आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र की खुदकुशी और पढ़ाई के भारी तनाव को लेकर खड़े हो रहे सवालों के बीच आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रो. वी रामगोपाल राव ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने सुझाव दिया है कि आईआईटी के चार साल के बीटेक (BTech) प्रोग्राम का ढांचा बदलकर इसे '5-साल का फ्लेक्सिबल बीटेक प्रोग्राम' कर देना चाहिए. इस व्यवस्था में जो छात्र क्रेडिट पूरे कर लें, वे समय से पहले (3.5 या 4 साल में) डिग्री लेकर निकल सकते हैं और जिन्हें ज्यादा मदद की जरूरत हो, वे बिना किसी हीन भावना के 5 साल में अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं.
प्रो. राव का मानना है कि आईआईटी कक्षाओं में आज विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और भाषाई पृष्ठभूमि से छात्र आते हैं. ऐसे में 'सबको एक ही रफ्तार से पढ़ाने' का तरीका छात्रों पर मानसिक दबाव बना रहा है.
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
आईआईटी दिल्ली और बीटीएस पिलानी के वीसी रह चुके प्रो. राव ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) पास करके आने वाले छात्रों में रैंक का भारी अंतर होता है, एक ही क्लास में सिंगल डिजिट रैंक से लेकर 5-डिजिट रैंक वाले छात्र साथ बैठते हैं.
उन्होने कहा कि भारी-भरकम कोचिंग से निकले टॉप रैंकर्स भी कई बार आईआईटी में नए और अनोखे सवालों को देखकर घबरा जाते हैं, क्योंकि वे केवल रटे-रटाए फॉर्मेट को हल करने के अभ्यस्त होते हैं. भाषाई विविधता और पढ़ाई का अलग माहौल होने से एक ही क्लास में सभी छात्रों को एक ही स्पीड से पढ़ाना प्रोफेसरों के लिए मुमकिन नहीं होता. कुछ छात्र पीछे छूट जाते हैं और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं.
कैसा होगा 5-साल का यह नया फॉर्मूला?
प्रो. राव का सुझाव है कि बीटेक का बाय-डिफ़ॉल्ट ढांचा ही 5 साल का बनाया जाए, ताकि अतिरिक्त समय लेने वाले छात्रों को 'पिछड़ा हुआ' न माना जाए: जो छात्र तेजी से क्रेडिट्स पूरे कर लें, वे 3.5 या 4 साल में ही पास-आउट हो जाएं. वहीं जो छात्र 5 साल का विकल्प चुनें, उन्हें रिकॉर्डेड लेक्चर्स, ऑनलाइन स्टडी मटेरियल और भाषा सिखाने में अलग से मदद दी जाए. 5 साल को बाय-डिफ़ॉल्ट रखने से छात्रों पर समय सीमा का मानसिक दबाव खत्म होगा.
NEP के मॉडल और मौजूदा आईआईटी व्यवस्था से कैसे अलग है?
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में पढ़ाई बीच में छोड़ने (Multiple Exit) पर सर्टिफिकेट या डिप्लोमा देने का प्रावधान है. वर्तमान में IIT बॉम्बे में 3 साल बाद BSc (इंजीनियरिंग) की डिग्री लेकर निकलने का विकल्प है, जबकि IIT मद्रास और IIT दिल्ली में भी ड्रॉप-आउट रोकने के लिए क्रेडिट बेस्ड एग्जिट ऑप्शन हैं.
हालांकि, प्रो. राव का मॉडल संस्थान छोड़कर जाने (Exit Ramp) का नहीं, बल्कि एक ही बीटेक डिग्री को अपनी क्षमता और रफ्तार के अनुसार पूरा करने की आजादी देने का है. प्रो. राव का यह प्रस्ताव साफ करता है कि प्रवेश परीक्षा कठिन बनाने से ज्यादा जरूरी यह है कि परिसर के भीतर आने के बाद छात्र को अपनी गति से सीखने का माहौल मिले, ताकि किसी भी युवा को मानसिक तनाव के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े.
आजतक एजुकेशन डेस्क