पठानपुरम एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां राजनीति पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर आधारित है. हर समय जनता द्वारा परखी जाती है. यह कोल्लम जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित है और मावेलिकारा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. विधानसभा क्षेत्र संख्या 120 है. यहां शहर की अर्थव्यवस्था और आसपास के ग्रामीण जीवन का संगम देखने को मिलता है. इस क्षेत्र के मतदाता बड़े
वैचारिक नारों से कम और रोजमर्रा के प्रशासन से ज्यादा प्रभावित होते हैं. उनके लिए अच्छी सड़कें, समय पर इलाज, सही ढंग से मिलने वाली सरकारी योजनाएं, और ऐसे नेता जो जरूरत के समय आसानी से मिल जाएं, यही असली राजनीति है.
यहां चुनाव हमेशा कड़े होते हैं और लोगों की राजनीतिक स्मृति बहुत लंबी होती है. पठानपुरम का स्वभाव उसके भूगोल से जुड़ा है. यह कस्बा आसपास के पहाड़ी और अर्ध-वन क्षेत्र वाले ग्रामीण इलाकों के लिए व्यापार, परिवहन और सेवाओं का केंद्र है. यहां की मंडियां, बस स्टैंड, अस्पताल, स्कूल, बैंक और सरकारी दफ्तर रोजमर्रा की जिंदगी के केंद्र हैं. आस-पास के गांव खेती, बागानी, दिहाड़ी मजदूरी और छोटे कारोबार पर निर्भर हैं, जिनकी हालत सीधे शहर की अर्थव्यवस्था से जुड़ी हैय. इसलिए सड़क, पुल, बस सेवा और दफ्तरों तक पहुंच जैसे मुद्दे यहां बहुत अहम हैं. खराब सड़क या देर से बनी पुलिया लोगों की रोजी-रोटी तक को प्रभावित कर देती है, इसलिए लोग सरकार को इन्हीं चीजों से आंकते हैं.
सामाजिक रूप से यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन ईसाई और मुस्लिम समुदाय भी अच्छी संख्या में हैं. फिर भी यहां वोट सीधे-सीधे जाति या धर्म के आधार पर नहीं पड़ते. लोगों का झुकाव उनके पेशे, यूनियन, व्यापार मंडल, सरकारी योजनाओं पर निर्भरता और मोहल्ले के नेटवर्क से तय होता है. सहकारी संस्थाएं, पुस्तकालय, सांस्कृतिक संगठन और रेजिडेंट एसोसिएशन राजनीतिक सोच बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. इस क्षेत्र में नेता की व्यक्तिगत छवि बहुत मायने रखती है. लोग ऐसे प्रतिनिधि चाहते हैं जो दिखाई दें, जिनसे मिलना आसान हो और जो दफ्तरों में काम करवा सकें. कई बार पार्टी से ज्यादा व्यक्ति पर भरोसा किया जाता है. जो नेता चुनाव के बाद भी लोगों के संपर्क में रहता है, वही लंबे समय तक टिकता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में यह बात फिर साबित हुई जब केरल कांग्रेस (बी) के के. बी. गणेश कुमार ने 67,276 वोट पाकर जीत हासिल की. कांग्रेस के ज्योतिकुमार चमक्काला को 52,940 वोट मिले और 14,336 वोटों के अंतर से हार हुई. भाजपा के वी. एस. जितिन देव को 12,398 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे. मतदान प्रतिशत अच्छा रहा, जिससे पता चलता है कि लोग राजनीति को गंभीरता से लेते हैं.
यहां महंगाई, ईंधन के दाम, परिवहन खर्च, रोजगार, पेंशन, राशन, मकान योजना, स्वास्थ्य सुविधाएं, अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, बरसात के समय जलभराव, सड़क और ड्रेनेज जैसे मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं. जमीन से जुड़े विवाद, पर्यावरण और विकास परियोजनाएं भी कई बार राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं. कस्बे के मुख्य बाजार इलाके में ट्रैफिक, सफाई और सार्वजनिक सेवाएं अहम हैं, जबकि गांवों में सड़क, योजनाओं की पहुंच और जमीन के मसले प्रमुख रहते हैं.
भाजपा की संगठनात्मक मौजूदगी है, पर अभी मुकाबला मुख्य रूप से वामपंथी और कांग्रेस गठबंधन के बीच ही रहता है और नतीजा अक्सर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ पर निर्भर करता है.
कुल मिलाकर पठानपुरम वही नेता चुनता है जो काम करके दिखाए, समय पर मदद करे, योजनाएं दिलाए और संकट में साथ खड़ा रहे. यह इलाका उसी शासन को पसंद करता है जिसे वह रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस कर सके.
(K. A. Shaji)