माता-पिता बनने का सपना पूरा करने के लिए अब पहले से ज्यादा कपल IVF की मदद ले रहे हैं. एवेंडस की रिपोर्ट बताती है कि देश में जून 2024 तक करीब 3.20 लाख आईवीएफ साइकिल हुई थी, लेकिन ये आंकड़ा 2028 तक 5.50 लाख तक जा सकता है, हालांकि आईवीएफ कराने वालों की संख्या बढ़ना खराब सेहत की निशानी है. अलग- अलग अस्पतालों के आईवीएफ सेंटर से ये भी पता चला है कि अब महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी बड़ी संख्या में इनफर्टिलिटी का शिकार हो रहे हैं.
भारत में कितनी तेजी से बढ़ रहा IVF?
दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मेघा मित्तल बताती हैं कि देश में 2023 तक हर साल लगभग 2 से 2.5 लाख IVF साइकिल होती थी, लेकिन 2030 तक यह संख्या सालाना 5 से 6 लाख तक पहुंच सकती है. इलाज के लिए आने वाले कपल्स का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है. आईवीएफ साइकिल भी पहले की तुलना में ज्यादा हो रही हैं.
क्रिस्टा IVF की डॉ. निधि सहरावत ने बताया कि अब IVF के बारे में जानकारी लेने वाले कपल की संख्या काफी बढ़ गई है. 2025-26 में IVF कंसल्टेशन में 33.2% का इजाफा हुआ है. IVF साइकिल भी 2025-26 में 58.6% तक बढ़ी है. मरीजों की संख्या भी 40.1% ज्यादा हो गई है.
महिलाओं में PCOS और पुरुषों में स्पर्म काउंट एक बड़ी समस्या
डॉ निधि ने बताया कि उनके यहां आईवीएफ के लिए आने वाली कुल महिलाओं में करीब 35 फीसदी ऐसी हैं ,जिनको PCOS है और इस वजह से वह आईवीएफ का सहारा ले रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि लगभग आधे मामलों में पुरुषों में भी इनफर्टिलिटी की समस्याएं हैं. उनमें स्पर्म काउंट का कम होना और उसकी क्वालिटी का खराब होना जैसी समस्याएं देखी जा रही है.
डॉ निधि के मुताबिक,स्पर्म काउंट का कम होना ओलिगोस्पर्मिया नाम की बीमारी है. पुरुषों में बीते कुछ सालों में ये समस्या काफी बढ़ी है. डॉ. मेघा ने भी आईवीएफ कराने वाले कपल्स में ये दो हेल्थ प्रॉबल्म ज्यादा देखी हैं. उनका कहना है कि इनफर्टिलिटी केवल महिलाओं में ही नहीं पुरुषों में भी देखी जा रही है. 20 से 30 % पुरुषों में ये देखा जा रहा है. इसके अलावा खराब खानपान, देर से शादी, बढ़ती उम्र , महिलाओं में में परिवार शुरू करने का फैसला इसके बड़े कारण हैं.
देर से परिवार शुरू करना पड़ सकता है भारी
एलांटिस हेल्थकेयर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि IVF की बढ़ती मांग के पीछे लाइफस्टाइल और मेडिकल कारणों की भूमिका है. देर से शादी और ज्यादा उम्र में परिवार शुरू करने का फैसला भी उनमें से एक है. महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ उनके अंडों की संख्या कम हो जाती है. कई महिलाएं PCOS के कारण भी सामान्य तरीके से बच्चा कंसीव नहीं कर पाती हैं. वहीं, पुरुषों में भी उम्र के साथ स्पर्म काउंट कम हो जाता है.
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
अगर 1 साल तक प्रयास करने के बाद भी नॉर्मल तरीके से बच्चा कंसीव नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. सामान्य तौर पर 35 साल से कम उम्र की महिलाओं को एक साल कोशिश के बाद और 35 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को छह महीने कोशिश के बाद जांच कराने की सलाह दी जाती है. अगर पहले से PCOS की बीमारी है और पुरुष को उसकी सेहत ठीक नहीं लग रही है तो भी डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
अभिषेक पांचाल