पार्टी के विधायक कितने वफादार? यूपी चुनावों से पहले दो चरणों में टेस्ट करेगी SP-BJP और कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अक्टूबर में राज्यसभा और जनवरी में विधान परिषद की 10 सीटों के चुनाव होने वाले हैं. ये चुनाव विधायकों की राजनीतिक वफादारी की परीक्षा साबित होंगे. ये चुनाव राजनीतिक दलों की रणनीतियों और विधायकों के पाला बदलने के फैसलों पर बड़ा असर डालेंगे

Advertisement
यूपी चुनावों से पहले पार्टियों के विधायकों की वफादारी का टेस्ट होगा. (File Photo- PTI) यूपी चुनावों से पहले पार्टियों के विधायकों की वफादारी का टेस्ट होगा. (File Photo- PTI)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. चुनावों से पहले राज्य में दो ऐसे बड़े चुनाव होने वाले हैं, जो ये साफ कर देंगे कि कौन-सा विधायक अपनी पार्टी के साथ पूरी ईमानदारी से खड़ा है और कौन पाला बदलने की फिराक में है.

अक्टूबर में होने वाले राज्यसभा चुनाव और आगामी जनवरी में खाली होने वाली विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों के चुनाव विधायकों की वफादारी की सबसे बड़ी परीक्षा बनने जा रहे हैं. 

Advertisement

इन दोनों ही चुनावों में अतिरिक्त सीटें हासिल करने की जुगत में BJP और समाजवादी पार्टी को विधायकों के अतिरिक्त वोटों की सख्त जरूरत पड़ेगी. ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं के बीच सभी राजनीतिक दलों की नजरें अपने विधायकों की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं.

क्या है विधानसभा का मौजूदा गणित?

फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा में 7 सीटें खाली होने के कारण कुल 396 विधायक ही इस चुनावी प्रक्रिया में वोटर हैं. मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए कम से कम 37 वोटों के कोटे की जरूरत होगी.

अगर सत्ताधारी बीजेपी के खेमे की बात करें, तो पार्टी के पास अपने 255 विधायक हैं. इसके अलावा सहयोगी दलों के 33 विधायक और 3 असंबद्ध सदस्यों का समर्थन भी उनके साथ बताया जा रहा है. जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 विधायकों का समर्थन मिलने से बीजेपी का ये आंकड़ा बढ़कर 293 तक पहुंच जाता है.

Advertisement

इस मजबूत गणित के आधार पर बीजेपी की 7 सीटों पर स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन 8वीं सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा.

दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पास फिलहाल 101 विधायक हैं, जिसके दम पर उसकी दो सीटों पर दावेदारी मजबूत बनती है. हालांकि, तीसरी सीट हासिल करने के लिए सपा को भी बाहर से अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना पड़ेगा. कांग्रेस के 2 विधायकों और दूसरे संभावित सहयोगियों के जरिए सपा अपने आंकड़े को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है.

पहले भी सपा के कुछ विधायकों ने पाला बदलकर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है. ऐसे में इस बार क्रॉस वोटिंग का मुद्दा सबसे बड़ा सियासी फैक्टर बन गया है.

राज्यसभा सीटों की जंग और MLC चुनाव

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर भी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है. विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो बीजेपी और उसके सहयोगी दल आसानी से 7 सीटें जीत सकते हैं, जबकि समाजवादी पार्टी अपने दम पर 2 सीटें झोली में डाल सकती है. असली और दिलचस्प मुकाबला 10वीं राज्यसभा सीट के लिए होगा, जहां दोनों दल अतिरिक्त वोट जुटाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे.

यह भी पढ़ें: 'पुरानी पेंशन होगी बहाल, महिलाओं को देंगे सालाना ₹40 हजार...', यूपी चुनाव से पहले अखिलेश का बड़ा ऐलान

Advertisement

जनवरी महीने में विधान परिषद की खाली होने वाली 10 सीटों में से 9 सीटें वर्तमान में बीजेपी के पास और 1 सीट सपा के पास है. विधानसभा चुनाव 2027 की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले होने वाले ये दोनों चुनाव विधायकों की निष्ठा और राजनीतिक पाला बदलने के समीकरणों को पूरी तरह बेनकाब कर देंगे. 

जिन विधायकों के टिकट कटने की आशंका होगी या जिनकी राजनीतिक निष्ठा डगमगा रही होगी, उनके अगले कदम पर सबकी निगाहें रहेंगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »