अदूर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ी हुई है. यह केरल के पथानामथिट्टा जिले में स्थित है और पथानामथिट्टा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यह न तो पूरी तरह शहरी है और न ही पूरी तरह ग्रामीण. यहां एक व्यस्त नगर केंद्र है, उसके आसपास अर्ध-शहरी बस्तियां और रिहायशी इलाके हैं, जो स्कूल, अस्पताल, दफ्तर, सड़क, बस स्टैंड जैसी
सरकारी सुविधाओं पर बहुत निर्भर रहते हैं. इसलिए यहां चुनाव बड़े नारों या विचारधाराओं से नहीं, बल्कि इस बात से तय होते हैं कि काम जमीन पर कितना सही हो रहा है, योजनाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं और नेता आम लोगों तक कितने सुलभ हैं.
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट होने के कारण यहां सम्मान, समानता और सरकारी लाभों तक पहुंच जैसे मुद्दे बहुत अहम माने जाते हैं. लोग यह देखते हैं कि पेंशन, आवास, इलाज और दूसरी कल्याणकारी योजनाएं सही लोगों तक पहुंच रही हैं या नही. अदूर में हिंदू और ईसाई समुदाय भी बड़ी संख्या में हैं, जो व्यापार, नौकरी, शिक्षा और विदेश से आने वाली कमाई से जुड़े हुए हैं. यहां की जनता जागरूक है और प्रशासन की छोटी-बड़ी कमियों पर भी नजर रखती है.
नगर होने के कारण यहां कचरा प्रबंधन, नाली, पीने का पानी, सड़कें, ट्रैफिक और टाउन प्लानिंग जैसे मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं. साथ ही आसपास के इलाकों में मकान, जमीन और कनेक्टिविटी की समस्याएं भी अहम हैं. इसलिए यहां के मतदाता अपने विधायक से भाषण से ज्यादा काम की उम्मीद करते हैं. वे चाहते हैं कि नेता दफ्तरों में जाकर उनकी फाइलें आगे बढ़ाए, अधिकारियों से बात करे और रोजमर्रा की दिक्कतों को सुलझाए.
2021 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई के चिट्टयम गोपकुमार ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की, लेकिन जीत का अंतर कम रहा, जिससे साफ हुआ कि जनता सतर्क है और हर बार प्रदर्शन को परखती है. अदूर में वोट देने का आधार भरोसा और काम है, न कि केवल पार्टी का नाम. यहां लोग उन्हीं नेताओं को पसंद करते हैं जो नियमित रूप से जनता से मिलें, सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाएं और नगर की समस्याओं पर लगातार ध्यान दें.
अदूर एक ऐसा क्षेत्र है जहां राजनीति शोर-शराबे से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सुविधाओं, प्रशासन की कार्यशैली और नेता की उपलब्धता से तय होती है. यहां लोग वही नेता चुनते हैं जो भरोसेमंद हों, काम करके दिखाएं और जनता के बीच बने रहें.
(K. A. Shaji)