'जंग रुकवा दें...', ट्रंप के Ex बॉडीगार्ड के पास गया था PAK, करोड़ों दिए, ऑपरेशन सिंदूर में पिटा पाकिस्तान क्या-क्या कर रहा था?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान इस कदर खौफ में था कि उसे किसी तरह भी इस जंग को रुकवाना था. इसके लिए पाकिस्तान राष्ट्रपति ट्रंप के एक पूर्व बॉडीगार्ड तक के पास चला गया था. ट्रंप का ये बॉडीगार्ड कीथ शिलर अमेरिका में लॉबिंग फर्म चलाता है. इसके अलावा पाकिस्तान ने अमेरिका के कई दूसरे लॉबिंग फर्मों की सेवा ली और 45 करोड़ खर्च किए.

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान 60 बार अमेरिकी लॉबिंग फर्मों के पास गया. (Photo: ITG) ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान 60 बार अमेरिकी लॉबिंग फर्मों के पास गया. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में खौफ का आलम इस तरह था कि पाकिस्तानी प्रशासन बार बार अमेरिका के आगे गुहार लगा रहा था. जंग के मैदान में पीटे पाकिस्तान ने पैसे के जोर पर अमेरिका से जंग रुकवानी चाही. पाकिस्तान ने इस काम में लगभग आधा अरब रुपये खर्च किए और 60 बार अमेरिकी आकाओं के आगे गुहार लगाई. ये खुलासे अमेरिकी सरकार द्वारा कई दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के बाद हुआ है. 

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अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत हुए नए खुलासों से पता चलता है कि भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में कैसे एक ज़ोरदार लॉबिंग कैंपेन चलाया. पाकिस्तान अमेरिकी सिस्टम के टॉप लेवल पर क्राइसिस मैनेजमेंट कर रहा था, हथियारों की गुहार लगा रहा था और अमेरिका के साथ आर्थिक मदद के लिए हाथ फैला रहा था. 

पाकिस्तान ने कभी यही हरकत करगिल युद्ध के दौरान की थी. तब पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के आग जंग रुकवाने के लिए गुहार लगा रहे थे. 

इस बार नवाज शरीफ के भाई पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर अमेरिकी फर्मों के जरिए ऑपरेशन सिंदूर के बाद लॉबिंग कर रहे थे और अमेरिका से हर तरह के मदद की गुहार लगा रहे थे. 

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FARA Filing क्या होता है?

FARA का पूरा नाम Foreign Agents Registration Act है. यह अमेरिका का एक कानून है जो 1938 में बनाया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि अमेरिकी सरकार, जनता और नीति-निर्माताओं को पता चले कि विदेशी हितों की ओर से अमेरिका में राजनीतिक, प्रचार या प्रभाव डालने वाली गतिविधियां कौन कर रहा है. 

इसमें रजिस्ट्रेशन के बाद एजेंट को हर 6 महीने में रिपोर्ट फाइल करनी पड़ती है, जिसमें विदेश से मिले पैसे, की गई गतिविधियां, संपर्क किए गए लोग और खर्चों का विवरण शामिल होता है. ये दस्तावेज सार्वजनिक होते हैं और DOJ की वेबसाइट पर उपलब्ध रहते हैं.  

पाकिस्तान की लॉबिंग के बारे में क्या पता चला

FARA दस्तावेजों से पता चला कि पाकिस्तान ने अमेरिकी अधिकारियों से 60 से ज्यादा उच्च-स्तरीय बैठकें मांगीं. इनमें अमेरिकी विदेश विभाग, कांग्रेस सदस्यों और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क शामिल थे. उद्देश्य था कि अमेरिका भारत की सैन्य कार्रवाई को "किसी भी तरह रोक" दे और मध्यस्थता करे. 

स्क्वायर पैटन बोग्स की FARA फाइलिंग से पता चलता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष के चरम पर पाकिस्तान ने कई अमेरिकी सांसदों से संपर्क किया था. इस दौरान पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका से दखल देने की गुहार लगाई. 

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भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई आतंकी कैंपों को ध्वस्त कर दिया और उसके एयरबेस तबाह कर दिया. 

