Drishyam The Conclusion Review: पुलिस का बिछाया जाल-सबूतों से फिर घिरा विजय, सस्पेंस दमदार पर नया कुछ नहीं

अजय देवगन वाली दृश्यम 3 या कहें दृश्यम द कॉन्क्लूजन आज थिएटर्स में रिलीज हो चुकी है. मोहनलाल वाली मलयालम 'दृश्यम' का ये हिंदी रीमेक इस फ्रैंचायजी का आखिरी हिस्सा होने वाला है. विजय सलगांवकर के परिवार पर पिछली बार की तरह, इस बार भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है. क्या अजय की ये वाली दृश्यम भी अपने पिछले पार्ट्स की तरह दमदार साबित हुई है? पढ़िए हमारा रिव्यू...

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दृश्यम 3 फिल्म कैसी है? (Photo: Screengrab) दृश्यम 3 फिल्म कैसी है? (Photo: Screengrab)

पर्व जैन

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:29 AM IST
फिल्म:थ्रिलर
3/5
  • कलाकार : अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन, इशिता दत्ता, जयदीप अहलावत, प्रकाश राज, रजत कपूर
  • निर्देशक :अभिषेक पाठक

इंडियन सिनेमा में 'दृश्यम' एक ऐसी मूवी फ्रैंचायजी रही है, जिसे हर भाषा में दोबारा बनाया गया है. मलयालम से इसकी शुरुआत होकर ये हिंदी की सबसे सफल फिल्म फ्रैंचायजी में बदल गई है. इसके हीरो अजय देवगन हैं, जो विजय सलगांवकर बनकर अपने परिवार को एक शख्स की मौत के केस से बचाता है. 11 साल पहले दृश्यम का पहला पार्ट आया था, और अब 2 अक्टूबर को इसका तीसरा और हिंदी में आखिरी पार्ट रिलीज हुआ है. 

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पिछले 11 सालों में दृश्यम के जरिए हमने देखा कि कैसे विजय और उसके परिवार के पीछे मीरा और महेश देशमुख हाथ धोकर पीछे पड़े हैं. उन्हें अपने मृत बेटे सैम की मौत का सलगांवकर परिवार से बदला लेना है. इसके लिए वो कई पैंतरे आजमाते हैं. मगर एक चौथी फेल विजय उन सभी लोगों से दो कदम आगे निकलता है. दृश्यम सीरीज की खासियत यही है, और अब क्या इसके तीसरे पार्ट में भी वही क्वालिटी नजर आई? आइए, विस्तार से बात करते हैं.

अब विजय के परिवार पर आया कौन-सा खतरा?

विजय सलगांवकर (अजय देवगन) एक बार फिर अपने परिवार के साथ हंसी-खुशी भरा जीवन बिताना चाह रहा है. मगर इस बार मीरा (तब्बू) का पति महेश (रजत कपूर) विजय को कोर्ट में लाकर उससे अपने बेटे की मौत का बदला लेना चाहता है. वो चाहता है कि पूरा परिवार जेल में सड़े ताकि उन्हें सुकून मिले. इसके लिए वो क्राइम ब्रांच से एसपी राजवीर सिंह तोमर (जयदीप अहलावत) को बुलाते हैं. वो इस केस की तफतीश में जुट जाता है, और फिर विजय के परिवार को कोर्ट में घंसीटता है. इसमें उनका साथ देश का सबसे कामयाब वकील इंद्रजीत शेट्टी (प्रकाश राज) भी देता है. 

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क्योंकि इस बार पुलिस को विजय के खिलाफ एक नहीं, बल्कि दो ठोस सबूत मिले हैं. सबसे पहला सबूत उन्हें चर्च के बाहर डेडबॉडी दफन करने वाले शख्स सेवियो और फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के गार्ड का पता चला है, जिन्होंने विजय को सैम के कंकाल की अदला-बदली में मदद की थी. इतने ठोस सबूत के साथ क्या इस बार विजय सलगांवकर और उसकी फैमिली बच सकेगी? या अब उसका खेल पूरी तरह खत्म होगा? यही सबकुछ आपको फिल्म देखकर पता चलने वाला है.

मोहनलाल वाली दृश्यम से कितनी बेहतर या खराब?

जिन्होंने भी इस बार मोहनलाल वाली मलयालम दृश्यम 3 देखी है, उन सभी का ये मानना रहा कि वो इस दृश्यम फ्रैंचायजी की सबसे कमजोर फिल्म में से एक है. इस पार्ट में जॉर्जकुट्टी की कहानी फैमिली ड्रामा ज्यादा और सस्पेंस-थ्रिलर कम लग रही थी. साथ ही फिल्म में सीट से बांधे रखने वाला कोई खास हुक नहीं था. मगर अजय देवगन वाली दृश्यम 3 की कहानी मलयालम वाली से एकदम अलग है. ये किसी भी तरीके से रीमेक नहीं है, और वो फिल्म देखकर भी साफ पता चलता है. 

