Drishyam 3 Malayalam Review: बच गए अजय देवगन! मोहनलाल की 'दृश्यम' में नहीं दम, थ्रिल गायब, बस भरी बोरियत

Drishyam 3 Malayalam Review: मोहनलाल की दृश्यम 3 ने निराश किया है. फैंस का मानना है अच्छा ही है अजय ने फिल्म के तीसरे पार्ट के लिए कहानी पूरी तरह बदली है.

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Drishyam 3 malayalam review (Photo: Social Media) Drishyam 3 malayalam review (Photo: Social Media)

हंसा कोरंगा

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:26 PM IST
फिल्म:दृश्यम 3
2/5
  • कलाकार : मोहनलाल, मीणा, अनसिबा हसन, एस्थर अनिल, आशा सरथ
  • निर्देशक :जीतू जोसेफ

अजय देवगन की फिल्म दृश्यम 3 का धांसू ट्रेलर देखकर मन में लड्डू तो फूटे होंगे. दृश्यम फ्रेंचाइजी की फिल्मों का इंतजार जो रहता है. ट्रेलर के साथ क्लियर हो गया कि ये दृश्यम की हिंदी फ्रेंचाइजी की आखिरी फिल्म होगी. इसके बाद विजय सालगांवकर की कहानी को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. दूसरी अच्छी बात ये रही कि अजय की ये फिल्म मोहनलाल की दृश्यम 3 से बिल्कुल अलग है. पूरी कहानी को नए सिरे से लिखा गया है.

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अजय देवगन का स्मार्ट मूव
इसलिए अगर आपने साउथ की दृश्यम 3 देखी है, तो आपको कहीं से कोई स्पॉयलर नहीं मिला है. वैसे अच्छा ही है दृश्यम 3 की कहानी बिल्कुल अलग है, वरना अजय की फिल्म क्रिटिक्स के घेरे में आ सकती थी. क्योंकि सीधी बात, नो बकवास.. मोहनलाल की दृश्यम 3 इस फ्रेंचाइजी की सबसे कमजोर फिल्म है. दृश्यम फैन होने के नाते जब मैंने एक्साइटेड होकर मोहनलाल की मूवी देखी तो सिर पकड़ लिया. क्योंकि इंटरवल तक फिल्म घनघोर बोर करती है. फिर सेकंड पार्ट में ट्विस्ट देने के चक्कर में कहानी ऐसी घुमाई गई है जो आपका सिर चकरा देगी.

मोहनलाल की स्क्रीन प्रेजेंस दमदार है. लेकिन स्क्रीनप्ले वीक है. ये फिल्म देखकर मेकर्स से बस यही पूछने का मन करेगा कि आखिर ये क्यों बनाई? साउथ में इसे मिक्स्ड रिव्यू मिले हैं. मूवी बस फ्रेंचाइजी के ठप्पे और मोहनलाल के फैंडम की बदौलत वर्ल्डवाइड 242 करोड़ के करीब बिजनेस करने में कामयाब रही. लेकिन ये फिल्म लोगों का दिल तोड़ गई. 

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क्या है कहानी?
दृश्यम 2 में पुलिस को चकमा देने के बाद जॉर्जकुट्टी अपने परिवार के साथ नॉर्मल लाइफ जीने की कोशिश कर रहा है. कहानी साढ़े चार साल आगे बढ़ती है. जॉर्जकुट्टी केबल टीवी ऑपरेटर से फिल्म प्रोड्यूसर बन चुका है. उसकी लिखी हुई फिल्म ब्लॉकबस्टर हुई है. वो फैमिली संग ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है. लेकिन कहते हैं ना क्रिमिनल को कभी चैन नहीं आता. उसके अंदर की बेचैनी और पकड़े जाने का डर उसे खोखला कर देता है. जॉर्जकुट्टी का भी यही हाल है.

पत्नी और बेटियों को वो दिखाता है कि सब नॉर्मल है, लेकिन उसका सुकून छिना हुआ है. पुरानी केस फाइल खुलने और परिवार पर खतरा आने का डर उसे चैन की सांस नहीं लेने देता. उसकी बेटी अंजू केस की वजह से मेंटली डिस्टर्ब रहती है. जॉर्जकुट्टी अपने बेटी की शादी करवाना चाहता है. लेकिन अंजू का अतीत उसका घर नहीं बसने दे रहा है. 

