नेमोम विधानसभा क्षेत्र अपने राजनीतिक इतिहास के प्रति जागरूक मतदाताओं वाला इलाका है. यह क्षेत्र तिरुवनंतपुरम शहर के दक्षिणी किनारे पर स्थित है और तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यहां पुराने मोहल्ले, तेजी से बढ़ती रिहायशी कॉलोनियां और अर्ध-शहरी इलाके एक साथ मौजूद हैं, जो शहर के लगातार फैलाव से आकार ले चुके हैं. यहां की राजनीति रोजमर्रा
के प्रशासन से जुड़ी रहती है, लेकिन इसके साथ-साथ स्मृतियों, पहचान और लंबे समय से चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की गहरी परतें भी इसमें शामिल हैं.
नेमोम के मतदाता बुनियादी सुविधाओं पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं. सड़कें, नालियां, पानी की सप्लाई, कचरा प्रबंधन और परिवहन जैसे मुद्दे यहां तुरंत राजनीतिक मुद्दे बन जाते हैं. इसके साथ ही, तिरुवनंतपुरम शहर की अन्य सीटों की तुलना में नेमोम में वैचारिक धार ज्यादा तीखी रही है. इसका कारण दशकों से चली आ रही राजनीतिक सक्रियता और समय के साथ बदलती राजनीतिक निष्ठाएं हैं.
कभी तिरुवनंतपुरम का बाहरी इलाका माने जाने वाला नेमोम अब शहर के शहरी ढांचे का हिस्सा बन चुका है. यहां रिहायशी कॉलोनियां, व्यावसायिक क्षेत्र और पुराने गांवनुमा इलाके एक-दूसरे के साथ मौजूद हैं. पानी की कमी, सड़कों की हालत और ट्रैफिक जैसी नागरिक समस्याएं सभी सामाजिक वर्गों को समान रूप से प्रभावित करती हैं.
लेकिन नेमोम की राजनीतिक पहचान केवल बुनियादी ढांचे से तय नहीं होती. यहां की राजनीति स्मृति से भी गहराई से जुड़ी है. यहां के मतदाता पुराने चुनाव, उम्मीदवारों का राजनीतिक सफर और विचारधारात्मक बदलावों को असाधारण रूप से स्पष्ट रूप में याद रखते हैं.
नेमोम में शासन का मूल्यांकन रोजमर्रा की सेवाओं से किया जाता है. बंद पड़ी नाली या अनियमित पानी की सप्लाई बहुत जल्दी राजनीतिक मुद्दा बन जाती है. यहां के मतदाता अपने प्रतिनिधियों से उम्मीद करते हैं कि वे क्षेत्र में मौजूद रहें, लोगों से सीधे मिलें और समस्याओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दें.
क्योंकि यहां चुनावी अंतर अक्सर बहुत कम होता है, इसलिए शासन की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. नेमोम में प्रशासन की छोटी-सी चूक भी राजनीतिक माहौल को बदल सकती है.
नेमोम की सामाजिक संरचना कई परतों वाली है. यहां हिंदू आबादी बड़ी संख्या में है, साथ ही ईसाई और मुस्लिम समुदाय भी अलग-अलग वार्डों में फैले हुए हैं. हिंदू मतदाताओं के भीतर जातिगत समीकरण समय के साथ और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं.
नेमोम में भाजपा की लगातार बढ़त मुख्य रूप से उच्च जाति वर्गों के एकजुट होने से जुड़ी रही है. मोहल्ला-स्तर की संगठनात्मक मजबूती और निरंतर वैचारिक प्रचार ने इस प्रक्रिया को मजबूत किया. यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि कई चुनाव चक्रों में धीरे-धीरे विकसित हुआ और इसने नेमोम की राजनीतिक संतुलन को बदल दिया.
नेमोम की राजनीतिक संस्कृति निरंतर संपर्क और संगठनात्मक गहराई को महत्व देती है. यहां के नेता अगर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, जाति-समुदाय नेटवर्क और वार्ड समितियों से लगातार जुड़े नहीं रहते, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.
यह सीट अचानक या केवल चुनाव के समय दिखाई देने वाले अभियानों को पसंद नहीं करती. लंबे समय की मौजूदगी और पहचान यहां ज्यादा मायने रखती है.
नेमोम का केरल की राजनीति में एक खास स्थान है. 1996 से 2001 के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता ओ. राजगोपाल ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ दोनों को हराकर भाजपा को पहली बार केरल विधानसभा में प्रवेश दिलाया.
उस समय कई राजनीतिक विश्लेषकों ने उनकी जीत को सहानुभूति लहर का नतीजा बताया. उनका तर्क था कि एक बुजुर्ग नेता के प्रति मतदाताओं की सहानुभूति ने यह जीत दिलाई. लेकिन यह विश्लेषण अधूरा साबित हुआ. राजगोपाल की व्यक्तिगत छवि के साथ-साथ भाजपा का संगठनात्मक आधार भी इस जीत में अहम भूमिका में था. समय के साथ यह संगठन कमजोर नहीं हुआ, बल्कि और मजबूत होता चला गया.
राजगोपाल के बाद से भाजपा ने नेमोम में लगातार प्रगति की, खासकर उच्च जाति वर्गों और शहरी मध्यम वर्ग के कुछ हिस्सों में. इस संगठनात्मक विस्तार ने नेमोम को एक अस्थायी सफलता से बदलकर भाजपा के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक सीट बना दिया.
2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत ने इस धारणा को और मजबूत किया. भले ही 2021 में भाजपा यह सीट हार गई, लेकिन उसका वोट शेयर मजबूत बना रहा. इससे साफ हो गया कि नेमोम अब भाजपा के लिए अपवाद नहीं, बल्कि स्थायी रूप से प्रतिस्पर्धी सीट बन चुका है.
2021 का विधानसभा चुनाव नेमोम की प्रतिस्पर्धात्मक प्रकृति को दर्शाता है. सीपीआई(एम) उम्मीदवार वी. शिवनकुट्टी ने 55,837 वोट हासिल कर लगभग 38.24 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की. उन्होंने भाजपा उम्मीदवार कुम्मनम राजशेखरन को हराया, जिन्हें 51,888 वोट यानी लगभग 35.54 प्रतिशत वोट मिले. जीत का अंतर केवल 3,949 वोटों का था.
कांग्रेस उम्मीदवार के. मुरलीधरन 36,524 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जिससे यह साफ हुआ कि नेमोम में मुकाबला त्रिकोणीय है और कांग्रेस की केंद्रीय भूमिका कमजोर होती जा रही है.
यह परिणाम दिखाता है कि वामपंथी दल संगठनात्मक ताकत और शासन के मुद्दों पर नेमोम में वापसी कर सकता है, लेकिन भाजपा अब भी जीत से बहुत दूर नहीं है. कम अंतर ने इस क्षेत्र की अस्थिरता और भविष्य में संभावित बदलावों की गुंजाइश को उजागर किया.
इसके बाद हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन ने पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाया है. वार्ड-स्तर पर मजबूत नतीजों ने भाजपा को यह भरोसा दिलाया है कि नेमोम अब “पक्का सीट” बन सकता है, खासकर तब जब मतदान प्रतिशत और जातिगत एकजुटता अनुकूल हो. भाजपा के लिए नेमोम अब सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व का क्षेत्र बन चुका है.
घनी आबादी वाली कॉलोनियां और पुराने मोहल्ले जलनिकासी और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. वहीं अर्ध-शहरी इलाकों में सड़क और परिवहन प्रमुख मुद्दे हैं. उच्च जाति बहुल क्षेत्र भाजपा के मजबूत गढ़ बन चुके हैं, जबकि मिश्रित आबादी वाले इलाके अब भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
शहरी बुनियादी ढांचा नेमोम की राजनीति का केंद्र बना हुआ है. सड़कें, नालियां, पानी की सप्लाई और कचरा प्रबंधन लगातार मुद्दे बने रहते हैं. इसके अलावा महंगाई, रोजगार की सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी भी मतदान व्यवहार को प्रभावित करती है. समय के साथ पहचान और प्रतिनिधित्व, खासकर हिंदू मतदाताओं के भीतर, अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं.
नेमोम में चुनाव शासन के प्रदर्शन, संगठनात्मक पहुंच और जातिगत एकजुटता के इर्द-गिर्द घूमते हैं. रोजमर्रा की नागरिक समस्याओं से जुड़ा अभियान जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ वफादार मतदाता समूहों को संगठित करने की क्षमता भी उतनी ही अहम है.
नेमोम का मतदान व्यवहार शहरी राजधानी की सोच और राजनीतिक गतिविधि से संचालित होता है. यहां पहचान, संगठन और लंबे समय की मौजूदगी भी उतनी ही निर्णायक भूमिका निभाती है. यही संयोजन नेमोम को केरल के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में शामिल करता है.
(ए के शाजी)