सस्पेंशन के बीच ये बड़े सवाल बरकरार
इमारत हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत होने की खबर है. इनमें 5 छात्र और दो मजदूर शामिल हैं. इसके साथ ही कई लोग घायल हैं जिनका एम्स में इलाज चल रहा है. ऐसे में ये सवाल अब भी बरकरार है कि क्या आधिकारियों को सिर्फ सस्पेंड कर देने से आगे इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है?
सवाल ये भी है कि क्या सस्पेंड किए गए अधिकारियों पर विभागीय जांच के बाद ठोस कार्रवाई होगी या कुछ दिनों बाद मामला ठंडा होते ही सब पहले जैसा हो जाएगा? और आखिर कब तक प्रशासन की लापरवाही के चलते इस तरह के हादसों से दो-चार होना पड़ेगा?
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