डायरेक्टर अभिषेक पाठक ने अपनी राइटर्स की टीम के साथ बैठकर इस फिल्म पर बड़ी मेहनत की है. 'दृश्यम' का मजा इसका अनप्रेडिक्टेबल प्लॉट और ट्विस्ट होते हैं, जो दूसरा पार्ट के बाद इस वाले पार्ट में भी कायम रहता है. फिल्म दृश्यम 3 का फर्स्ट हाल्फ स्टोरी को बिल्डअप देता है, तो दूसरा हाल्फ इसे बढ़िया तरीके से कॉन्क्लूड करता है. कुछ ट्विस्ट इस फिल्म में अच्छे और अनप्रेडिक्टेबल थे, आप सोच भी ना सकें कुछ ऐसी चीज इसमें डाली गई हैं. 

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ये एक मसाला फिल्म नहीं है, मगर तब भी डायरेक्टर ने इसमें कुछ ऐसे मोमेंट्स डाले हैं जो इसको एक लेवल ऊपर ले जाते हैं. हालांकि इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी ये भी है कि आपको इसमें कुछ नया या अनोखा देखने नहीं मिलता है. ऐसा लगता है कि मानो आप दृश्यम 2 ही देख रहे हैं, बस उसको एक नया आकार देकर आपके सामने पेश किया गया है. वैसे तो दृश्यम की कहानी पहले या दूसरे पार्ट में ही खत्म हो गई थी. साथ ही इस पार्ट में कुछ हिस्से ऐसे थे, जिसे देखकर लगा कि इसे यूं ही खींचा जा रहा है. सीधे शब्दों में कहा जाए तो स्टेट वर्सेज फैमिली की ये लड़ाई देखने में अच्छी है, मगर एक अच्छे नोट पर खत्म की जा सकती थी. 
 
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर:

किसने किया इंप्रेस, कौन कर गया बोर?

अजय देवगन फिल्म के हीरो विजय सलगांवकर हैं, और सच कहा जाए तो उन्होंने वैसा काम किया भी है. एक्टर की परफॉरमेंस भले ही उनकी पिछली कुछ फिल्मों जैसी लगे, मगर अजय ने अपना असर छोड़ने वाला काम किया है. उनका साथ इशिता दत्ता, श्रिया सरन और मृणाल जाधव ने भी अच्छे से दिया. इस फिल्म में श्रिया सरन के पास भी कुछ करने के लिए था, जिसे उन्होंने सही ढंग से किया. वहीं जयदीप अहलावत और प्रकाश राज, जिनकी इस फ्रैंचायजी में नई एंट्री हुई उन्होंने सबसे ज्यादा इंप्रेस किया, खासतौर पर प्रकाश राज. 

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प्रकाश राज ने वकील इंद्रजीत शेट्टी का रोल निभाया था, जो भले ही फिल्म में कुछ समय के लिए था. मगर ये एक दमदार रोल था. उनकी परफॉर्मेंस काफी अच्छी थी, और देखने में भी मजेदार साबित हुई. वहीं जयदीप अहलावत, जिन्हें इस फिल्म में शूटिंग से कुछ समय पहले ही कास्ट किया गया था उन्होंने भी अपना काम सही से किया. वो पार्ट 2 के बाद अक्षय खन्ना को रिप्लेस नहीं कर रहे थे, बस उनकी कमी को भरने की कोशिश करते नजर आए. मगर अक्षय की मास्टरक्लास एक्टिंग की कमी इस फिल्म में खलती दिखाई दी. ऐसा लगा कि अगर वो इसमें होते, तो माहौल और बढ़िया जमता. 

अंत में बात अगर तब्बू की करें, तो दृश्यम सीरीज में उनका मकसद सिर्फ अपने किरदार के बेटे को न्याय दिलाने का रह गया है. पिछले पार्ट की तरह, इसमें भी उनके पास कुछ खास या अलग करने के लिए नहीं था. तब्बू के किरदार पर लगता है कि बाकियों के मुकाबले ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है. इसलिए वो निराश भी करती हैं. कुल मिलाकर अगर देखें, तो दृश्यम 3 या दृश्यम द कॉन्क्लूजन इस फ्रैंचायजी से आई एक और अच्छी लेकिन दमदार सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म साबित हुई है. गांधी जयंती के मौके पर आप इसे पूरे परिवार के साथ आराम से देखने जा सकते हैं. अजय की फिल्म को एडवांस बुकिंग से ही बढ़िया रिस्पॉन्स मिल रहा है, देखना है कि इसका ओपनिंग डे कलेक्शन कितना होगा.

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