चथन्नूर कोल्लम जिले के मध्य हिस्से में स्थित यह सीट कोल्लम लोकसभा क्षेत्र (संख्या 126) का हिस्सा है. इसका भूगोल तटीय किनारों, कृषि-आधारित अंदरूनी इलाकों और तेजी से बढ़ते अर्ध-शहरी केंद्रों का मिश्रण है. लगातार हो रहे बुनियादी ढांचे के विस्तार ने यहां की सामाजिक बनावट को बदला है, लेकिन राजनीति का मूल चरित्र अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है. चथन्नूर
की राजनीति न तो अचानक उठने वाली लहरों से संचालित होती है और न ही व्यक्तित्व-केन्द्रित प्रचार से. यहां चुनावी मुकाबले संगठन, संस्थागत मौजूदगी और मतदाताओं की राज्य के साथ लंबे समय से बनी परिचितता पर टिके रहते हैं. स्मृति के साथ वोट करता है और सत्ता को “डिलीवरी” यानी शासन-प्रशासन की वास्तविक पहुंच से मापता है.
इस क्षेत्र में मतदाता आमतौर पर राजनीतिक रूप से स्थिर माने जाते हैं. यहां वोटिंग व्यवहार वैचारिक विरासत, जमीनी नेटवर्कों की निरंतर सक्रियता और रोजमर्रा की शासन-प्रक्रिया के परिणामों से तय होता है. अचानक बड़े झटके या तीखे स्विंग कम देखने को मिलते हैं. बदलाव जब आता है, तो वह धीरे-धीरे आता है और अक्सर यह संकेत देता है कि सतह के नीचे कोई गहरा पुनर्संयोजन हो रहा है. यही कारण है कि चथन्नूर में चुनाव केवल नाराजगी या भावनात्मक मुद्दों से नहीं, बल्कि यह देखने से तय होते हैं कि किसके पास संस्थागत पकड़ और प्रशासन तक पहुंचने की क्षमता ज्यादा है.
चथन्नूर का राजनीतिक चरित्र इसके मिश्रित आर्थिक ढांचे से निकलता है. यहां कृषि-प्रधान पंचायतें हैं, कस्बाई केंद्र हैं, परिवहन कॉरिडोर हैं, छोटे औद्योगिक क्लस्टर हैं और नए आवासीय इलाके भी लगातार बढ़ रहे हैं. कॉयर और काजू जैसे पारंपरिक उद्योगों ने ऐतिहासिक रूप से श्रमिक संगठन और ट्रेड यूनियन राजनीति को मजबूत किया है. दूसरी ओर, कृषि और सेवा क्षेत्र में रोजगार आज भी बड़ी आबादी की आजीविका का आधार है.
यह बहु-स्तरीय अर्थव्यवस्था एक ऐसे राजनीतिक रूप से जागरूक निम्न-मध्यवर्ग को जन्म देती है, जो सहकारी संस्थाओं, ट्रेड यूनियनों और स्थानीय स्वशासन की संरचनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है. यहां राजनीति का प्रभाव टीवी बहसों या बड़े मंचों की तुलना में सहकारी समितियों, पंचायत स्तर की गतिविधियों और रोजमर्रा की संस्थागत मौजूदगी से ज्यादा तय होता है.
चथन्नूर में नागरिक समस्याएं एकसमान नहीं हैं. अर्ध-शहरी इलाकों और परिवहन मार्गों के आसपास सड़क रखरखाव, जल निकासी, पेयजल आपूर्ति और कचरा प्रबंधन सबसे बड़े मुद्दे बनते हैं. मानसून के दौरान बाढ़ और सार्वजनिक कार्यों में देरी यहां जल्दी ही राजनीतिक मुद्दा बन जाती है.
यहां मतदाता शासन का मूल्यांकन “कंसिस्टेंसी” और “फॉलो-थ्रू” से करते हैं. पेंशन वितरण, कल्याण योजनाओं की डिलीवरी, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और बाढ़-नियंत्रण जैसे मुद्दे बड़े हेडलाइन प्रोजेक्ट्स से अधिक मायने रखते हैं. प्रशासनिक जवाबदेही पर करीबी निगरानी रहती है और प्रतिनिधियों से अपेक्षा होती है कि वे सिस्टम फेल होने पर सीधे हस्तक्षेप करें.
चथन्नूर कोल्लम के व्यापक सामाजिक मिश्रण को प्रतिबिंबित करता है. हिंदू बहुसंख्यक हैं, जबकि मुस्लिम और ईसाई आबादी अलग-अलग पॉकेट्स में बिखरी हुई है. जाति पहचानें मौजूद हैं, लेकिन यहां मतदान व्यवहार अधिक मजबूती से वर्ग स्थिति, कल्याण योजनाओं पर निर्भरता और संस्थागत जुड़ाव से तय होता है.
