अरनमुला एक ऐसी विधानसभा क्षेत्र है जहाx राजनीति पर आस्था, स्मृति और नैतिक विश्वास की गहरी छाया रहती है. पम्पा नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र अपनी परंपराओं और विरासत के प्रति बेहद सजग समाज का प्रतिनिधित्व करता है. यहां का मतदान व्यवहार आमतौर पर भावनात्मक या टकरावपूर्ण नहीं होता, बल्कि संस्थाओं पर भरोसे, सांस्कृतिक संयम और इस अपेक्षा से तय होता है
कि शासन परंपरा का सम्मान करते हुए कुशलता से जनकल्याण भी करे. अरनमुला सोच-समझकर वोट करता है, लेकिन जब काम दिखाई देता है तो पूरे भरोसे के साथ समर्थन भी देता है.
पठनमथिट्टा जिले में स्थित और पठनमथिट्टा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा अरनमुला केरल की राजनीतिक भूगोल में एक खास स्थान रखता है. अरनमुला पार्थसारथी मंदिर, प्रसिद्ध वल्लमकली (नौका दौड़) और जीआई टैग प्राप्त अरनमुला कन्नडी (धातु का दर्पण) इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाते हैं. यहां सांस्कृतिक गौरव और रोजमर्रा की प्रशासनिक जरूरतें साथ-साथ चलती हैं, जिससे यहां की राजनीति ध्रुवीकरण से बचती है और भरोसेमंद नेतृत्व को महत्व देती है.
अरनमुला की भौगोलिक पहचान पम्पा नदी और उसके उपजाऊ तटों से जुड़ी है. धान के खेत, नदी किनारे बसे गांव और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके इसकी बनावट तय करते हैं. हर साल मॉनसून में बाढ़, कटाव और ढांचागत नुकसान की आशंका बनी रहती है, इसलिए आपदा प्रबंधन और नदी सुरक्षा यहां हमेशा राजनीतिक एजेंडे में रहते हैं.
यहां की अर्थव्यवस्था खेती, विरासत से जुड़े व्यवसायों, प्रवासी आय और सेवा क्षेत्र पर आधारित है. पारंपरिक शिल्प केंद्रों के साथ आधुनिक शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान भी मौजूद हैं. समस्याएं बहुत तेज नहीं लेकिन लगातार बनी रहती हैं जैसे बाढ़ सुरक्षा, भूमि संरक्षण, सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता. नदी या आर्द्रभूमि को होने वाला कोई भी खतरा तुरंत राजनीतिक मुद्दा बन जाता है.
सामाजिक रूप से अरनमुला में हिंदू आबादी का वर्चस्व है और मंदिरों से जुड़ी संस्थाएं जनमत को प्रभावित करती हैं. नायर और एझावा समुदाय बड़ी संख्या में हैं. एझावा समुदाय एसएनडीपी जैसे संगठनों के माध्यम से कल्याणकारी राजनीति से जुड़ा है, जिससे वामपंथी दलों को समर्थन मिला है. ईसाई समुदाय संख्या में कम है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और सहकारी संस्थाओं के कारण उनका प्रभाव है और वे व्यावहारिक सोच से वोट देते हैं. मुस्लिम आबादी सीमित है और मुख्यतः व्यापार व सेवा क्षेत्र में है. यहां की खास बात यह है कि मंदिर समितियां और सांस्कृतिक संगठन नैतिक प्रभाव रखते हैं और राजनीतिक राय को आकार देते हैं.
अरनमुला की राजनीति में संतुलन और मर्यादा दिखाई देती है. मतदाता परंपराओं के अपमान को स्वीकार नहीं करते, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही भी उन्हें मंज़ूर नहीं. वे ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो संस्कृति का सम्मान करें और काम भी करके दिखाएं. यहां अतिवादी विचारधाराओं को जगह नहीं मिलती. भाजपा ने धार्मिक प्रतीकों के सहारे समर्थन जुटाने की कोशिश की, लेकिन स्थायी सफलता के लिए पहचान से ज्यादा भरोसेमंद प्रशासन और कल्याणकारी काम जरूरी साबित हुए.
2021 के विधानसभा चुनाव में यहां वामपंथी मोर्चे की मजबूत पकड़ देखने को मिली. सीपीआई(एम) की वीणा जॉर्ज ने 74,950 वोट पाकर कांग्रेस के के. शिवदासन नायर को 19,003 वोटों से हराया. भाजपा तीसरे स्थान पर रही और मुकाबला मुख्यतः दो दलों के बीच सिमटा रहा. वीणा जॉर्ज की व्यक्तिगत छवि ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई. पूर्व टीवी पत्रकार होने के कारण उनकी पहचान और जनता से संवाद मजबूत था. एक युवा, सुलभ और काम करने वाली विधायक के रूप में उनकी छवि ने शहरी और अर्धशहरी मतदाताओं को आकर्षित किया. बाद में उनके स्वास्थ्य मंत्री बनने से महामारी के बाद के दौर में लोगों का भरोसा और बढ़ा.
अरनमुला में पठनमथिट्टा नगर पालिका और घनी रिहायशी बस्तियां शामिल हैं, जहां स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और नगर सेवाएं बेहद अहम हैं. बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार होने से स्थिर और भरोसेमंद शासन की चाह मजबूत हुई. 2016 से यहां वामपंथी शासन के प्रति झुकाव बढ़ता गया और 2021 में यह पूरी तरह मजबूत हो गया. पम्पा नदी पर बाढ़ नियंत्रण, आर्द्रभूमि की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और पेंशन जैसी योजनाएं सांकेतिक राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण रहीं.
अरनमुला में जीत उसी को मिलती है जिस पर सांस्कृतिक संस्थाओं का भरोसा हो और जो संकट के समय लोगों के बीच मौजूद रहे. बाढ़, स्वास्थ्य आपातकाल या कल्याण योजनाओं में देरी के दौरान नेता की सक्रियता को बहुत ध्यान से देखा जाता है. परंपरा के प्रति असम्मान या संकट में अनुपस्थिति को लोग स्वीकार नहीं करते.
संक्षेप में, विधानसभा क्षेत्र संख्या 113 अरनमुला पठनमथिट्टा जिले में स्थित एक अर्धशहरी मध्य-केरल क्षेत्र है, जहां खेती, विरासत, प्रवासी आय और सरकारी सेवाएं जीवन का आधार हैं. यहां हिंदू बहुसंख्या के साथ ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यक भी रहते हैं. नदी किनारे के गांवों में बाढ़ और कटाव, मंदिर क्षेत्रों में सांस्कृतिक प्रभाव, रिहायशी इलाकों में स्वास्थ्य और पेंशन जैसे मुद्दे चुनावी सोच को दिशा देते हैं.
मतदाता नतीजों को महत्व देते हैं. वे ऐसे नेताओं को चुनते हैं जो परंपरा का आदर करें, कल्याणकारी योजनाएं सही ढंग से लागू करें और प्रशासनिक विश्वसनीयता बनाए रखें. केरल की नदी घाटी की राजनीति में अरनमुला एक ऐसा क्षेत्र है जहां आस्था और प्रशासन, विरासत और विकास, दोनों को बराबर तौला जाता है,
(K. A. Shaji)