दिल्ली में रेस्टोरेंट, ढाबों और ऑनलाइन फूड डिलीवरी का कारोबार तेजी से फैल रहा है. ग्राहक किसी दुकान पर बैठकर खाना खाएं या Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए ऑर्डर करें, उनकी सबसे बुनियादी अपेक्षा यही होती है कि खाना साफ-सुथरे माहौल में तैयार किया गया हो और खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन किया जा रहा हो. लेकिन क्या फूड बिजनेस का लाइसेंस होना इस बात की गारंटी है कि किचन में भी सभी जरूरी मानकों का पालन हो रहा है.
इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमारी टीम ने दिल्ली के कई फूड जॉइंट्स पर अंडरकवर पड़ताल की. इस दौरान किचन की सफाई, खाने-पीने की चीजों को रखने के तरीके, कर्मचारियों की मेडिकल जांच, हेडकवर के इस्तेमाल, कीटों से बचाव और जांच की व्यवस्था से जुड़े सवाल किए गए. कैमरे में रिकॉर्ड हुए दृश्य और बातचीत से खाद्य सुरक्षा नियमों की निगरानी और लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर कई सवाल उठते हैं.
कहीं फर्श पर खाना, कहीं छत से गिरता मलबा
हमारी पड़ताल के दौरान कुछ जगहों पर बर्तन और खाद्य सामग्री फर्श पर रखे दिखाई दिए. एक किचन में कर्मचारी जमीन पर बैठकर खाना तैयार करता नजर आया. एक अन्य फूड जॉइंट में दीवारों पर सीलन और छत से मलबा गिरने जैसे दृश्य रिकॉर्ड किए गए. कुछ जगहों पर खाना तैयार करने वाले कर्मचारियों के सिर पर हेडकवर भी नजर नहीं आया.
पड़ताल के दौरान एक फूड जॉइंट के आसपास खुले नाले की सफाई भी रिकॉर्ड की गई. यह गतिविधि उस जगह के नजदीक हो रही थी जहां खाना तैयार किया जा रहा था. ऐसे माहौल में खाद्य सामग्री को धूल, गंदगी और संभावित दूषण से बचाने की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं.
हालांकि, किसी जगह पर गंदगी दिखाई देना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि वहां तैयार भोजन दूषित था या किसी ग्राहक को बीमारी हुई. इसके लिए खाद्य नमूनों की जांच और अन्य साक्ष्य जरूरी होंगे. लेकिन रिकॉर्ड किए गए दृश्य यह सवाल जरूर उठाते हैं कि संबंधित प्रतिष्ठानों में स्वच्छता के मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है.
पहाड़गंज के अराकाशन रोड स्थित पंजाबी ढाबे में हमारी टीम ने मैनेजर सचिन से बातचीत की. बातचीत के दौरान कर्मचारियों के सिर पर हेडकवर पहनने और निरीक्षण के समय नियमों का पालन किए जाने को लेकर सवाल किया गया.
रिकॉर्डेड बातचीत में मैनेजर ने कहा कि निरीक्षण के दिन कर्मचारियों को हेडकवर पहना दिया जाता है. उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि अधिकारियों के बीच पैसे का लेन-देन होता है और निरीक्षण के दौरान खर्च का इंतजाम करना पड़ता है.
जब कर्मचारियों की मेडिकल जांच को लेकर सवाल किया गया, तो बातचीत में भुगतान और अधिकारियों के खर्च से जुड़ी बातें सामने आईं. इन बयानों से यह सवाल उठता है कि क्या खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन नियमित रूप से किया जाता है या केवल निरीक्षण के समय व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाई जाती हैं.
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मैनेजर की बातचीत में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है. केवल किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर किसी अधिकारी या विभाग को भ्रष्ट घोषित नहीं किया जा सकता.
रॉयल फ्लेवर्स के पास खुले नाले की सफाई
इसी पड़ताल के दौरान रॉयल फ्लेवर्स के आसपास के दृश्य भी रिकॉर्ड किए गए. कैमरे में खाद्य प्रतिष्ठान के नजदीक खुले नाले की सफाई होती दिखाई दी. भोजन तैयार करने वाली जगहों के आसपास साफ-सफाई और गंदे पानी के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था खाद्य सुरक्षा के लिहाज से अहम है.
यहां सवाल केवल दुकान के पास गंदगी होने का नहीं, बल्कि इस बात का है कि खाद्य सामग्री को बाहरी गंदगी और संभावित दूषण से बचाने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं. संबंधित प्रतिष्ठान की वास्तविक अनुपालन स्थिति तय करने के लिए निरीक्षण रिकॉर्ड और विभागीय जवाब भी जरूरी हैं.
नितिन जैन