उत्तर प्रदेश के मेरठ को दहला देने वाले बहुचर्चित 'नीला ड्रम हत्याकांड' (सौरभ राजपूत हत्याकांड) में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई है. इस खौफनाक वारदात ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जहां शव को एक नीले ड्रम में छिपाकर ठिकाने लगाया गया था.
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में न्याय की मूर्ति बनकर सामने आए और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II इन दिनों देश भर में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. आइए जानते हैं कि कौन हैं जज अरविंद कुमार मिश्रा-II और कैसा रहा है उनका अब तक का न्यायिक सफर...
कौन हैं जज अरविंद कुमार मिश्रा?
अरविंद कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं. उनका जन्म 2 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में हुआ था. उनके पिता का नाम बीपी मिश्रा है. मूल रूप से मऊ के रहने वाले मिश्रा पिछले करीब 23 वर्षों से अधिक समय से न्यायपालिका में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
2003 में पहली बार बने थे सिविल जज
अरविंंद कुमार मिश्रा की शिक्षा की बात करें तो उन्होंने वर्ष 1990 में स्नातक (बीए), 1994 में एलएलबी (LL.B.) और 1996 में एलएलएम (LL.M.) की डिग्री हासिल की. न्यायिक सेवा में उनकी औपचारिक शुरुआत 31 मई 2003 को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में हुई थी.
अपने दो दशकों से अधिक लंबे करियर के दौरान उन्होंने यूपी के कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. उन्होंने गाजीपुर, सुल्तानपुर, अलीगढ़ और गोरखपुर में सिविल जज, एसीजेएम (ACJM), और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के रूप में काम किया. इसके बाद अप्रैल 2014 में उनकी तैनाती कानपुर नगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में हुई.
वो कानपुर में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव एवं अपर विधि परामर्शदाता (विधायी) के पद पर भी प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इसके अलावा, वह लखनऊ स्थित राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष भी रहे. नवंबर 2024 में उन्हें मिर्जापुर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया था.
मेरठ में 5 महीने पहले हुई थी नियुक्ति
इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थानांतरण अधिसूचना के बाद, 21 मई 2026 से अरविंद कुमार मिश्रा-II मेरठ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में तैनात हैं. मिर्जापुर से ट्रांसफर होकर मेरठ आने के महज कुछ ही महीनों के भीतर उनके पाले में देश का यह सबसे सनसनीखेज 'नीला ड्रम हत्याकांड' आया.
इस मामले में 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया गया था, और अब 14 अक्टूबर 2026 को जज अरविंद कुमार मिश्रा-II ने दोनों को फांसी की सजा सुनाकर न्याय का एक कड़ा संदेश दिया है. उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति 31 जुलाई 2031 है. अपनी सख्त कार्यशैली और निष्पक्ष फैसलों के लिए जाने जाने वाले जज मिश्रा का यह फैसला भारतीय न्याय जगत में एक मिसाल बन गया है.
उस्मान चौधरी