उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने 8 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है. इस उम्मीदवार चयन के जरिए बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी रणनीति पूरी तरह साफ कर दी है. बीजेपी ने अपने सभी मौजूदा राज्यसभा सदस्यों के टिकट काट दिए हैं और उनकी जगह पार्टी कैडर से जुड़े नए चेहरों को मौका दिया है.
बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में जातीय समीकरण साफ दिखाई देता है. इसमें दो ब्राह्मण, दो दलित, तीन गैर-यादव ओबीसी और एक ठाकुर चेहरे को मौका मिला है. इसके साथ ही पार्टी ने दो महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा है. इस पूरी कवायद को कैडर के सम्मान, सोशल इंजीनियरिंग (जातीय-क्षेत्रीय संतुलन) और सपा के 'पीडीए' व प्रबुद्ध (ब्राह्मण) कार्ड के काउंटर प्लान के रूप में देखा जा रहा है.
राज्यसभा प्रत्याशियों के चयन को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. इस सूची के जरिए बीजेपी ने एक बार फिर अपने पुराने और सफल 'सोशल इंजीनियरिंग' के फॉर्मूले को धार देने की कोशिश की है. इस तरह बीजेपी एक साथ तीन बड़े मोर्चों को साधती दिख रही है.
1. बीजेपी ने कैडर को दिया सम्मान
बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी भारी-भरकम चेहरे या बाहर से आए नेता के बजाय पार्टी के समर्पित, सांगठनिक और जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह दी गई है. इस तरह चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को साधने का बड़ा दांव चला है.
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बीजेपी की सूची में प्रकाश पाल (क्षेत्रीय अध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड), रामप्रताप सिंह चौहान (प्रदेश महामंत्री) और गोपी कृष्ण पांडेय (पूर्व प्रदेश मंत्री) जैसे नाम यह साबित करते हैं कि पार्टी में जमीनी काम करने वालों को बड़ा पद दिया जा सकता है. मौजूदा राज्यसभा सांसदों को रिपीट न करके पार्टी ने अपने जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को यह कड़ा और सकारात्मक संदेश दिया है कि संगठन से जुड़कर काम करने वाले नेताओं को समय आने पर सियासी अहमियत जरूर दी जाती है.
2. सपा के 'PDA' का काउंटर प्लान
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जिस 'PDA' फॉर्मूले के दम पर 2024 की चुनावी जंग जीती थी और 2027 की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे हैं, बीजेपी ने राज्यसभा टिकटों के बंटवारे से उसी ओबीसी और दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है. बीजेपी ने 8 राज्यसभा प्रत्याशियों में तीन ओबीसी समुदाय के नेताओं को उम्मीदवार बनाया है. ये तीनों ही प्रत्याशी गैर-यादव ओबीसी से हैं, जो 2024 के चुनाव में कुछ हद तक पार्टी से छिटके थे.
बीजेपी ने लोध चेहरे के रूप में धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है. बरेली-आंवला से आने वाले योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री को प्रत्याशी बनाकर रुहेलखंड में लोध वोट बैंक को मजबूती से साधे रखा गया है.
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पार्टी ने कुर्मी समाज से आने वाली श्रुति गंगवार को मौका दिया है. श्रुति झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं. उनके जरिए बीजेपी रुहेलखंड और तराई बेल्ट के सबसे बड़े ओबीसी वोट (कुर्मी) को अपने साथ जोड़े रखने का प्रयास कर रही है.अति-पिछड़ा वर्ग से आने वाले प्रकाश पाल को राज्यसभा भेजकर बीजेपी ने गैर-यादव ओबीसी के बीच अपनी पैठ और मजबूत की है.
यूपी में यादवों के बाद ओबीसी में कुर्मी दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाली जाति है. राज्य में कुर्मी 8 फीसदी, लोधी 4 फीसदी और पाल समाज के करीब 2 फीसदी वोटर हैं. इस तरह बीजेपी ने करीब 14 फीसदी ओबीसी वोट बैंक को सीधे तौर पर साधने का दांव चला है.
3. दलित वोटों को साधने की रणनीति
बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में दलित समुदाय से दो प्रत्याशी उतारे हैं. प्रियंका सिंह रावत पासी समुदाय से आती हैं, जबकि विद्या सागर सोनकर खटिक समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. अवध से लेकर पूर्वांचल बेल्ट में पासी वोट बैंक काफी अहम माना जाता है. 2024 के चुनाव में पासी वोटर बीजेपी से छिटका था, जिसे देखते हुए पूर्व सांसद प्रियंका रावत को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है ताकि इस समुदाय को बड़ा सियासी संदेश दिया जा सके.
