क्या कोरोना की तरह फैल सकता है स्वाइन फ्लू, डॉक्टरों ने बताया इस बार कितना खतरा

भारत में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है और मौजूदा वैक्सीन इसके खिलाफ असरदार है. केंद्र और राज्य सरकारें अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार कर रही हैं और निगरानी बढ़ा रही हैं. लेकिन क्या स्वाइन फ्लू भी कोरोना की तरह फैल सकता है. इस बारे में एक्सपर्ट ने बताया है.

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कोरोना और स्वाइन फ्लू में अंतर कोरोना और स्वाइन फ्लू में अंतर

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST

कर्नाटक और दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं. कर्नाटक में 4 हजार से अधिक तो दिल्ली में 1700 से ज्यादा केस दर्ज किए जा चुके हैं. कई सालों बाद स्वाइन फ्लू के इतने अधिक केस आए हैं. इसके बढ़ते मामलों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि क्या इसके केस भी कोविड की तरह बढ़ सकते हैं, क्या एच1एन1 भी कोरोना जैसा खतरनाक होगा? 

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इस बारे में सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने बताया है. वह कहते हैं कि स्वाइन फ्लू और कोरोना दोनों वायरस से होने वाली बीमारियां हैं. दोनों मुख्य रूप से हमारे सांस लेने वाले अंगों यानी नाक,गले और लंग्स को प्रभावित कर सकती है, दोनों में बुखार,खांसी,कमजोरी और शरीर में दर्द हो सकता है. कुछ मरीजों में बीमारी ज्यादा बढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है. हालांकि इन दोनों वायरस में मृत्युदर 1 प्रतिशत से भी कम है. फिलहाल ऐसी भी कोई बात सामने नहीं आई है कि स्वाइन फ्लू बहुत खतरनाक है.

यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विनय भट्ट कहते हैं कि H1N1 के मामले बढ़ने के बाद लोगों के मन में यह सवाल आना लाजिमी है कि कहीं यह भी कोरोना की तरह पूरे देश में तो नहीं फैल रहा है.  फिलहाल दोनों की तुलना करना सही नहीं होगा. H1N1 नया वायरस नहीं है. यह इन्फ्लुएंजा वायरस है और इसके मामले समय-समय पर बढ़ते रहे हैं. मामलों में बढ़ोतरी को सीधे कोरोना जैसी स्थिति मान लेना ठीक नहीं है.

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यह भी पढ़ें: कर्नाटक में स्वाइन फ्लू के बढ़े केस, इस साल 4000 से अधिक मामले

कोरोना जैसा खतरनाक नहीं होगा स्वाइन फ्लू

डॉ. विनय भट्ट कहते हैं कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. इससे कोरोना जैसा कोई खतरा नहीं होगा. लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए. ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर तेज बुखार और शरीर दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाए तो डॉक्टर से जल्दी सलाह लेना सबसे जरूरी है.

यह भी पढ़ें: 'देश में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं...', स्वाइन फ्लू मामलों में बढ़ोतरी पर ICMR की सफाई

सरकार की क्या है तैयारियां

स्वाइन फ्लू (H1N1) के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और डिजास्टर वार्ड तैयार करने, जरूरी दवाइयां व बेड आरक्षित रखने तथा एम्स व एनसीडीसी जैसी रेफरल लैब के जरिए निगरानी बढ़ाने के पुख्ता निर्देश दिए हैं. एम्स (AIIMS) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) सहित प्रमुख प्रयोगशालाओं को सैंपलों की जांच के लिए तैनात किया गया है. लोगों को सलाह दी गई है कि अगर उनको फ्लू के लक्षण दिख रहे हैं तो इसकी जाचं कराएं. जिन राज्यों में केस बढ़े हैं उनके स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट रहने को कहा गया है और वायरस के इलाज और बचाव से संबंधित सभी तैयारियों को पूरा करने को कहा है. 

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