केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टाराक्करा एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां राजनीति बड़े वादों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की सुविधाओं से तय होती है. यह इलाका न तो पूरी तरह शहरी है और न ही पूरी तरह ग्रामीण. यहां एक बड़ा बाजार, अस्पताल, स्कूल, बस अड्डे और सरकारी दफ्तर हैं, जिन पर आसपास के गांव निर्भर रहते हैं. इसलिए यहां के मतदाता सरकार को
इस बात से परखते हैं कि सड़कें कैसी हैं, बसें समय पर चलती हैं या नहीं, अस्पतालों में इलाज ठीक से मिलता है या नहीं और रोजमर्रा की चीजें कितनी महंगी हो रही हैं.
कोट्टाराक्करा में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी समुदाय रहते हैं, लेकिन यहां चुनाव धर्म से ज्यादा कामकाज और सुविधाओं के आधार पर लड़ा जाता है. लोग बहुत सजग हैं और अगर पेंशन, राशन, इलाज या दूसरी सरकारी सेवाओं में गड़बड़ी होती है तो तुरंत नाराजगी जाहिर करते हैं. यहां नेता की पहचान उसके भाषण से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह जनता के बीच कितना मौजूद रहता है और उनकी समस्याएं कितनी जल्दी सुलझाता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में यहां वामपंथी दल (सीपीआईएम) के के.एन. बालगोपाल ने कांग्रेस की आर. रेशमी को हराया था. बालगोपाल को लगभग 68 हजार वोट मिले, जबकि रेशमी को करीब 58 हजार वोट मिले. जीत का अंतर करीब 10,800 वोटों का था. बीजेपी तीसरे स्थान पर रही, लेकिन मुख्य मुकाबला वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच ही रहा.
इस क्षेत्र में महंगाई, रोजगार, छोटे व्यापार की हालत, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़कें और परिवहन सबसे बड़े चुनावी मुद्दे होते हैं. बाजार वाले इलाकों में ट्रैफिक, सफाई और सुविधाओं की बात होती है, जबकि आसपास के गांवों में सड़क, जमीन और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलना अहम मुद्दा रहता है.
कोट्टाराक्करा एक ऐसा इलाका है जहां लोग भावनाओं या नारों से नहीं, बल्कि काम देखकर वोट देते हैं. अगर सरकार और विधायक जमीन पर अच्छा काम करें, लोगों के बीच मौजूद रहें और रोजमर्रा की परेशानियां कम करें, तो यहां उन्हें समर्थन मिलता है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में संगठन, ईमानदार काम और जनता से सीधा जुड़ाव चुनाव जीतने की सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती है.
(K. A. Shaji)