ग्लॉस्टरशायर स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड बेस के बगल वाले एक गांव को विस्फोटकों के कारण खाली कराया गया है. यह बेस यूरोप में एकमात्र जगह है जहां अमेरिका अपने भारी बमवर्षक विमान तैयार रखता है. अधिकारियों ने गांववासियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया. अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई कि आज की गिरफ्तारियां ईरान की धमकी से जुड़ी हैं या नहीं. लेकिन यह घटना दिखाती है कि किसी दूसरे देश के युद्ध की तैयारी स्थानीय लोगों पर क्या असर डालती है.
आरएएफ फेयरफोर्ड लंबे समय से अमेरिकी वायु सेना की गतिविधियों का केंद्र रहा है. मार्च में यहां 21 बमवर्षक विमानों का जमावड़ा हुआ था जिसमें बी-1 लैंसर और बी-52 स्ट्रेटोफोर्ट्रेस शामिल थे. यह शीत युद्ध के बाद ब्रिटिश धरती पर सबसे बड़ा बमवर्षक जमावड़ा था. वर्तमान में भी बेस पर 5 बी-1 लैंसर मौजूद हैं.
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ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने फेयरफोर्ड को वैध निशाना करार दिया था. पूर्व प्रधानमंत्री स्टारमर ने शुरू में अमेरिका को ब्रिटिश ठिकानों से ईरान पर हमला करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. लेकिन युद्ध शुरू होने के कुछ दिनों के अंदर उन्होंने अपना रुख बदला और नई पहुंच को रक्षात्मक बताया. इस फैसले के बाद ईरान की तरफ से धमकियां बढ़ीं.
गांव की निकासी विस्फोटकों के कारण हुई है. स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निवासियों को बाहर निकाला. शांत अंग्रेजी गांव अचानक सुर्खियों में आ गया. लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह निकासी सिर्फ सुरक्षा अभ्यास है या किसी वास्तविक खतरे से जुड़ी है. आधिकारिक तौर पर कोई सीधा संबंध नहीं बताया गया है.
स्थानीय असर और बड़े सवाल
फेयरफोर्ड जैसे बेस की मौजूदगी स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाती है लेकिन सुरक्षा जोखिम भी साथ लाती है. भारी बमवर्षकों का जमावड़ा अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा सकता है. जब कोई देश किसी विदेशी ठिकाने को निशाना बताता है तो आसपास के गांव सबसे पहले प्रभावित होते हैं. निकासी के दौरान रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो जाती है. बच्चों की पढ़ाई, कारोबार और आवाजाही प्रभावित होती है.
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यह घटना ब्रिटेन की सैन्य नीति पर भी सवाल उठाती है. विदेशी सेनाओं को ठिकाने उपलब्ध कराना संप्रभुता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पेश करता है. स्टारमर के रुख में बदलाव ने बहस छेड़ दी थी कि ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल कितना रक्षात्मक है और कितना आक्रामक.
आरएएफ फेयरफोर्ड की रणनीतिक अहमियत साफ है. अमेरिका यहां से तेजी से ऑपरेशन चला सकता है. लेकिन शांत गांव को अचानक खाली कराना याद दिलाता है कि बड़े निर्णयों की कीमत आम लोग चुकाते हैं. विस्फोटकों की वजह से निकासी हुई है और जांच जारी है. ईरान की धमकी और बेस की गतिविधियां दोनों पृष्ठभूमि में हैं. फिलहाल सुरक्षा सर्वोपरि है और गांववासी सामान्य जीवन की बहाली का इंतजार कर रहे हैं. यह घटना सैन्य गठबंधनों की जटिल हकीकत को सामने लाती है.
ऋचीक मिश्रा