नितेश तिवारी की आने वाली मचअवेटेड फिल्म 'रामायण' का नया गाना 'रावण तांडव' (Ravana Tandav) रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. इस गाने में एक्टर यश रावण के खूंखार और दमदार अवतार में नजर आ रहे हैं, जो त्रिशूल और डमरू के साथ शिव तांडव करते हुए फैंस का दिल जीत रहे हैं.
हालांकि गाने के विजुअल्स में पौराणिक कथाओं में खास अहमियत रखने वाली 'चंद्रहास' तलवार की झलक भी दिखाई गई है, जिसके बाद से दर्शकों के बीच इसे लेकर एक्साइटमेंट और ज्यादा बढ़ गई है. आखिर रावण को यह दिव्य तलवार कैसे मिली और इसके पीछे की पौराणिक कहानी क्या है.
उत्तर कांड में मिलता है प्रसंग का जिक्र
रामायण के 'उत्तर कांड' में इस बात का विस्तार से वर्णन मिलता है कि कैसे लंका का राक्षस राजा रावण, जो अपनी अपार शक्ति और असीम अहंकार के लिए जाना जाता था, भगवान शिव के आगे नतमस्तक हुआ था. अपनी जीत के घमंड में चूर रावण ने एक ऐसा कदम उठाया था, जिसने उसे शिव के प्रकोप का सामना करने पर मजबूर कर दिया था, और यहीं से भगवान शिव और रावण की भक्ति का यह अनूठा अध्याय शुरू हुआ था.
कैलाश पर्वत पर हुआ था अहंकार का सामना
जब रावण एक छीने हुए रथ पर सवार होकर लंका वापस लौट रहा था, तब रास्ते में विशाल कैलाश पर्वत ने उसका मार्ग रोक दिया. पर्वत की अलौकिक सुंदरता देखकर रावण रथ से नीचे उतरा और उसकी भेंट नंदी से हुई, जो भगवान शिव के बैल के मुख वाले रक्षक हैं. नंदी ने रावण को आगाह करते हुए बताया कि यह कैलाश पर्वत भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान है, इसलिए यहां किसी को भी शांति भंग करने की अनुमति नहीं है.
अपनी हालिया जीत के नशे में चूर और पूरी तरह अहंकारी हो चुके रावण ने नंदी की इस चेतावनी को सिरे से खारिज कर दिया और आगे बढ़ने की जिद पकड़ ली. तब नंदी ने उसे श्राप दिया कि आने वाले समय में एक साधारण वानर ही उसका सर्वनाश और पराजय तय करेंगे. इस बात से आग बबूला होकर रावण ने अपनी ताकत का घमंड दिखाने के लिए सीधे कैलाश पर्वत को ही अपने हाथों से उठाने की ठान ली. उसने अपनी दसों दिशाओं और बीसों भुजाओं की ताकत लगाकर पर्वत को ऊपर की ओर खिसकाना शुरू कर दिया, जिससे भगवान शिव और माता पार्वती के नीचे की धरती बुरी तरह कांपने लगी.
भगवान शिव का फूटा भयंकर गुस्सा
इस अचानक आए भूचाल और उथल-पुथल से भयभीत होकर माता पार्वती घबराकर भगवान शिव से लिपट गईं. इस हरकत से भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे. उस अहंकारी राक्षस राजा को सबक सिखाने के लिए, शिवजी ने सिर्फ अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत को थोड़ा सा दबा दिया. पर्वत के उस मामूली से दबाव से रावण का पूरा शरीर और उसकी भुजाएं उसके ही उठाए गए भारी पहाड़ के नीचे बुरी तरह दब गईं. रावण दर्द से बुरी तरह चीखने-चिल्लाने और कराहने लगा तथा तुरंत माफी मांगने लगा, लेकिन शिवजी पर उसका कोई असर नहीं हुआ.
मंत्रियों की सलाह पर शुरू की शिव स्तुति
जब रावण के मंत्रियों को उनके राजा की इस दयनीय और विकट स्थिति का पता चला, तो वे आनन-फानन में उसे बचाने के लिए कैलाश पर्वत जा पहुंचे. लाख कोशिशों और तमाम प्रयासों के बाद भी वे रावण को उस भारी बोझ से मुक्त नहीं करा सके. हार मानकर उन्होंने रावण को भगवान शिव की शरण में जाने और उनकी प्रार्थना करने की सलाह दी. मंत्रियों की बात मानकर रावण ने घोर कष्ट सहने के बावजूद अपनी सुरीली आवाज में भगवान की स्तुति में भजन गाना शुरू कर दिया और उसकी भक्ति में कोई कमी नहीं आई.
इस तरह हुई 'शिव तांडव स्तोत्र' की उत्पत्ति
सालों-साल रावण उस कैलाश पर्वत के नीचे दबा रहा और इस दौरान उसने जो महाकाव्य भजन गाए, वे आगे चलकर 'शिव तांडव स्तोत्र' के नाम से अमर हो गए. रावण के उस अटूट दृढ़ संकल्प और सच्ची भक्ति से भोलेनाथ बेहद प्रसन्न हुए. भगवान शिव ने न केवल उसे क्षमा किया, बल्कि उसे 'चंद्रहास' नाम की वह दिव्य और अविनाशी तलवार भी भेंट की, जिसका आकार अर्धचंद्र (दूध के चांद) जैसा था. यह अस्त्र इस बात का सबसे बड़ा प्रतीक था कि कैसे एक क्रूर और अहंकारी शासक बदलकर शिव का परम भक्त बन गया था.
रामायण के कॉमिक बुक में जिक्र
वहीं दिल्ली के भारत मंडपम में एक भव्य प्रमोशनल इवेंट के दौरान मेकर्स ने एक कॉमिक बुक पेश की थी. जिसमें नितेश तिवारी की महाकाव्य 'रामायण' के सभी मुख्य कलाकारों का पहला लुक दिखाया गया है. इसमें रावण को भगवान शिव से प्राप्त 'चंद्रहास' का जिक्र भी था.
कॉमिक में इसका रावण को प्राप्त 'चंद्रहास' का जिक्र करते हुए लिखा गया था, 'शिव के माथे के बीच में एक तीसरी आंख दधकती (चमकती) है, जो विनाश का प्रतीक तो है ही, साथ ही जागरण (जागृति) का भी प्रतीक है. सर्वशक्तिमान होने के बावजूद, भगवान शिव निष्पाप (छल-रहित) हैं. वे आसानी से वरदान दे देते हैं क्योंकि वे लोगों की अच्छाई में विश्वास रखते हैं. उनके सबसे बड़े भक्तों में से एक लंका का राजा रावण था. भगवान शिव ने उसे 'चंद्रहास' दी थी, जो एक अविनाशी तलवार है और जिसका आकार अर्धचंद्र (दूध के चांद) जैसा है. इसने रावण को अजय (अजेय) बना दिया.'
हालांकि अब ये देखना दिलचस्प होगा कि नितेश तिवारी इस उत्तर कांड की घटना को फिल्म के जरिए किस तरीके से पेश करते हैं क्योंकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर यूजर्स जमकर कमेंट कर हैं. एक यूजर ने लिखा, 'भगवान शिव से रावण का चंद्रहास प्राप्त करना, यह सीन सिनेमाघरों में को हिला कर रख देगा.'
शिखर नेगी