विद्यासागर सोनकर (Vidyasagar Sonkar) उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक प्रमुख दलित नेता हैं. वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं और जौनपुर क्षेत्र से आते हैं. पार्टी संगठन में लंबे समय तक काम करने के कारण उन्हें भाजपा के अनुभवी नेताओं में गिना जाता है. भाजपा ने 5 अक्टूबर 2026 को उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया. राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को होना है.
विद्यासागर सोनकर का जन्म 21 जुलाई 1961 को जौनपुर के सुखीपुर मोहल्ले में हुआ था. उनका राजनीतिक सफर भाजपा के बूथ स्तर के संगठन से शुरू हुआ. वर्ष 1985 में उन्हें बूथ अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद उन्होंने पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम किया.
वर्ष 1989 में विद्यासागर सोनकर सभासद चुने गए. वर्ष 1996 में उन्होंने सैदपुर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव जीता और सांसद बने. हालांकि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के कारण उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा. वर्ष 2000 में उन्हें जौनपुर भाजपा का जिलाध्यक्ष बनाया गया.
सोनकर ने भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली. इसके अलावा वे युवा मोर्चा की प्रदेश इकाई और काशी-गोरखपुर क्षेत्र में संगठन से जुड़े विभिन्न पदों पर रहे. केशव प्रसाद मौर्य और स्वतंत्र देव सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने भाजपा के प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई.
राजनीतिक जीवन में उन्हें 2009 और 2017 के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने पार्टी संगठन में अपनी सक्रियता जारी रखी. वर्ष 2016 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया गया. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं.
विद्यासागर सोनकर खटिक समुदाय से आते हैं. उत्तर प्रदेश के दलित समाज में इस समुदाय की राजनीतिक मौजूदगी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. भाजपा ने संगठन में उनके लंबे अनुभव और दलित समाज से जुड़े राजनीतिक आधार को देखते हुए उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है.
पार्टी की ओर से उन्हें छह यात्राओं का प्रभारी भी बनाया गया था. संगठनात्मक जिम्मेदारियों और पूर्वांचल की राजनीति में उनकी सक्रियता को देखते हुए राज्यसभा क
उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के जरिए 2027 की बिसात बिछाते हुए बीजेपी ने अपने सभी मौजूदा राज्यसभा सांसदों की जगह पर कैडर से जुड़े नए चेहरों पर दांव लगाया है. पार्टी ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ-साथ सपा के 'पीडीए' और ब्राह्मण कार्ड को चित करने का मजबूत मास्टरस्ट्रोक खेला है.
उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपने सभी मौजूदा राज्यसभा सांसदों का पत्ता काट दिया है. 8 नए चेहरों पर दांव लगाया है. पार्टी ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सोशल इंजीनियरिंग की मजबूत जमीन तैयार कर दी है.