कृषि परिवार कीमत स्थिरता, इनपुट सपोर्ट और पेंशन की निरंतरता को प्राथमिकता देते हैं. अर्ध-शहरी परिवार बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और परिवहन कनेक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान देते हैं. समुदायों के पार, राजनीतिक निष्ठा राज्य के साथ रोजमर्रा के अनुभव से संचालित होती है.
चथन्नूर की राजनीतिक संस्कृति निरंतरता, उपलब्धता और संस्थागत जड़ों वाले नेतृत्व को पुरस्कृत करती है. नेताओं से अपेक्षा होती है कि वे चुनावी मौसम के बाहर भी दिखाई दें, सहकारी निकायों और ट्रेड यूनियनों के साथ संबंध बनाए रखें और अधिकारियों के साथ लगातार हस्तक्षेप करते रहें.
यहां पार्टी संगठन बेहद महत्वपूर्ण है. चुनाव अभियान असाधारण घटनाएं नहीं, बल्कि रोजमर्रा के राजनीतिक कामकाज का विस्तार होते हैं. जो नेता जमीनी मौजूदगी कमजोर करते हैं, उनकी प्रासंगिकता धीरे-धीरे घटती है.
चथन्नूर लंबे समय से वाम-झुकाव वाली सीट मानी जाती रही है. CPI के नेतृत्व वाली वह लामबंदी, जो श्रमिक आंदोलनों और सहकारी नेटवर्कों से निकली, यहां की राजनीति का आधार रही है. दशकों तक मुकाबला मुख्य रूप से वाम और कांग्रेस के बीच द्विध्रुवीय रहा.
हाल के वर्षों में यह पैटर्न बदला है. वाम मोर्चा ने नियंत्रण बनाए रखा है, लेकिन विपक्षी स्पेस का पुनर्संयोजन हुआ है. भाजपा यहां मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में उभरी है और कांग्रेस तीसरे स्थान की ओर खिसक गई है. इस बदलाव ने सीट को एक पारंपरिक द्विध्रुवीय मुकाबले से बदलकर संरचनात्मक रूप से तीन-कोणीय बना दिया है.
2021 के विधानसभा चुनाव में CPI उम्मीदवार जी. एस. जयलाल ने LDF के लिए सीट जीती. उन्होंने 59,296 वोट हासिल किए और 17,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. भाजपा उम्मीदवार बी. बी. गोपकुमार ने 42,090 वोट पाकर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार एन. पीथमबरा कुरुप 34,280 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे. मतदान प्रतिशत लगभग 74% रहा, जो राजनीतिक सहभागिता की निरंतरता दिखाता है.
यह परिणाम वाम की पकड़ की पुष्टि करता है, लेकिन साथ ही विपक्ष की दिशा बदलने का संकेत भी देता है. भाजपा का उभार यह बताता है कि ऊंची जातियों के मतदाता, केंद्र की कल्याण योजनाओं के लाभार्थी और राजनीतिक रूप से पहले कम सक्रिय युवाओं का एक हिस्सा धीरे-धीरे उसके साथ जुड़ रहा है. वहीं कांग्रेस का तीसरे स्थान पर जाना उसके संगठनात्मक क्षरण को दर्शाता है.
अर्ध-शहरी कस्बाई केंद्र और परिवहन कॉरिडोर संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां बुनियादी ढांचे की विफलता या कल्याण योजनाओं में देरी चुनावी अंतर को प्रभावित कर सकती है. कृषि इलाके अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं और वहां सहकारी गतिविधियों तथा कल्याण डिलीवरी का असर निर्णायक रहता है.
कॉयर और काजू से जुड़े औद्योगिक व श्रमिक-घनत्व वाले इलाके अब भी वाम समर्थन का आधार हैं, जबकि नए आवासीय क्लस्टर भाजपा के विस्तार के क्षेत्र बनते जा रहे हैं.
चथन्नूर स्थिरता, संस्थागत पकड़ और नियमित शासन-प्रदर्शन को पुरस्कृत करता है. यहां एंटी-इन्कम्बेंसी मौजूद है, लेकिन वह आमतौर पर वाम के खिलाफ पूर्ण अस्वीकार में नहीं बदलती. मतदाता व्यक्तित्व-आधारित राजनीति से अधिक रोजमर्रा की डिलीवरी, संगठन की ताकत और नेतृत्व की उपलब्धता को महत्व देते हैं.
(के ए शाजी)