चेंगन्नूर कभी भी एक शांत और साधारण विधानसभा क्षेत्र नहीं रहा. अपने आकार के हिसाब से यहां की राजनीति बहुत सक्रिय, बहसों से भरी और जागरूक मानी जाती है. यहां के लोग राजनीति को गहराई से समझते हैं और मोहल्ला स्तर तक संगठित रहते हैं. चुनाव यहां सिर्फ दो गठबंधनों के बीच मुकाबला नहीं होते, बल्कि यह इस बात की लड़ाई होती है कि स्थानीय प्रशासन, समाज और
संस्थाओं पर किसका प्रभाव रहेगा - जैसे कल्याणकारी योजनाओं के दफ्तर, सहकारी समितियां, मंदिरों का प्रभाव, अल्पसंख्यकों का भरोसा और सरकार की रोज़मर्रा की मौजूदगी.
अलप्पुझा जिले में स्थित और मावेलिकारा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण चेंगन्नूर की सामाजिक स्थिति रणनीतिक है. यहां त्रावणकोर की सांस्कृतिक विरासत और अलप्पुझा की मजबूत संगठन परंपरा दोनों का असर दिखता है. यह न तो पूरी तरह तटीय है और न ही पूरी तरह कृषि आधारित, बल्कि एक ऐसा मध्य क्षेत्र है जहां संस्थाएं, स्कूल, बाजार और आवासीय इलाके घने रूप से जुड़े हुए हैं. लोग सरकार के कामकाज पर नजदीकी से नजर रखते हैं और बूथ स्तर की सक्रियता चुनाव का रुख बदल सकती है.
यहां की राजनीति बड़े नारों से ज्यादा रोजमर्रा की समस्याओं से तय होती है. जलनिकासी, बाढ़, अस्पताल की सुविधा, पेंशन, महंगाई और परिवहन जैसी बातें तुरंत राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं. लोग यह देखते हैं कि कौन नेता या पार्टी जमीन पर काम करती है और समस्याओं का हल निकालती है.
चेंगन्नूर की आबादी में अलग-अलग जाति और समुदाय हैं, जिनमें हिंदू समाज के कई वर्ग, विशेष रूप से एझवा और नायर समुदाय, संख्या में प्रमुख हैं. अल्पसंख्यक समुदाय भी राजनीति के माहौल और भाषा पर कड़ी नजर रखते हैं. यहां राजनीतिक दलों की शाखाएं, सहकारी संस्थाएं, मंदिर से जुड़े समूह और मोहल्ला समितियां लगातार सक्रिय रहती हैं, जिससे चुनाव के समय माहौल बहुत तेज और ध्रुवीकृत हो जाता है. मुख्य मुकाबला आमतौर पर एलडीएफ और यूडीएफ के बीच होता है, जबकि बीजेपी का वोट बैंक होते हुए भी वह अभी तक इस ढांचे को पूरी तरह तोड़ नहीं पाई है.
2018 के उपचुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में वाम दल के साजी चेरियन की जीत ने दिखाया कि संगठित कैडर, कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा और मज़बूत नेटवर्क यहां निर्णायक होते हैं. हालांकि विपक्ष के वोट बंट जाने से भी नतीजे प्रभावित होते हैं.
चेंगन्नूर में लोग अपने प्रतिनिधि को इस आधार पर चुनते हैं कि वह कितनी आसानी से सरकारी मदद दिलवा पाता है, संकट के समय कितनी मौजूदगी दिखाता है और समाज में संतुलन बनाए रखता है. बाढ़, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कें, नालियां और रोजगार जैसे मुद्दे यहां हमेशा अहम रहते हैं. राजनीतिक भाषा और माहौल भी बहुत मायने रखते हैं, क्योंकि थोड़ी सी असहजता भी वोटरों के रुझान बदल सकती है.
चेंगन्नूर निवासी आदत से नहीं, अनुभव से वोट देता है. यहां के लोग संगठन, काम और भरोसे को सबसे ऊपर रखते हैं. इस मध्य केरल के क्षेत्र में सत्ता वही पाता है जो केवल वादे नहीं, बल्कि ज़मीन पर असरदार शासन और मजबूत जनसंपर्क दिखा सके.
(K. A. Shaji)