दिल्ली में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत पहली कक्षा में दाखिले का इंतजार कर रहे सात साल के बच्चे के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत दी है. कोर्ट ने शिक्षा निदेशालय और संबंधित स्कूल को निर्देश दिया है कि बच्चे के मौजूदा शैक्षणिक सत्र में दाखिले पर विचार किया जाए. अगर मूल रूप से आवंटित स्कूल में दाखिला देना संभव नहीं है, तो बच्चे को उसके घर से 5 किलोमीटर के दायरे में किसी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूल में सीट उपलब्ध कराई जाए. यह मामला सात वर्षीय मास्टर विराज सोलंकी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने पिता गौरव कुमार सोलंकी के माध्यम से हाईकोर्ट का रुख किया था. मामले की सुनवाई जस्टिस जसमीत सिंह की एकल पीठ ने की.
EWS कोटे के तहत मिली थी सीट
याचिका के मुताबिक, विराज ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में एडमिशन के लिए शिक्षा निदेशालय की ईडब्ल्यूएस/डीजी श्रेणी के तहत आवेदन किया था. यह आवेदन शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों के लिए किया गया था. इसे लेकर 6 अप्रैल 2026 को जारी पहली कंप्यूटरीकृत लॉटरी में बच्चे का नाम नहीं आया. इसके बाद 10 जुलाई 2026 को जारी दूसरी सूची में उसे नवीन भारती प्रिपरेटरी स्कूल में सीट आवंटित की गई.
परिवार को नहीं मिली आवंटन की जानकारी
हालांकि, याचिका में कहा गया कि बच्चे के परिवार को सीट आवंटित होने की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी. परिवार की ओर से दावा किया गया कि उन्हें आवंटन के संबंध में एसएमएस या दूसरी सूचना नहीं मिली थी.बच्चे के पिता का कहना था कि उनकी बेटी के ईडब्ल्यूएस आवेदन के दौरान उन्हें ऐसे संदेश मिले थे, इसलिए इस बार भी उन्हें सूचना मिलने की उम्मीद थी. जानकारी नहीं मिलने की वजह से परिवार तय समय में स्कूल में दाखिले की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका.
सितंबर में पोर्टल से चला पता
याचिका के मुताबिक, बच्चे के पिता को सितंबर 2026 में इस आवंटन के बारे में तब पता चला, जब उन्होंने उच्च कक्षाओं में दाखिले के लिए शिक्षा निदेशालय के पोर्टल पर लॉगिन किया. इसके बाद परिवार ने स्कूल,नगर निगम और शिक्षा निदेशालय से संपर्क किया, 23 सितंबर को इस मामले में लिखित अभ्यावेदन भी दिए गए, लेकिन बच्चे को दाखिला नहीं मिल सका. इसके बाद 24 सितंबर को जारी तीसरी आवंटन सूची में बच्चे का नाम भी नहीं था.
कोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए करंजावाला एंड कंपनी के सीनियर पार्टनर संदीप कपूर ने तर्क दिया कि माता-पिता को कोई एसएमएस या अन्य सूचना प्राप्त नहीं हुई, जबकि पिता को पहले अपनी बेटी के ईडब्ल्यूएस आवेदन के समय ऐसे अलर्ट मिले थे. इस वजह से दाखिला के दौरान परिवार को इस आवंटन की जानकारी नहीं हो सकी. उन्होंने आगे तर्क दिया कि आवंटन की सूचना न देने से लेकर प्रवेश से इनकार करने और बिना किसी स्पष्टीकरण के नाम हटाने तक, अधिकारियों का यह आचरण संविधान के अनुच्छेद 14 और 21-ए तथा आरटीई (RTE) अधिनियम के वैधानिक जनादेश का उल्लंघन है.
मूल स्कूल में दाखिला नहीं तो 5 किमी के अंदर दूसरा स्कूल
बच्चे की शिक्षा की निरंतरता की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने शिक्षा निदेशालय और नवीन भारती प्रिपरेटरी स्कूल सहित प्रतिवादियों को चालू सत्र के लिए बच्चे को वहां दाखिला देने पर विचार करने का निर्देश दिया. यदि उस स्कूल में प्रवेश देना संभव न हो, तो शिक्षा निदेशालय को उसे उसके घर के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित किसी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूल में सीट आवंटित कर दाखिला दिलाने का ऐलान किया है.
संजय शर्मा