मनोज पांडेय और अभय सिंह...बागियों के लिए सपा तैयार कर रही चक्रव्यूह, हिसाब बराबर करने का प्लान

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हुए मनोज पांडेय और अभय सिंह के खिलाफ कद्दावर नेताओं को मैदान में उतारकर 2027 के चुनाव से पहले सियासी घेराबंदी तेज कर दी है. सपा ने बागियों के खिलाफ ऐसा सियासी चक्रव्यूह रच रहे हैं, जिसे तोड़ना आसान नहीं होगा.

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मनोज पांडेय और अभय सिंह के हिसाब बराबर करेंगे अखिलेश यादव (Photo-ITG) मनोज पांडेय और अभय सिंह के हिसाब बराबर करेंगे अखिलेश यादव (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:09 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव उन विधायकों और नेताओं के खिलाफ सियासी चक्रव्यूह रचने में जुट गए हैं, जो सपा को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. अखिलेश यादव इन दलबदलुओं को उनके ही गढ़ में घेरने और 2027 के चुनाव में मात देने के लिए लगातार तानाबाना बुन रहे हैं.

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अखिलेश यादव ने रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट पर मनोज पांडेय और अयोध्या की गोसाईगंज सीट पर अभय सिंह को घेरने के लिए सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है.

विधायक मनोज पांडेय और अभय सिंह ने बीजेपी का दामन थामने के बाद जिस समीकरण के सहारे जीत की उम्मीद लगा रखी है, सपा ने उसी वोटबैंक में सेंधमारी करनी शुरू कर दी है. ऐसे में अखिलेश यादव ने 2027 में पूरा हिसाब बराबर करने का प्लान बना रखा है.

मनोज पांडेय के खिलाफ इंद्रजीत सरोज का दांव

रायबरेली की वीआईपी सीट ऊंचाहार से लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के कद्दावर चेहरे रहे मनोज कुमार पांडेय ने पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया था और फिलहाल वे योगी सरकार में मंत्री हैं. उनके इस कदम से पार्टी को बड़ा झटका लगा था. मनोज पांडेय 2027 में बीजेपी के टिकट पर ऊंचाहार सीट से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रहे हैं.

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मनोज पांडेय के बीजेपी में जाने के बाद उनका यादव और मुस्लिम समीकरण बिगड़ गया है. ऊंचाहार सीट पर ये दो बड़े वोटबैंक हैं, जिनकी भरपाई करने के लिए वे पासी, कुर्मी और ठाकुर वोटबैंक पर नजर गढ़ाए हुए हैं. इस समीकरण के जरिए पांडेय अपनी जीत का तानाबाना बुन रहे हैं, लेकिन अब सपा ने उसी समीकरण को तोड़ने की कवायद शुरू कर दी है.

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अखिलेश यादव ने मनोज पांडेय से निपटने के लिए पार्टी के कद्दावर दलित और पासी समाज के बड़े नेता व विधायक इंद्रजीत सरोज को ऊंचाहार विधानसभा सीट की कमान सौंप दी है. इंद्रजीत सरोज के जरिए सपा ऊंचाहार में लगातार दलित-पिछड़ा समीकरण को मजबूत कर रही है और इस तरह मनोज पांडेय के पारंपरिक वोटबैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है.

मनोज पांडेय का बिगड़ता सियासी समीकरण

रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा के तहत आने वाले डलमऊ क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख शिवराम पासवान और उनके बेटे पंकज पासवान ने पिछले दिनों इंद्रजीत सरोज के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की है, जो मनोज पांडेय के लिए एक बड़ा झटका है. इंद्रजीत सरोज इन दिनों ऊंचाहार और रायबरेली के क्षेत्र में पासी जाति के वोटबैंक को सपा के साथ जोड़ने पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा, कुर्मी समुदाय के नेता मान सिंह पटेल ने भी अखिलेश से मुलाकात की है जो ऊंचाहार क्षेत्र में सक्रिय हैं.

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ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र के एक बड़े ठाकुर नेता भी अखिलेश यादव के संपर्क में हैं जो पहले विधायक रह चुके हैं. अखिलेश यादव उन्हें अपने पाले में लाकर 2027 में चुनावी दांव खेल सकते हैं. ऊंचाहार क्षेत्र में सपा यादव और मुस्लिम के साथ-साथ पासी, कुर्मी, मौर्या और ठाकुर समाज के समीकरण को साधने में जुटी है, जो मनोज पांडेय के लिए सियासी टेंशन का सबब बन सकता है.

