रूस पर मंडराया अमेरिकी खतरा? अलास्का पहुंचा 96 मिसाइलों वाला युद्धपोत

अमेरिका का नया मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस टेड स्टीवंस अलास्का पहुंच गया है. 96 वर्टिकल लॉन्च सेल और SPY-6 रडार से लैस यह युद्धपोत ऐसे समय आया है, जब आर्कटिक और बेरिंग स्ट्रेट में अमेरिका-रूस की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं.

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ये है अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत यूएसएस टेड स्टीवंस. (Photo: Wiki) ये है अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत यूएसएस टेड स्टीवंस. (Photo: Wiki)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

अमेरिकी नौसेना का नया गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस टेड स्टीवंस (डीडीजी-128) 27 सितंबर 2026 को अलास्का के व्हिटियर पहुंच गया. यह आर्ले बर्क-क्लास का नया युद्धपोत है.इसकी आधिकारिक कमिशनिंग 3 अक्टूबर को व्हिटियर में होगी. जहाज में एसपीवाई-6 रडार और एजिस बेसलाइन 10 कॉम्बैट सिस्टम लगा है. इसमें 96 वर्टिकल लॉन्च सेल्स हैं, जिनसे कई तरह की मिसाइलें लॉन्च की जा सकती हैं.

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यूएसएस टेड स्टीवंस ऐसे समय अलास्का पहुंचा है, जब अमेरिका और रूस दोनों आर्कटिक में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहे हैं. अलास्का और रूस के बीच बेरिंग स्ट्रेट है. इसके दूसरी तरफ रूस का चुकची इलाका और फार ईस्ट है. इस वजह से अलास्का के आसपास अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी को अहम माना जा रहा है. हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं कि इस जहाज को रूस के खिलाफ किसी खास मिशन के लिए भेजा गया है. कमिशनिंग के बाद इसका होमपोर्ट नॉरफोक, वर्जीनिया रहेगा.

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एसपीवाई-6 रडार और एजिस सिस्टम की ताकत

यूएसएस टेड स्टीवंस में एएन/एसपीवाई-6(वी)1 एयर एंड मिसाइल डिफेंस रडार लगा है. यह रडार हवा में उड़ रहे खतरों और मिसाइलों को खोजने और उन पर नजर रखने का काम करता है. इसके साथ एजिस बेसलाइन 10 कॉम्बैट सिस्टम भी है. यह सिस्टम रडार और दूसरे सेंसर से मिली जानकारी को एक साथ जोड़ता है. इससे जहाज के आसपास मौजूद खतरे को समझने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलती है.

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जहाज में 96 एमके-41 वर्टिकल लॉन्च सेल्स हैं. इन सेल्स में क्रूज मिसाइलें रखी जाती हैं. जरूरत पड़ने पर इन्हीं से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च होती है. इनमें टॉमहॉक और स्टैंडर्ड मिसाइल सीरीज जैसी मिसाइलें शामिल हो सकती हैं. किसी समय जहाज पर कौन सी मिसाइलें मौजूद हैं, इसकी जानकारी आम तौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती.

रूस के चुकची इलाके के पास क्यों अहम है अलास्का?

अलास्का की जगह इस मामले में काफी अहम है. अमेरिका के अलास्का और रूस के बीच बेरिंग स्ट्रेट है. इसके पार रूस का चुकची पेनिनसुला और फार ईस्ट का इलाका है. इस वजह से अलास्का के आसपास अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी रूस के सुदूर पूर्व पर नजर रखने के लिहाज से अहम हो सकती है. 

इसका मतलब यह नहीं है कि यूएसएस टेड स्टीवंस रूस के सभी आर्कटिक सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है. रूस का नॉर्दर्न फ्लीट और उससे जुड़े कई बड़े सैन्य इलाके कोला पेनिनसुला में हैं. यह इलाका बेरिंग स्ट्रेट से काफी दूर है. इसलिए यूएसएस टेड स्टीवंस की मौजूदगी का सीधा भौगोलिक संबंध रूस के फार ईस्ट और चुकची इलाके से ज्यादा है.

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3 अक्टूबर को होगा जहाज का कमीशन

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अमेरिकी नौसेना के मुताबिक यूएसएस टेड स्टीवंस को 3 अक्टूबर को व्हिटियर में आधिकारिक तौर पर कमीशन किया जाएगा. इसके बाद इसका होमपोर्ट नॉरफोक, वर्जीनिया होगा. यानी अलास्का में अभी इसकी मौजूदगी को स्थाई तैनाती नहीं कहा जा सकता. 

यूएसएस टेड स्टीवंस का नाम अमेरिकी सीनेटर टेड स्टीवंस के नाम पर रखा गया है. यह उनके नाम पर बना पहला अमेरिकी युद्धपोत है. टेड स्टीवंस लंबे समय तक अलास्का से अमेरिकी सीनेटर रहे थे. आर्ले बर्क-क्लास के जहाजों में पुराने वर्जन के मुकाबले कई नए सिस्टम लगाए गए हैं. इनमें बेहतर रडार, ज्यादा बिजली क्षमता और नए कूलिंग सिस्टम शामिल हैं. 

इन बदलावों का मकसद जहाज की एयर डिफेंस और मिसाइल डिफेंस क्षमता को बेहतर करना है. आर्कटिक में अमेरिका और रूस की सैन्य गतिविधियां बढ़ने के बीच यूएसएस टेड स्टीवंस की अलास्का में मौजूदगी इस इलाके की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को दिखाती है.

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