तृतीय वर्ष प्रशिक्षण... बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी ने RSS का कौन सा कोर्स किया पूरा?

बीजेपी के पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह की 2027 के चुनाव से पहले सक्रियता बढ़ गई है. शालिनी सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महिला शाखा 'राष्ट्र सेविका समिति' से जुड़ी हैं और हाल ही में नागपुर में तृतीय वर्ष का सर्वोच्च प्रशिक्षण पूरा किया है.

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बृजभूषण शरण सिंह और शालिनी सिंह (Photo-ITG) बृजभूषण शरण सिंह और शालिनी सिंह (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

बीजेपी के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह इन दिनों राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय हैं. उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा भी चल रही है. उन्होंने कहा कि अगर शीर्ष नेतृत्व चुनाव लड़ने के लिए कहेगा तो वह जरूर चुनावी मैदान में उतरेंगी. उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब 15 सालों से नोएडा में रह रही हैं और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं.

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बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह की शादी भी बिहार के एक राजनीतिक परिवार में हुई है. शालिनी सिंह की शादी बिहार राज्य के आरा से पूर्व सांसद अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते बेटे विशाल सिंह से हुई है.

शालिनी सिंह अपने परिवार के साथ नोएडा में रहती हैं. वह भाजपा की सक्रिय सदस्य और नेता हैं. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महिला शाखा 'राष्ट्र सेविका समिति' से जुड़ी हुई हैं. संघ की इसी महिला शाखा का सर्वोच्च प्रशिक्षण भी शालिनी सिंह ने प्राप्त किया है.

RSS की महिला शाखा से जुड़ीं हैं शालिनी सिंह

बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने खुद मीडिया से बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया कि वह संघ की 'राष्ट्र सेविका समिति' की एक प्रशिक्षित सदस्य हैं. हाल ही में उन्होंने तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण नागपुर में पूरा किया है. उन्होंने यह भी कहा कि वह संघ की विचारधारा से अलग नहीं होना चाहतीं और बीजेपी में रहकर ही राजनीति करेंगी.

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शालिनी सिंह के पिता बृजभूषण शरण सिंह ने छात्र राजनीति से अपनी पारी शुरू की थी और फिर राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गए थे. वह बीजेपी से सांसद बने और उनके नक्शेकदम पर ही उनके बेटों प्रतीक भूषण और करण भूषण ने भी अपनी राजनीतिक पारी बीजेपी से शुरू की. अब शालिनी सिंह भी बीजेपी और संघ की विचारधारा पर चलने की बात कर रही हैं.

राष्ट्र सेविका समिति से तृतीय वर्ष प्रशिक्षित

शालिनी सिंह ने कहा कि वह राष्ट्र सेविका समिति से तृतीय वर्ष प्रशिक्षित हैं और हाल ही में नागपुर में तृतीय वर्ष की ट्रेनिंग पूरी की है. हालांकि, संघ की संगठनात्मक संरचना और कार्यप्रणाली के संदर्भ में इसे समझना बेहद आवश्यक है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्य संगठन केवल पुरुषों और लड़कों के लिए कार्य करता है, लेकिन महिलाओं के लिए संघ ने 'राष्ट्र सेविका समिति' का गठन कर रखा है.

आरएसएस की विचारधारा से जुड़ी महिलाओं और युवतियों के लिए 'राष्ट्र सेविका समिति' नामक एक स्वतंत्र महिला संगठन कार्य करता है. राष्ट्र सेविका समिति का अपना अलग संगठनात्मक ढांचा, शाखाएं और प्रशिक्षण शिविर (प्रवेश, प्रबोध और प्रवीण वर्ग) होते हैं. शालिनी सिंह ने संघ विचार-परंपरा के अंतर्गत राष्ट्र सेविका समिति का तृतीय वर्ग का प्रशिक्षण पूरा किया है, जिसे 'प्रवीण' वर्ग कहा जाता है.

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राष्ट्र सेविका समिति में तीन स्तर का प्रशिक्षण

राष्ट्र सेविका समिति में प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष और तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण (जिन्हें 'वर्ग' कहा जाता है) महिलाओं और युवतियों में नेतृत्व, देशभक्ति, अनुशासन और शारीरिक-बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए आयोजित किए जाने वाले पूर्ण आवासीय शिविर हैं.

प्रथम वर्ष प्रशिक्षण (प्रवेश वर्ग / प्राथमिक स्तर): यह सेविकाओं के लिए बुनियादी प्रशिक्षण शिविर होता है, जो आमतौर पर 15 दिनों का आवासीय कैंप होता है. इसमें समिति की कार्यपद्धति, विचारधारा और प्राथमिक अनुशासन की जानकारी दी जाती है. इसे प्रांत या प्रांतीय स्तर पर आयोजित किया जाता है. इसमें नियमित रूप से योग, शारीरिक व्यायाम, आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस), यष्टि (लाठी) संचालन, समता (परेड) और बौद्धिक सत्र होते हैं.

द्वितीय वर्ष प्रशिक्षण (प्रबोध वर्ग): प्रथम वर्ष पूरा करने और शाखा में निरंतर सक्रिय रहने वाली चुनिंदा सेविकाओं को द्वितीय वर्ष के वर्ग में प्रवेश मिलता है. यह उच्च स्तर का प्रशिक्षण है जो क्षेत्र या संभाग स्तर पर आयोजित होता है. इसमें वैचारिक स्पष्टता, इतिहास, भारतीय संस्कृति, संगठन कौशल और नेतृत्व गुणों को गहराई से सिखाया जाता है. शारीरिक प्रशिक्षण और शस्त्र संचालन का अभ्यास इसमें अधिक कठिन व उन्नत होता है.

तृतीय वर्ष प्रशिक्षण (प्रवीण वर्ग): यह राष्ट्र सेविका समिति का सर्वोच्च प्रशिक्षण शिविर है, जो उन समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए होता है जो पिछले दो चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं.

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तृतीय वर्ष मुख्य रूप से केंद्र स्तर पर नागपुर में आयोजित किया जाता है, जहाँंपूरे देश से चुनिंदा सेविकाएं भाग लेती हैं. यह देशभर की संस्कृति और भाषाओं से जुड़ी महिलाओं का संगम होता है. इसमें सांगठनिक जिम्मेदारी, नीति-निर्माण, समाज सेवा परियोजनाओं के संचालन और वैचारिक दृढ़ता का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.

राष्ट्र सेविका समिति का गठन कब हुआ

राष्ट्र सेविका समिति का गठन 25 अक्टूबर 1936 को विजयादशमी के दिन महाराष्ट्र के वर्धा में किया गया था. इसे अमलीजामा पहनाने का काम लक्ष्मीबाई केलकर ने किया, जिन्हें प्यार से 'मौसीजी' कहा जाता था. 1930 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए लक्ष्मीबाई केलकर ने महिलाओं को संगठित और सशक्त बनाने की आवश्यकता महसूस की. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से भेंट की और चर्चा की.

डॉ. हेडगेवार के सुझाव और वैचारिक मार्गदर्शन के बाद, महिलाओं के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त संगठन के रूप में 'राष्ट्र सेविका समिति' की स्थापना की गई. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में देशभक्ति, सांस्कृतिक मूल्य, शारीरिक स्वावलंबन और सामाजिक नेतृत्व की भावना विकसित करना है. बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह संघ की इसी शाखा से जुड़ी हैं और हाल ही में उन्होंने तृतीय वर्ष की ट्रेनिंग पूरी की है.

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