ट्रंप के बॉडी गार्ड के पास पहुंचा पाकिस्तान

ऐसे ही हालत में पाकिस्तान ने सीडेन लॉ एलएलपी और जेवलिन एडवाइजर्स जैसी फर्मों को हायर किया. इन फर्मों में  जॉर्ज सोरियल (ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के पूर्व एग्जीक्यूटिव) और कीथ शिलर (डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व बॉडीगार्ड) शामिल हैं. 

कीथ शिलर एक अमेरिकी पूर्व पुलिस अधिकारी, सिक्योरिटी एक्सपर्ट और राजनीतिक सलाहकार हैं. वे मूल रूप से न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट के डिटेक्टिव थे, जहां उन्होंने कई साल सेवा की. इससे पहले उन्होंने यूएस नेवी में भी ड्यूटी की थी. 

ट्रंप के पूर्व बॉडी गार्ड कीथ शिलर अब लॉबिंग फर्म चलाते हैं. (Photo: X)

1999 में वे डोनाल्ड ट्रंप के पर्सनल बॉडीगार्ड के रूप में जुड़े और धीरे-धीरे ट्रंप ऑर्गनाइजेशन में डायरेक्टर ऑफ सिक्योरिटी बन गए, जहां उन्होंने 2004 से 2017 तक काम किया. ट्रंप के प्रेसिडेंट बनने के बाद, शिलर व्हाइट हाउस में डिप्टी असिस्टेंट टू द प्रेसिडेंट और डायरेक्टर ऑफ ओवल ऑफिस ऑपरेशन्स के रूप में काम करते थे, जहां वे ट्रंप के करीबी सहयोगी थे. 

कीथ शिलर वर्तमान में Javelin Advisors LLC नाम की लॉबिंग और गवर्नमेंट रिलेशंस फर्म से जुड़े हैं, जहां वे मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. 
यह फर्म 2024 के अंत में लॉन्च हुई थी और ट्रंप के पूर्व सहयोगियों द्वारा फाउंडेड की गई, जो फॉरेन एजेंट्स के रूप में रजिस्टर्ड है.

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फाइलिंग से पता चलता है कि पाकिस्तानी प्रतिनिधियों और लॉबिस्टों ने अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों और उनके चीफ ऑफ स्टाफ, पेंटागन, विदेश विभाग और व्हाइट हाउस सिस्टम के अधिकारियों, वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स सहित मीडिया संगठनों से संपर्क किया. 

पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अमेरिका यात्रा का जिक्र भी FARA फाइलिंग में है. इस में दी गई जानकारियों से आसिम मुनीर की वॉशिंगटन यात्रा और लॉबिस्टों द्वारा करवाई गई मीटिंग्स की पुष्टि होती है. 

कभी फोन, कभी कॉल, कभी मैसेज, 60 बार संपर्क किया

FARA फाइलिंग के दस्तावेजों में कहा गया है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को तुरंत हरकत में ला दिया. पाकिस्तानी राजनयिकों और लॉबिस्टों ने अमेरिकी अधिकारियों से लगभग 60 बार संपर्क किया. इनमें ईमेल, फोन कॉल, टेक्स्ट मैसेज और आमने-सामने की मुलाकातें शामिल थीं.

फाइलिंग में बताए गए फोकस एरिया में भारत-पाकिस्तान संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिरता शामिल थे. इसके अलावा वाशिंगटन में पाकिस्तान की सैन्य और राजनयिक पहुंच, महत्वपूर्ण खनिजों और व्यापार मुद्दों सहित आर्थिक सहयोग और अमेरिकी नीति निर्माताओं तक पाकिस्तान की बात पहुंचाने के लिए नैरेटिव तैयार करना था. 

सेडेन लॉ और जेवलिन एडवाइजर्स के अलावा सिडली लॉ एलएलपी ने भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान-अमेरिका आर्थिक जुड़ाव पर काम करने का खुलासा किया.  टीम ईगल कंसल्टिंग एलएलसी और इस्लामाबाद से जुड़े थिंक टैंक ने पाकिस्तान के रक्षा अटैची से जुड़ी बैठकें आयोजित कीं.

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