अपना एजेंडा, अपना पोस्टर... नीतीश के महाजुटान से पहले पटना में सियासत चमकाने में जुटीं पार्टियां

पटना में 23 जून को विपक्षी एकजुटता बैठक है. बैठक सुबह 11 बजे से शुरू होगी, जो शाम चार बजे तक चलेगी. इस दौरान 2024 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोकने और बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने की रणनीति पर चर्चा होगी. इस बीच कुछ विपक्षी दलों ने खुद को बैठक का केंद्र बताते हुए अपने-अपने दावे करने शुरू कर दिए हैं. पहले यह बैठक तीन बार टल चुकी है.

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पटना में 23 जून को आयोजित होगी विपक्षी दलों की बैठक (फाइल फोटो) पटना में 23 जून को आयोजित होगी विपक्षी दलों की बैठक (फाइल फोटो)

पंकज जैन / दीपक कुमार

  • पटना/नई दिल्ली,
  • 20 जून 2023,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST

लोकसभा चुनाव में बीजेपी और नरेंद्र मोदी सत्ता से बेदखल करने के लिए बिहार में सीएम नीतीश कुमार विपक्षी पार्टियों की एकजुटता बैठक करने जा रहे हैं. 23 जून को यह बैठक में पटना में होगी, लेकिन बैठक से पहले ही सभी दल इस बैठक के जरिए अपना-अपना एजेंडा साधने में जुट गए हैं. साथ ही अपने अलग-अलग पोस्टर लगाकर खुद को महत्वपूर्ण दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. फिलहाल बिहार में लगाए गए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के पोस्टर और उनके बयानों से यही साबित हो रहा है.

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पटना के इनकम टैक्स चौरहे पर लगे आम आदमी पार्टी ने जो पोस्टर लगाया गया है, उसमें अरविंद केजरीवाल को देश का लाल लिखा गया है. वहीं अध्यादेश के जरिए गठित एनसीसीएसए की पहली बैठक करने के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा कर दिया कि 23 जून को पटना में जो विपक्ष की मीटिंग होने वाली है, उसमें पहला एजेंडा दिल्ली के लिए लाया गया अध्यादेश होगा.

वहीं सपा की तरफ से विपक्षी बैठक का अलग से पोस्टर लगाया गया है. इस पोस्टर में नीतीश और तेजस्वी के अलावा विपक्षी पार्टी के किसी और नेता का फोटो नहीं है. इस स्वागत पोस्टर में लिखा है कि अखिलेश यादव विपक्षी दलों से अपील कर रहे हैं कि- आओ मिल संकल्प करें, देश बीजेपी मुक्त करें. वह बेरोजगारी, दंगाई और महंगाई जैसे मुद्दों के खिलाफ सबको एकजुट करने की अपील कर रहे हैं.

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अध्यादेश पर AAP की कांग्रेस से नहीं हो पाई है बात

केजरीवाल केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ अलग-अलग राजनीतिक दलों से मुलाकात कर रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें कांग्रेस से मुलाकात का समय नहीं मिल पाया है. इस बीच उन्होंने ऐलान कर दिया कि विपक्षी दलों की बैठक में अध्यादेश ही सबसे पहला एजेंडा होगा. 

केजरीवाल से जब पूछा गया कि अध्यादेश को लेकर AAP को कांग्रेस का समर्थन अब तक नहीं मिल पाया है? इस पर केजरीवाल ने जवाब दिया कि विपक्षी दलों की बैठक में सारी पार्टियां कांग्रेस से पूछेंगी कि वह अपना स्टैंड बताएं. उस मीटिंग का सबसे पहला एजेंडा अध्यादेश होगा. मीटिंग में मैं संविधान लेकर जाऊंगा और सारी पार्टियों को समझाऊंगा कि दिल्ली में जनतंत्र को खत्म करने के लिए साजिश रची गई है.

केजरीवाल ने कहा कि यह ना समझे कि दिल्ली आधा राज है, इसलिए दिल्ली के बारे में अध्यादेश आया है. अध्यादेश तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी आ सकता है.

उन्होंने कहा कि केंद्र पूर्ण राज्य के अंदर भी अधिकार खत्म कर सकती है. इसमें बिजली शिक्षा जैसे कई विभाग शामिल है. राज्यसभा में बिल आता है तो उसे जीतने नहीं देंगे. हमें सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ पार्टियों से भी उम्मीद है.
 

 

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सीट शेयरिंग के मुद्दे पर नहीं होगी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक एकजुता बैठक में फिलहाल विपक्षी दलों के बीच सीट शेयरिंग एग्रीमेंट या फिर किसी एक नेता के चुनाव पर चर्चा नहीं होगी बल्कि इस बात को लेकर सहमति बनाई जाएगी कि विपक्ष बीजेपी के हर एक उम्मीदवार के खिलाफ अपना एक साझा उम्मीदवार खड़ा करे ताकि वोटों का बंटवारा ना हो. इस बैठक में सभी विपक्षी दलों के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाने को लेकर भी सहमति बन सकती है. 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर साझा रणनीति बनाने पर चर्चा होगी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होगा कि किस तरीके से 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोका जाए और बीजेपी को सत्ता से बेदखल किया जाए. 

