कांग्रेस की दिल्ली रैली से कारोबारियों को 10 हजार करोड़ के नुकसान का डर, सोनिया गांधी को CTI ने लिखा पत्र

दिल्ली में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री CTI ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी जी को पत्र लिखा है. इस पत्र में मांग की गई है कि रैली को दिवाली बाद किया जाए जिससे कारोबारियों को परेशानी कोई दिक्कत नहीं होगी.

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कांग्रेस की महारैली को लेकर सीटीआई के अध्यक्ष ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है. (Photo- Agency) कांग्रेस की महारैली को लेकर सीटीआई के अध्यक्ष ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है. (Photo- Agency)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:55 AM IST

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर राजधानी के कारोबारियों ने एक बार फिर चिंता जताई है. व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख दिवाली के बाद रखने की मांग की है. 

संगठन का कहना है कि महारैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है. ऐसे में मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाजारों में ट्रैफिक बाधित हो सकता है और कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है. CTI के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास करीब 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार हैं, जहां रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है.

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संगठन को आशंका है कि रैली के दौरान भारी संख्या में बसों, कारों और अन्य वाहनों की आवाजाही से बाजारों तक माल पहुंचाने और वहां से माल बाहर भेजने में परेशानी होगी. इसका असर त्योहारों के सबसे अहम कारोबारी सीजन पर पड़ सकता है. CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि संगठन कांग्रेस की रैली का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि कारोबारियों की आजीविका और त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए तारीख बदलने की अपील कर रहा है.

उन्होंने कहा कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है. ऐसे में 1 नवंबर कारोबारियों के लिए खरीदारी और माल की आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण दिन है.

पार्किंग और जाम को लेकर चिंता

CTI ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि रामलीला मैदान में करीब 200 बड़ी बसों की पार्किंग की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. संगठन का अनुमान है कि 10 लाख लोगों को लाने के लिए 15 से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है. इतनी बड़ी संख्या में वाहन मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली की सड़कों पर दबाव बढ़ा सकते हैं.

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संगठन के मुताबिक, जेएलएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक रोड जैसे प्रमुख रास्तों पर वाहनों की भीड़ बढ़ने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इससे आसपास के बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है और कारोबारियों के साथ आम लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है.

20 बाजारों के कारोबार पर पड़ सकता है असर

CTI ने अपने पत्र में रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित कई प्रमुख बाजारों का जिक्र किया है. इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं.

संगठन का दावा है कि इन बाजारों में रोजाना दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं. वहीं, करीब तीन हजार ट्रक यहां से एनसीआर के शहरों और देश के दूसरे हिस्सों में सामान लेकर जाते हैं. कारोबारियों को आशंका है कि रैली के चलते परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने पर त्योहारों के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति भी बाधित हो सकती है.

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CTI का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रहेगा. संगठन के मुताबिक, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है. शाम से मध्य दिल्ली के कुछ प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की आशंका भी जताई गई है. संगठन का दावा है कि कुछ ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही दिल्ली में गाड़ियां भेजने को लेकर असमंजस में हैं.

व्यापारियों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक कार्यक्रम का उदाहरण भी दिया है. CTI के मुताबिक, उस दिन करीब पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में लगभग आठ घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही थी. ऐसे में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित रैली के दौरान यातायात पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर संगठन ने चिंता जताई है.

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CTI ने रखीं दो मांगें

सोनिया गांधी को लिखे पत्र में CTI ने दो विकल्प सुझाए हैं. पहली मांग है कि 1 नवंबर की रैली को दिवाली के बाद यानी 10-11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित न हो. दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली तय तारीख पर ही आयोजित करनी है तो इसका स्थान रामलीला मैदान से बदलकर बुराड़ी मैदान कर दिया जाए. CTI का दावा है कि वहां करीब 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है.

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बृजेश गोयल ने कहा कि ये बाजार केवल व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था की अहम कड़ी हैं. उन्होंने दावा किया कि संगठन पहले राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने का अनुरोध कर चुका है, लेकिन अब उसे सोनिया गांधी से उम्मीद है कि वह कारोबारियों की परेशानी को समझेंगी.

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