जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में काम कर रहे भारतीय मूल के इंजीनियरों और उद्यमियों से भारत लौटने की अपील फिर दोहराई है. उन्होंने कहा कि भारत में करने के लिए लाखों काम हैं. यह अपील उन्होंने उसी दिन दोहराई, जिस दिन उन्होंने बताया कि बड़ी छंटनी से बचने की कोशिश के तहत जोहो में इस साल परफॉर्मेंस अप्रेजल और सैलरी इन्क्रिमेंट नहीं होंगे.
वेम्बू के इस रुख पर सवाल भी उठे हैं. आलोचकों ने पूछा है कि जब देश की टेक इंडस्ट्री खुद चुनौतियों से जूझ रही है और जोहो पर भी बढ़ती लागत और वित्तीय दबाव है, तब लौटने वाले पेशेवरों के लिए मौके कितने मजबूत हैं. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
भारत लौटने की अपील पर फिर जोर.
जोहो में अप्रेजल नहीं होने का ऐलान करने के कुछ घंटे बाद वेम्बू ने मंगलवार को एक्स पर लिखा कि अमेरिका में अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे भारतीयों को ऐसे देश में टिके रहने की कोशिश करने के बजाय घर लौट आना चाहिए, जो अब उन्हें नहीं चाहता. उन्होंने लिखा, जब दूसरा देश आपसे कहे कि घर जाओ तो आप घर आते हैं. विकल्प क्या है. उनसे रहने की भीख मांगें. गैरकानूनी तरीके से रहें. भारत में बनाने के लिए लाखों काम हैं, चाहे सॉफ्टवेयर का क्षेत्र भर गया हो या खत्म ही क्यों न हो जाए.
वेम्बू की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका में भारतीय टेक पेशेवरों के बीच अनिश्चितता बढ़ी हुई है. अमेरिकी सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट, टाटा, विप्रो और इन्फोसिस समेत 8 आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम में हिस्सा लेने से रोक दिया है. यह नियोक्ता प्रायोजित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक अहम चरण माना जाता है.
ऐसा माहौल बनाना जरूरी, जहां वे सच में सफल हो सकें
वेम्बू के संगठन में अप्रेजल नहीं होने के ऐलान के बाद कई लोगों ने अमेरिका से भारतीयों को लौटने की उनकी अपील पर सवाल उठाए. एआई मेंटर और शिक्षाविद संदीप मनुधाने ने एक्स पर लिखा, वह अपनी ही कंपनी में बड़ी छंटनी के मुहाने पर हैं, और साथ ही लगातार एनआरआई से कह रहे हैं कि वे तुरंत लौटकर नया भारत बनाएं. अनरियल.
एक्स पर विनीत के नाम के एक यूजर ने भी श्रीधर वेम्बू की उस अपील पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने प्रवासी भारतीयों से भारत लौटकर कारोबार खड़ा करने को कहा था. विनीत ने कंपनी की अपनी वित्तीय चुनौतियों की ओर इशारा किया. उन्होंने लिखा कि जोहो और श्रीधर वेम्बू ने जो बनाया है, उसके लिए उनके मन में गहरा सम्मान है. zoho भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों की एक मिसाल है, जिसने दिखाया है कि भारत से वैश्विक कारोबार खड़ा किया जा सकता है.
विनीत ने यह भी कहा कि नियमित वेतन वृद्धि रोकने के फैसले से लौटने वाले पेशेवरों के लिए उपलब्ध मौकों पर सवाल उठते हैं. उनका यह भी दावा था कि जोहो 18 महीने से अपने कारोबारी नजरिए को लेकर दबाव में है और उसने अपने कर्मचारी संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है. उन्होंने लिखा कि देशभक्ति विदेश में रह रहे भारतीयों को लौटने के लिए प्रेरित कर सकती है, लेकिन वह मजबूत कारोबारी माहौल, पूंजी, ग्राहकों और टिकाऊ रोजगार के मौके की जगह नहीं ले सकती. उन्होंने कहा कि लोगों का भारत लौटकर निर्माण करना जरूरी है, लेकिन ऐसा माहौल बनाना भी जरूरी है, जहां वे सच में सफल हो सकें.
अमेरिका के फैसले के बाद वेम्बू की दलील
8 अक्टूबर को अमेरिकी सरकार ने इन 8 कंपनियों को नई परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अर्जियां देने और लंबित अर्जियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से रोक दिया था. इससे इन कंपनियों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की लंबी अवधि की आव्रजन योजनाएं मुश्किल हो सकती हैं. इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वेम्बू ने कहा था कि भारतीयों ने अमेरिका की तकनीकी ताकत में बड़ा योगदान दिया है, लेकिन अब अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा उन्हें नहीं चाहता.
वेम्बू ने वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों की अनिश्चितता का भी जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि ऐसे भारतीयों के सामने अपनी मेहनत से बनाई जिंदगी उखाड़ने की दर्दनाक संभावना खड़ी है. उन्होंने लिखा था कि इसे एक साहसी नए भविष्य की जन्म पीड़ा के रूप में देखें. वापस आइए, भारत बनाते हैं. उनकी यह अपील ऐसे समय आई, जब आव्रजन पाबंदियां और रोजगार आधारित स्थायी निवास के रास्तों को लेकर अनिश्चितता, अमेरिका में बसने की कोशिश कर रहे भारतीय टेक कर्मचारियों की योजनाओं पर असर डाल रही है.
जोहो में इस साल नहीं होंगे अप्रेजल
भारत लौटने की वेम्बू की अपील ऐसे समय आई है, जब जोहो खुद भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी बढ़ती लागत के बीच खर्च काबू में करने की कोशिश कर रही है. वेम्बू ने कहा कि कंपनी छंटनी से बचने के लिए मार्केटिंग समेत कई क्षेत्रों में लागत घटा रही है. कंपनी ने इस साल अपने सामान्य वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं देने का भी फैसला किया है.
X पर एक पोस्ट में वेम्बू ने माना कि इस फैसले का असर कर्मचारियों पर पड़ेगा और कहा कि इसे टाल नहीं पाने के लिए उन्होंने माफी भी मांगी है. उन्होंने लिखा, हमने अपना मार्केटिंग बजट घटाया है. हमने अपने कर्मचारियों से यह भी कह दिया है कि इस साल हम अपनी सामान्य वेतन वृद्धि नहीं दे सकते. इसे टाल नहीं पाने के लिए मैंने माफी मांगी है.
इस फैसले का मतलब है कि जोहो के कर्मचारियों को इस साल उनकी सामान्य सालाना वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी, क्योंकि कंपनी बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच लागत नियंत्रण को प्राथमिकता दे रही है. एक तरफ वेम्बू विदेश में रह रहे भारतीयों से लौटकर भारत के तकनीकी ढांचे को मजबूत करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जोहो में सालाना वेतन वृद्धि रोकने का फैसला यह दिखाता है कि भारत की कंपनियां भी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क