17 राजनीतिक दल बैठक में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निमंत्रण पर पटना में गैर बीजेपी 17 राजनीतिक दलों का महाजुटान होगा. इस बैठक में कांग्रेस की ओर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के ही पूर्व सांसद राहुल गांधी शामिल होंगे. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, नेशनल कांफ्रेन्स नेता फारुक अब्दुल्ला, पीडीपी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती समेत लेफ्ट के कई नेता जैसे सीताराम येचुरी और डी राजा भी इस बैठक में शामिल होंगे.

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पटनायक, केसीआर समेत इन दलों ने बनाई दूरी

बसपा अध्यक्ष मायावती ने पहले से ही नीतीश कुमार की विपक्षी एकता से दूरी बना ली है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने बैठक में आने से मना कर दिया था. ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने नीतीश से मुलाकात के बाद ही अपना स्टैंड साफ कर दिया था कि वो किसी भी विपक्षी एकता में शिरकत नहीं करेंगे. वहीं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी खुद को किसी भी गठबंधन के साथ नहीं खड़े होना चाहते हैं. जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने भी विपक्षी एकता से दूरी बना ली है.

न्योता न मिलने पर मांझी ने छोड़ा नीतीश का साथ

विपक्षी एकता बैठक में शामिल होने का न्योता न मिलने से नाराज बिहार महागठबंधन में फूट पड़ गई है. दरअस बैठक के लिए नीतीश ने HAM को न्योता ही नहीं दिया था, इससे नाराज HAM के एक मात्र मंत्री और जतनराम मांझी के बेटे संतोष कमार सुमन ने नीतीश सरकार से इस्तीफा दे दिया है. अब सोमवार को मांझी ने महागठबंधन से भी नाता खत्म कर दिया है.

100 सीटों पर बीजेपी को हराने का फॉर्मूला

नीतीश कुमार बार-बार इस बात को दोहरा रहे हैं कि उन्हें बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना है. इसके लिए उन्हें सिर्फ 100 सीटों पर बीजेपी को हराना है. इसके लिए जरूरी है कि ऐसे राज्य जहां क्षेत्रीय पार्टी की सरकार है, वहां महागठबंधन बनाया जाए और बीजेपी के खिलाफ बस एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए. इसमें मुख्य रूप से यूपी की 80, बिहार की 40, बंगाल की 42, महाराष्ट्र की 48, दिल्ली 7, पंजाब की 13 और झारखंड की 14 लोकसभा सीटें शामिल हैं.

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बैठक फोटो सेशन से ज्यादा कुछ नहीं: आजाद

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी (DPAP) अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने विपक्षी एकता बैठक पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता से कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है. यह फोटो खिंचवाने के अवसर से ज्यादा और कुछ नहीं है. उनका कहना है, "विपक्षी एकता से तभी फायदा होगा, जब दोनों पक्षों के लिए कुछ होगा. दोनों के लिए लाभ के हिस्से में अंतर हो सकता है. यह 50-50 या 60-40 हो सकता है, लेकिन इस मामले में दोनों पक्षों के पास देने के लिए कुछ भी नहीं है." इस बैठक के लिए नीतीश ने गुलाम नबी आजाद को नहीं बुलाया है.

तीसरी बार विपक्षी एकता की बैठक टली 

विपक्षी एकता की होने वाली बैठक तीसरी बार टल चुकी है. पहली बैठक 19 मई को होनी थी, लेकिन कर्नाटक विधानसभा चुनाव और वहां पर कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के चलते विपक्षी दलों की बैठक टाल दी गई. इसके बाद मई के आखिरी सप्ताह में बैठक होनी थी, लेकिन वो भी नहीं हो पाई. नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ मुलाकात के बाद 12 जून को पटना में बैठक की रूप रेखा बनी थी. 12 तारीख को लेकर सभी विपक्षी दलों ने सहमति भी जता दी थी, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एमके स्टालिन उस तारीख को पटना आने में असमर्थ थे. कांग्रेस ने राहुल के बदले किसी राष्ट्रीय महासचिव शामिल होने का अग्रह किया गया था, जिसको नीतीश ने स्वीकार नहीं किया था और बैठक को स्थागित कर अब 23 जून को कर दिया गया.

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ममता ने महाजुटान का दिया था आइडिया

सीएम ममता बनर्जी ने अप्रैल में कोलकाता में नीतीश कुमार पटना में विपक्षी नेताओं की बैठक आयोजित करने का विचार दिया था. विपक्षी एकता की मुहिम को लेकर नीतीश ने न केवल उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसे कांग्रेस के सहयोगियों के साथ मुलाकात की बल्कि तेलंगाना के सीएम केसीआर, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक से भी मुलाकात की थी.


 

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