दूसरी तरफ, वरुण के माता-पिता यानी गीता और प्रभाकर बेटे के लिए अब न्याय नहीं, उसकी मौत का बदला चाहते हैं. प्रभाकर पूर्व पुलिसकर्मी सहदेवन और नए पुलिस अधिकारी थॉमस बास्टिन संग मिलकर जॉर्जकुट्टी की जिंदगी नर्क बनाने की प्लानिंग करता है. उसने जॉर्जकुट्टी के खिलाफ ऐसा जाल बिछाया कि उसमें अंजू भी फंस गई. कहानी में ऐसे ट्विस्ट आए कि जॉर्जकुट्टी सरेंडर करने को मजबूर हो जाता है. लेकिन उसके ऐसा करने के पीछे की वजह शॉकिंग है.

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इस बार जॉर्जकुट्टी खुद को दांव पर लगाकर अपनी फैमिली को बचाता है. पुलिस और वरुण के पेरेंट्स के साथ शह-मात के इस खेल को खत्म करने के लिए अंत में जॉर्जकुट्टी जो करता है, वो देखकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी. क्लाइमैक्स में आया ट्विस्ट सबसे बड़ा शॉकर है. 

कहां रह गई कमी?
फिल्म में वो सब चीजें मिसिंग हैं जो पहले और सेकंड पार्ट में भरपूर थी. मोहनलाल की दृश्यम 3 में थ्रिल, सस्पेंस और ट्विस्ट्स की कमी है. पहले पार्ट में सरप्राइज फैक्टर ना के बराबर है. सेकंड पार्ट में बस क्लाइमैक्स आपको चौंकाएगा. उससे पहले वहां भी निल बट्टे सन्नाटा है. स्क्रीनप्ले स्लो और फ्लैट है. मेकर्स ने दृश्यम 3 तो बना दी, लेकिन कहानी पर होमवर्क करना भूल गए. फिल्म में ऐसा कोई ट्विस्ट नहीं है जो आपको सोचने को मजबूर करे या दिमाग हिला डाले. तीसरे पार्ट में डायरेक्टर जीतू जोसेफ ने सस्पेंस से ज्यादा इमोशन और ड्रामे को घुसाया. यहीं से सारी गड़बड़ हुई. फिल्म को बस जलेबी की तरह गोल-गोल घुमाया गया है.

मलाल बस इस बात का है कि जॉजकुट्टी इस बार इमोशंस में ज्यादा बहा. वो अपने क्राइम को छिपाने के लिए माइंड गेम नहीं खेल पाया. मानो सालों से परिवार को बचाते हुए अब वो थक चुका है. इस बार उसने दिमाग से नहीं दिल से बाजी चली. कहानी जॉर्जकुट्टी के अपराधबोध पर ज्यादा फोकस करती है, यही खेल खराब हुआ.

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मोहनलाल को सलाम..गजब एक्टिंग
बस देखने लायक अगर कुछ है तो वो मोहनलाल की जानदार एक्टिंग है. उन्हें स्क्रीन पर देखना सुकून देता है. जिस ठहराव और सहजता के साथ उन्होंने इस कॉम्पलेक्स कैरेक्टर को निभाया है, वो काबिलेतारीफ है. उनके कंधों पर ये फिल्म 242 करोड़ कमा पाई, वरना तो ऐसी कमजोर थ्रिलर फिल्म का पिटना तय था. मोहनलाल ने जिस तरह अपने दो इमोशंस, डर और सेलिब्रेशन को पर्दे पर दिखाया है, उनको बिग सैल्यूट.

बाल-बाल बचे अजय!
मोहनलाल की दृश्यम सीरीज के शुरुआती दो पार्ट हिंदी में बिल्कुल सेम बनाए गए हैं. लेकिन तीसरे पार्ट को लेकर कहानी में पेंच फंसा. हिंदी दृश्यम 3 का स्क्रीनप्ले बिल्कुल नया है. इसे अभिषेक पाठक, आमिल कीयान खान और परवेज शेख ने मिलकर लिखा है. अभिषेक ही मूवी के डायरेक्टर भी हैं. अजय की फिल्म का ट्रेलर, इसकी स्टारकास्ट में शामिल नए चेहरे कहानी को फ्रेश वाइब दे रहे हैं. उम्मीद है ये साउथ की दृश्यम 3 को देखकर हुए अफसोस की भरपाई करेगी. अजय की फिल्म 2 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है. अजय ने ट्रेलर लॉन्च इवेंट में कहा कि वो चाहते हैं मोहनलाल और जीतू जोसेफ उनकी बनाई दृश्यम 3 देखें. 

तो देखते हैं दृश्यम 3 वर्सेज दृश्यम 3 में कौन बाजी मारेगा?

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