जेन जी के कॉर्पोरेट लाइफ में आने के बाद वर्क कल्चर में कई तरह के बदलाव आए हैं. लेकिन इन बदलावों को लेकर लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया होती है. बहुत से लोग इन बदलावों के पक्ष में रहते हैं, वहीं कई इसके विरोध में रहते हैं. बहुत लोगों के हिसाब से जेन जी के पास काम करने का तरीका नहीं है, वहीं बहुत के लिए जेन जी वर्क कल्चर में अच्छे परिवर्तन ला रहे हैं.
इस बीच कई लोग जेन-जी के साथ काम करने के अपने अनुभवों को साझा करते हैं. हाल ही में एक एम्प्लॉय ने अपने जेन जी कलीग के साथ काम करने का अनुभव साझा किया है.
रेडिट पर एक यूजर ने अपने जेन जी को-वर्कर के व्यवहार को लेकर नाराजगी जाहिर की. यूजर ने बताया कि उसके साथ काम करने वाला ये युवक ऑफिस में कुछ ऐसी हरकतें करता है, जो उसे परेशान करती हैं. यूजर ने अपनी पोस्ट में इसकी कुछ वजहें भी बताईं.
1. बिना सुने बात करना- यूजर के मुताबिक, उसका को-वर्कर सुबह आते ही 'ब्रो, क्या चल रहा है?' जैसी बातें करने लगता है. लेकिन वो सिर्फ बात शुरू करने के लिए बोलता है और सामने वाला क्या कह रहा है, इस पर ध्यान नहीं देता. यूजर को उसे 'ब्रो' कहने से परेशानी नहीं है, बल्कि उसका बार-बार ऐसा करना परेशान करता है.
2. काम पर ध्यान नहीं देना- यूजर ने बताया कि उसके को-वर्कर को मैनेजर और मेंटर से कई बार काम सुधारने के लिए फीडबैक मिला है. इसके बावजूद वो ऑफिस में ठीक से काम करता हुआ नहीं दिखता. यूजर को लगता है कि वो ऑफिस को बहुत हल्के में लेता है.
3. सीरियस टाइम पर भी मजाक करना- यूजर ने बताया कि एक बार वो अपने मैनेजर के साथ काम से जुड़ी एक सीरियस प्रॉब्लम संभाल रहा था. तभी उसका को-वर्कर आया और लॉग्स चेक करने जैसी बातों पर मजाक करने लगा. यूजर के मुताबिक, उस टाइम इस तरह की बातें करना सही नहीं था, क्योंकि टीम एक जरूरी प्रॉब्लम सुलझा रही थी.
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4. आवाज़ बदलकर बात करने की आदत- यूजर को अपने को-वर्कर की एक और आदत परेशान करती है. उसके मुताबिक, वह नॉर्मल आवाज में बात करने के बजाय अपनी आवाज को जानबूझकर भारी बनाने की कोशिश करता है. इससे उसकी बात समझना मुश्किल हो जाता है और यूजर को ये बनावटी लगता है.
इस पोस्ट पर कई लोगों ने जवाब दिया और जेन जी के साथ काम करने के अपने एक्सपीरियंस साझा किए. एक यूजर ने कहा कि उन्होंने ऐसे यंग एम्प्लॉयज के साथ भी काम किया है, जो काम सीखने के लिए उत्सुक और काबिल थे. वहीं, कुछ ऐसे भी मिले, जो खुद को दूसरों से ज्यादा समझते थे और काम करने में इंटरेस्ट नहीं दिखाते थे.
एक दूसरे रेडिट यूजर ने अपने साथ काम करने वाले एक जूनियर का अनुभव शेयर किया. उन्होंने बताया कि वह सहकर्मी उनसे दो पद नीचे था. उन्होंने उसे अपना अधूरा काम सिर्फ जानकारी के लिए दिखाया था, लेकिन जूनियर ने उस पर जिस तरह से राय दी, वह उन्हें रूखा और बदतमीजी भरा लगा. एक अन्य रेडिट यूजर ने सलाह दी कि अगर वो जूनियर अपने काम पर मिले फीडबैक को सही तरीके से नहीं अपनाता है, तो उसे बताया जा सकता है कि उसके खिलाफ परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) शुरू किया जा सकता है. ये एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एम्प्लॉय को अपने काम में सुधार करने का मौका दिया जाता है.
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