दिल्ली में पॉल्यूशन का सॉल्यूशन क्या? भूपेंद्र यादव ने बताया उपाय

आजतक पंचायत राजस्थान कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर 11 सूत्रीय कार्ययोजना साझा करते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान बैठकों से नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई, आधुनिक तकनीक और राज्यों के बेहतर समन्वय से संभव है.

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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव (Photo-ITG) केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

आजतक पंचायत राजस्थान के कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शिरकत की. इस दौरान दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर भूपेंद्र यादव ने बताया कि कैसे एनसीआर को प्रदुषण मुक्त बनाने के लिए उपाय किए जा रहे हैं. सरकार की कार्ययोजना का ब्योरा दिया है.

उन्होंने कहा कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल बैठकों से नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई, आधुनिक तकनीक और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से निकलेगा.

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भूपेंद्र यादव ने बताया कि सरकार ने प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों को ध्यान में रखते हुए 11 सूत्रीय कार्ययोजना तैयार की है. इसके तहत वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, सड़क की धूल, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और ठोस कचरे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान कर उनकी निगरानी और प्रबंधन के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. 

प्रदूषण के समाधान के लिए 11 सूत्रीय कार्ययोजना

भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले फरवरी से दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या पर लगातार बैठकें की गई हैं. इसके बाद संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की गई है.

उन्होंने कहा कि प्रदूषण की समस्या को एक ही कारण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. वाहनों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों का उत्सर्जन, सड़कों की धूल, निर्माण स्थलों से उड़ने वाले कण और कचरे का अनुचित निस्तारण, सभी पर एक साथ काम करना जरूरी है.

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यादव के मुताबिक, सरकार का जोर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने, उनकी निगरानी बढ़ाने और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर है.

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर फोकस, ई-बसों को बढ़ावा

भूपेंद्र यादव ने बातचीत में दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.

उन्होंने दिल्ली में 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से संबंधित नियमों को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन करें.

उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की बात भी कही. यादव ने बताया कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं और हाल में 150 इलेक्ट्रिक बसें शामिल किए जाने का भी जिक्र किया.

सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने से निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने और उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है.

उद्योगों के प्रदूषण पर निगरानी, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई

औद्योगिक प्रदूषण पर भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत कर रही है. उन्होंने बताया कि लगभग 350 से 400 औद्योगिक इकाइयों को ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है.

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उनके मुताबिक, इन इकाइयों से संबंधित प्रदूषण नियंत्रण तंत्र को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निगरानी व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने गैर-अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई का भी उल्लेख किया.

यादव ने कहा कि उद्योगों में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने और उत्सर्जन पर नजर रखने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है,

सड़क की धूल रोकने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग

भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली-NCR में सड़क की धूल वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. इसे नियंत्रित करने के लिए सड़कों की नियमित सफाई और मैकेनिकल स्वीपिंग पर जोर दिया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों के संचालन और सफाई की निगरानी के लिए एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में डैशबोर्ड आधारित व्यवस्था विकसित की गई है.

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह देखना है कि मशीनें निर्धारित क्षेत्रों में सफाई कर रही हैं या नहीं और संबंधित एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा रही हैं या नहीं. यादव के मुताबिक, केवल मशीनें उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। उनका नियमित संचालन और सफाई की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है.

निर्माण स्थलों पर धूल की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल

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दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और तोड़फोड़ (Construction and Demolition) से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण को लेकर भी भूपेंद्र यादव ने सरकार की योजना बताई. उन्होंने कहा कि दिल्ली में निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.  

बातचीत के दौरान उन्होंने करीब 170 निर्माण स्थलों की निगरानी का उल्लेख किया और कहा कि संबंधित स्थलों से जुड़े प्रदूषण संबंधी आंकड़ों को एकीकृत निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि निर्माण स्थलों पर धूल को बाहर फैलने से रोकने के लिए निर्धारित उपायों का पालन जरूरी है. इसके लिए संबंधित एजेंसियों को निरीक्षण और नियमों के अनुपालन पर ध्यान देना होगा.

दिल्ली के 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी

भूपेंद्र यादव ने बताया कि दिल्ली में 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ आनंद विहार जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया गया है। ऐसे क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही, बसों की संख्या, धूल और कचरे के प्रबंधन जैसी समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

यादव के मुताबिक, प्रत्येक हॉटस्पॉट के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने का प्रयास किया गया है, ताकि कार्रवाई की निगरानी की जा सके और समस्याओं का समाधान किया जा सके.

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ठोस कचरे के प्रबंधन पर भी सरकार का जोर

दिल्ली-NCR में ठोस कचरे के निस्तारण को लेकर भूपेंद्र यादव ने कहा कि केवल नगर निगमों के भरोसे प्रदूषण और कचरे की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता. छोटी नगरपालिकाओं और बड़े आवासीय परिसरों को भी इस व्यवस्था में शामिल करना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि कई बड़ी आवासीय सोसायटियों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा पैदा होता है। ऐसे संस्थानों और परिसरों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखकर कचरे के पृथक्करण और उचित निस्तारण की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया जा रहा है.

यादव ने बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन के नियमों के अनुपालन, कचरे के पृथक्करण और संबंधित संस्थानों की जवाबदेही को लेकर काम किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली-NCR के अंतर्गत आने वाले छोटे शहरी निकायों को भी प्रदूषण नियंत्रण की योजना में शामिल किया गया है, इस सिलसिले में विभिन्न नगरपालिकाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की गई हैं.

दिल्ली-NCR के राज्यों के साथ समन्वय

भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का समाधान केवल दिल्ली सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, क्योंकि प्रदूषण के स्रोत और उसका प्रभाव पूरे NCR में फैले हुए हैं.

उन्होंने बताया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण और संबंधित कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई है.

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उनके मुताबिक, दिल्ली-NCR में प्रदूषण से निपटने के लिए राज्यों, नगर निकायों और संबंधित विभागों के बीच तालमेल जरूरी है. यदि एक क्षेत्र में कार्रवाई होती है और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण नहीं होता, तो समस्या बनी रह सकती है.

स्टार्टअप और नए विचारों से समाधान तलाशने की कोशिश

भूपेंद्र यादव ने बताया कि सरकार प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए नए तकनीकी विचारों और नवाचारों को भी प्रोत्साहित कर रही है. उन्होंने कहा कि स्टार्टअप से जुड़े लोगों को मंत्रालय में आमंत्रित कर प्रदूषण नियंत्रण के लिए उनके सुझाव मांगे गए हैं.

उन्होंने ठोस कचरे के प्रबंधन और निर्माण से निकलने वाले मलबे जैसे क्षेत्रों में नीतिगत कमियों को दूर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. यादव के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है. उन नियमों को जमीन पर लागू करना, उनकी निगरानी करना और उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है.

क्या दिल्ली-NCR को प्रदूषण से राहत मिलेगी?

दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या कई स्रोतों से जुड़ी है। ऐसे में वाहनों, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों, सड़क की धूल और कचरे के प्रबंधन पर एक साथ कार्रवाई करना जरूरी है.

भूपेंद्र यादव ने सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा देते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी, तकनीक, जवाबदेही और क्षेत्रीय समन्वय पर जोर दिया जा रहा है.

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हालांकि, इन उपायों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्हें कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, नियमों का पालन कितना सुनिश्चित होता है और प्रदूषण के स्तर में कितनी कमी दर्ज की जाती है.

 

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