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मनोज पांडेय पिछले तीनों चुनाव बहुत ही मामूली वोटों के अंतर से जीते हैं. ऊंचाहार यूपी की उन चुनिंदा सीटों में से एक है जहां पर बीजेपी कभी जीत नहीं सकी है, और इसके पीछे की असल वजह जातीय समीकरण ही रहा है. मनोज पांडेय के लिए यादव और मुस्लिम वोटबैंक की कमी को पूरा करने का जो भरोसा पासी समुदाय पर है, उसे इंद्रजीत सरोज अब किसी भी सूरत में पूरा नहीं होने देने का मन बना चुके हैं.

अभय सिंह के सामने लौटनराम निषाद की घेराबंदी

अयोध्या जिले की चर्चित गोसाईगंज विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक अभय सिंह भी सपा से दूरी बनाकर बीजेपी के करीब आ चुके हैं. अभय सिंह का अपने क्षेत्र में एक अलग सियासी रसूख और प्रभाव माना जाता है. अभय सिंह इसी रसूख के दम पर दो बार विधायक रह चुके हैं और अब सपा से पाला बदलकर बीजेपी के खेमे में चले गए हैं. बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने के लिए वे खुलकर हिंदुत्व का दांव खेल रहे हैं.

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अभय सिंह के प्रभाव को काउंटर करने के लिए सपा ने अनुभवी पिछड़ा वर्ग नेता लौटनराम निषाद को मैदान में उतार रखा है. इसके साथ ही पार्टी स्थानीय स्तर पर और भी मजबूत सामाजिक समीकरणों को साधते हुए अभय सिंह के खिलाफ लगातार राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है, ताकि गोसाईगंज में सपा की पकड़ को फिर से और अधिक मजबूत किया जा सके.

अभय सिंह के समीकरण को बिगाड़ने का प्लान

सपा में रहते हुए अभय सिंह गोसाईगंज सीट पर यादव, मुस्लिम और ठाकुर समीकरण के सहारे जीत दर्ज करते रहे हैं, लेकिन अब बीजेपी का दामन थामने के बाद उनका मुस्लिम-यादव समीकरण पूरी तरह से बिगड़ गया है. अभय सिंह के खिलाफ बीजेपी से ब्राह्मण चेहरा खब्बू तिवारी चुनाव लड़ते रहे हैं, जिसके चलते ठाकुर और ब्राह्मण के वर्चस्व की जंग होती रही है, और बीच में जिस पार्टी का अन्य जातियों का समीकरण सेट हो जाता है, वह सीट निकाल लेता है.

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गोसाईगंज सीट पर जातीय समीकरण देखें तो दलित करीब 75 हजार, ब्राह्मण 65 हजार, यादव 50 हजार, कुर्मी और निषाद 40-40 हजार, वैश्य 30 हजार तथा ठाकुर 25 हजार बताए जाते हैं. इसके अलावा मुस्लिम मतदाता 30 हजार और अन्य में मौर्या, राजभर, चौहान, विश्वकर्मा और प्रजापति जाति के वोट हैं. अभय सिंह बीजेपी का दामन थामने के बाद यादव और मुस्लिम वोटों की कमी को पूरा करने के लिए दलित और निषाद समाज के वोटों पर अपनी नजर गढ़ाए हुए हैं.

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सपा पीडीए के जरिए बागियों से करेगी हिसाब

अभय सिंह की इस रणनीति को समझते हुए सपा ने निषाद समुदाय के फायरब्रांड नेता लौटनराम निषाद को गोसाईगंज सीट पर एक्टिव कर दिया है. लौटनराम निषाद अपने समाज के वोटों के साथ-साथ दलित समुदाय के बीच सपा को मजबूत करने का मोर्चा संभाले हुए हैं. इसके अलावा, कुर्मी चेहरे के तौर पर लालजी वर्मा और पासी चेहरे के तौर पर अवधेश पासी को लगाया गया है. साथ ही, सपा की नजर एक मजबूत ब्राह्मण चेहरे पर भी है जिसे साधने की कमान अखिलेश यादव ने खुद अपने हाथ में ले रखी है, और वे पवन पांडेय के साथ-साथ एक अन्य ब्राह्मण नेता को साधने में लगे हैं.

अखिलेश यादव की इस रणनीति का मुख्य आधार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण है. पार्टी उन नेताओं को विशेष रूप से टारगेट कर रही है जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद या ऐन वक्त पर पार्टी छोड़ी थी. ऐसे में सपा दलबदल करने वाले नेताओं को जनता के बीच उनके ही समाज और मजबूत स्थानीय क्षत्रपों के जरिए सीधी टक्कर देने का पुख्ता प्लान बना चुकी है.

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