वहीं, खटिक समुदाय से आने वाले विद्या सागर सोनकर बीजेपी के निष्ठावान और मजबूत नेता माने जाते हैं. पूर्वांचल के जौनपुर से आने वाले इस वरिष्ठ नेता को उच्च सदन में जगह देकर गैर-जाटव दलितों में पार्टी के प्रति विश्वास गहरा करने की कोशिश की गई है. विशेषकर शहरी इलाकों के खटिक मतदाताओं को जोड़े रखने के लिए उन्हें राज्यसभा भेजा गया है.
उत्तर प्रदेश में करीब 22 फीसदी दलित वोटर हैं, जो जाटव (12 फीसदी) और गैर-जाटव (10 फीसदी) के बीच बंटे हुए हैं. बीजेपी ने गैर-जाटव दलित वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखने का यह दांव चला है. सपा की नजर भी इसी वोट बैंक पर है, जिसे देखते हुए बीजेपी ने अपने कैडर से जुड़े दलित नेताओं को राज्यसभा भेजकर मजबूत सियासी संदेश दिया है.
ब्राह्मण-ठाकुरों को साधे रखने का प्लान
यूपी की राजनीति में लगातार यह नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही थी कि ब्राह्मण समाज बीजेपी से नाराज चल रहा है. सपा और कांग्रेस दोनों ही दल प्रबुद्ध वर्ग को अपने पाले में खींचने की फिराक में हैं. बीजेपी ने दो ब्राह्मण नेताओं को राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर विपक्ष के इस नैरेटिव की हवा निकालने का काम किया है.
बलिया से आने वाले गोपी कृष्ण पांडेय आरएसएस (RSS) पृष्ठभूमि के समर्पित नेता हैं. उन्हें राज्यसभा भेजकर पार्टी ने वैचारिक ब्राह्मण वोट बैंक को यह संदेश दिया है कि संगठन में उनका सम्मान पूरी तरह बरकरार है. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और जाने-माने वकील राधाकांत ओझा को प्रत्याशी बनाकर बीजेपी ने कानूनी और बौद्धिक वर्ग के बीच अपनी पकड़ का मजबूत संदेश दिया है.
यूपी में करीब 10 फीसदी ब्राह्मण वोटर हैं, जो बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माने जाते हैं. विपक्ष द्वारा ब्राह्मण बनाम ठाकुर का नैरेटिव सेट करने की कोशिशों के बीच बीजेपी ने दो ब्राह्मण और एक ठाकुर नेता को राज्यसभा भेजा है. आगरा बेल्ट के क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की स्थानीय व अन्य मुद्दों को लेकर दिख रही नाराजगी को दूर करने के लिए एत्मादपुर के पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया गया है.
क्षेत्रीय संतुलन, आधी आबादी और मिशन 2027
बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के जरिए न केवल जातीय समीकरण साधे हैं, बल्कि बेहतरीन क्षेत्रीय संतुलन भी बनाया है. रुहेलखंड को साधने के लिए बीजेपी ने धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को मौका दिया है तो पूर्वांचल से विद्या सागर सोनकर और गोपी कृष्ण पांडेय को प्रत्याशी बनाया गया है.
अवध बेल्ट से प्रियंका सिंह रावत तो कानपुर-बुंदेलखंड से प्रकाश पाल और प्रयागराज से राधाकांत ओझा को प्रत्याशी बनाया है. पश्चिम यूपी के ब्रज क्षेत्र से रामप्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है. इस तरह बीजेपी ने अलग-अलग क्षेत्र के जातीय समीकरण का खास तवज्जो देते हुए उम्मीदवार का चयन किया है.
बीजेपी ने राज्यसभा की इन 8 सीटों के जरिए केवल दिल्ली का गणित नहीं सुधारा है, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए ऐसा सामाजिक गठबंधन तैयार कर दिया है, जिससे सपा के 'पीडीए' चक्रव्यूह को सीधे चुनौती दी जा सके. इसके अलावा बीजेपी ने राज्यसभा के लिए दो महिला उम्मीदवार घोषित किए हैं. प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है. महिला प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने आधी आबादी को साधने का दांव चला है.
कुबूल अहमद / कुमार अभिषेक