यूपी MLC चुनाव: कैसे सपा ने बढ़ा ही है योगी के गढ़ गोरखपुर में बीजेपी की टेंशन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक गढ़ गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी सीट पर बीजेपी के बागियों के सहारे दांव खेलकर समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. इससे पूर्वांचल का सियासी गेम भी रोचक हो गया है.

Advertisement
अखिलेश यादव ने सीएम योगी में शह-मात (Photo:ITG) अखिलेश यादव ने सीएम योगी में शह-मात (Photo:ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर हो रहे विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनावों का 'सेमीफाइनल' माना जा रहा है. इस सियासी रण में सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहक्षेत्र और राजनीतिक गढ़ गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक कोटे की एमएलसी सीट पर देखने को मिल रहा है.

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव बीजेपी की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. इस सीट पर सपा और बीजेपी दोनों ने अपने संगठन की पूरी ताकत झोंक दी है और सांसद-विधायकों को भी मैदान में उतार दिया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद नियमित रूप से इस पर नजर बनाए हुए हैं, तो वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाल लिया है.

Advertisement

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ होने के चलते गोरखपुर में बीजेपी को सीधी चुनौती देने के लिए सपा ने जबरदस्त तरीके से चक्रव्यूह रचा है. सपा ने बीजेपी के ही बागियों के सहारे मुख्यमंत्री के दुर्ग में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है, जिससे सत्तारूढ़ दल की बेचैनी बढ़ गई है.

गोरखपुर सीट पर बीजेपी और सपा की लड़ाई

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक एमएलसी सीट पर बीजेपी के ध्रुव कुमार त्रिपाठी और सपा के संजयन त्रिपाठी के बीच सीधा मुकाबला है. गोरखपुर से लेकर अमेठी तक यह क्षेत्र फैला हुआ है. इस एमएलसी सीट पर 17 जिलों के 54 हजार से अधिक शिक्षक मतदाता हैं, जिनमें सबसे अधिक मतदाता आजमगढ़ (8,592) और दूसरे नंबर पर गोरखपुर (7,289) में हैं.

बीजेपी और उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी मैदान में हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस क्षेत्र में मोर्चा संभाला हुआ है, क्योंकि गोरखपुर उनका अपना राजनीतिक दुर्ग माना जाता है. इसके अलावा बीजेपी ने अपने कई बड़े नेताओं को लगा रखा है, तो सपा ने भी पूर्वांचल के नेताओं को कमान सौंप रखी है.

Advertisement

बीजेपी के बागी नेताओं पर सपा का दांव

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड सीट से बीजेपी के टिकट पर लंबे समय से दावेदारी ठोक रहे वरिष्ठ नेता डॉ. संजयन त्रिपाठी को जब पार्टी ने टिकट नहीं दिया और उनकी जगह ध्रुव कुमार त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया, तो बीजेपी में बगावत के सुर तेज हो गए. संजयन त्रिपाठी ने बीजेपी नेतृत्व पर जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मौके की नजाकत को भांपते हुए बिना देरी किए संजयन त्रिपाठी को अपनी पार्टी में शामिल किया और तुरंत गोरखपुर-फैजाबाद सीट से अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया. संजयन त्रिपाठी की गोरखपुर क्षेत्र के शिक्षकों और युवाओं के बीच लंबे समय से मजबूत पकड़ मानी जाती है. उनके सपा के पाले में जाने से इस सीट पर समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं.

देवेंद्र सिंह की नाराजगी ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन

बीजेपी एक तरफ संजयन त्रिपाठी के सियासी पाला बदलने से चिंतित थी, वहीं सपा के इस दांव के बाद पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और गहरी हो गई. चार बार के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह गोरखपुर में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान मंच पर उचित स्थान न मिलने से नाराज हो गए और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली. उन्होंने एक चिट्ठी जारी कर अपने समर्थकों और शिक्षकों से "अन्याय और अपमान के खिलाफ" मतदान करने की अपील कर डाली.

Advertisement

यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश का कुर्मी समाज: किन सीटों पर हैं मजबूत वोटबैंक, कितना है सत्ता में दखल?

एमएलसी चुनाव के मतदान से ठीक पहले इस तरह की नाराजगी ने बीजेपी के स्थानीय संगठन और रणनीतिकारों की चिंता दोगुनी कर दी है. संजयन त्रिपाठी के गोरखपुर के इलाके में कई कॉलेज और शिक्षण संस्थान हैं, जबकि देवेंद्र प्रताप सिंह का अपना सियासी कद है और शिक्षकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. ऐसे में अब बीजेपी के लिए ये दोनों ही नेता परेशानी का सबब बन गए हैं.

सीएम योगी के सामने किला बचाने का चैलेंज

गोरखपुर और आसपास के 17 जिलों में फैले इस शिक्षक खंड में हार-जीत का असर सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव के नैरेटिव पर पड़ना तय है. बीजेपी में एक के बाद एक हो रही बगावत को गंभीरता से लेते हुए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमान संभाल ली है और अपना किला बचाने की कवायद में जुट गए हैं.

यह भी पढ़ें: यूपी चुनाव के लिए सपा का रोडमैप तैयार, अखिलेश यादव इस दिन जारी करेंगे मैनिफेस्टो

सीएम योगी ने गोरखपुर के महंत दिग्विजयनाथ पार्क में 12 हजार से अधिक शिक्षकों के साथ सीधा संवाद किया. अपने संबोधन में उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा और शिक्षा नदी के दो छोर हैं जो कभी नहीं मिल सकते. उन्होंने शिक्षकों से बीजेपी उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पक्ष में मतदान करने की अपील की है.

Advertisement

2027 से पहले पूर्वांचल का सियासी गणित

एमएलसी चुनाव में सपा और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई के बीच निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है. अखिलेश यादव खुद आजमगढ़, बलिया और देवरिया के इलाकों में संजयन त्रिपाठी के समर्थन में माहौल बना रहे हैं.

कांग्रेस द्वारा एमएलसी चुनाव में सीधे प्रत्याशी न उतारने से सपा को विपक्षी मतों की गोलबंदी का सीधा फायदा मिलता दिख रहा है. यदि सपा बीजेपी के बागियों के दम पर गोरखपुर के इस दुर्ग में कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल रहती है, तो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पूर्वांचल की राजनीति में सपा के 'पीडीए और ब्राह्मण' समीकरण के जरिए योगी के गढ़ को भेदने का उसका प्लान काफी मजबूत हो जाएगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »