स्विगी, जेप्टो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी पार्टनर के तौर पर जुड़ना जितना आसान दिखता है, काम के दौरान होने वाले नुकसान और कटौतियों के नियम उतने ही बारीक हैं. डिलीवरी के दौरान अगर बैग या टी-शर्ट फट जाए, ऑर्डर का सामान टूट जाए या कंपनी की साइकिल खराब हो जाए, तो सवाल यही होता है कि इसका पैसा कौन भरेगा और क्या यह रकम सीधे वीकली पे-आउट से कटेगी.
गिग प्लेटफॉर्म्स के एग्रीमेंट में डैमेज और डिडक्शंस को लेकर साफ नियम लिखे होते हैं. इनमें कंपनी की किट, कंपनी से मिली गाड़ी, अपनी बाइक के खर्च, ऑर्डर डैमेज, सामान चोरी होने और कैश के अंतर तक की जिम्मेदारी तय की गई है. आपको एक-एक करके आसान लैंग्वेज में इसे समझाने की कोशिश करते हैं.
कंपनी की टी-शर्ट और बैग का क्या होगा?
जैसे कि कंपनी से मिलने वाली टी-शर्ट, बैग और जैकेट को लेकर नियम साफ हैं. ऑन-बोर्डिंग के समय मिली टी-शर्ट, बैग या रिफ्लेक्टिव जैकेट की क्वालिटी बनाए रखना राइडर की जिम्मेदारी होती है.
अगर इस्तेमाल के दौरान टी-शर्ट या डिलीवरी बैग फट जाता है या डैमेज हो जाता है, तो नया बैग या टी-शर्ट जारी कराने पर कंपनी क्वालिटी कंजर्वेशन फीस वसूलती है. यह चार्ज राइडर से नकद नहीं लिया जाता, बल्कि आने वाले वीकली पे-आउट से काट लिया जाता है.
अगर खराब हो गई कंपनी की बाइक तो?
इसी तरह कंपनी से मिली बाइक या ई-साइकिल के लिए मेंटेनेंस के नियम अलग हैं. अगर आप बिना अपनी गाड़ी के काम कर रहे हैं और कंपनी, जैसे जेप्टो ने आपको साइकिल या ई-साइकिल दी है, तो रोजमर्रा का खर्च और उसे ठीक स्थिति में रखने का सामान्य मेंटेनेंस राइडर को खुद उठाना होता है.
वहीं अगर मोटर या गियर में कोई बड़ी या तकनीकी खराबी आती है, या फिर नॉर्मल वियर एंड टियर की स्थिति होती है, तो उसका पैसा राइडर की जेब या पे-आउट से नहीं काटा जाता और उसका खर्च कंपनी उठाती है.
अपनी स्कूटी-बाइक खराब हुई तो क्या?
लेकिन मानिए कि आपके पास अपना वाहन है, तब उसके लिए नियम पूरी तरह से अलग हैं. पेट्रोल, सर्विसिंग, पंचर या किसी भी एक्सीडेंटल डैमेज का पूरा खर्च राइडर को खुद उठाना होता है. कंपनी बाइक मेंटेनेंस के लिए अलग से कोई रीइम्बर्समेंट नहीं देती.
सोचिए कि अगर आप राइडर हैं और आपसे कस्टमर का कोई सामान खराब, टूट या गिर गया. सामान टूटने, लीक होने या चोरी होने पर पेनल्टी का सीधा असर पे-आउट पर पड़ता है. अगर राइडर की गलती या लापरवाही से ट्रांसपोर्ट के दौरान सामान टूटता है या लीक होता है, तो उस ऑर्डर की सर्विस फीस, यानी पे-आउट, राइडर को नहीं दी जाती.
अगर डिलीवरी से पहले सामान चोरी या गायब हो जाता है, तो राइडर को उस नुकसान की भरपाई, ऑर्डर वैल्यू तक, खुद करनी पड़ती है या अपने खर्च पर नया सामान खरीदकर डिलीवर करना होता है. कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स में अगर जमा किए गए कैश और असल बिल में कोई फर्क, यानी शॉर्टेज, आता है, तो वह अंतर सीधे राइडर के पे-आउट से काट लिया जाता है.
कुल मिलाकर, गिग प्लेटफॉर्म्स पर कंपनियां तुरंत जेब से नकद पैसे नहीं मांगतीं, लेकिन मर्चेंडाइज डैमेज, ऑर्डर खराबी और कैश के अंतर का सीधा असर राइडर की वीकली कमाई पर पड़ता है. ऐसे में काम के दौरान किट और सामान, दोनों की सुरक्षा जरूरी हो जाती है.
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