ईरान-होर्मुज में बमों की बरसात से निकल गया तेल, तट और समंदर दोनों हुए गंदे

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में और ईरानी द्वीपों के बीच पर तेल फैलने से चिंता बढ़ गई है. केशम द्वीप के तट पर प्रदूषण मिलने के बाद ईरान ने कहा है कि इस समुद्री रास्ते से फायदा उठाने वालों को पर्यावरण को हुए नुकसान की जिम्मेदारी और भरपाई भी करनी होगी.

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ईरान के केशम द्वीप के बीच पर फैला हुआ तेल. (Photo: AP) ईरान के केशम द्वीप के बीच पर फैला हुआ तेल. (Photo: AP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि भविष्य में होर्मुज को लेकर होने वाली किसी भी व्यवस्था में पर्यावरण की सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए. यह बयान केशम द्वीप के पास समुद्र और तट पर तेल फैलने के बाद आया है. 

शुरुआती जांच में एक विदेशी बल्क कैरियर जहाज को तेल रिसाव का स्रोत बताया गया है. तेल का रिसाव तट के तीन हिस्सों और आसपास के समुद्र में मिला है.  बघई ने कहा कि होर्मुज से होकर जहाज चलाने और कारोबार करने वाले सभी पक्षों की पर्यावरण को लेकर भी जिम्मेदारी होनी चाहिए. 

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उनका कहना है कि ईरान के समुद्री तटों को कई सालों से प्रदूषण और सैन्य गतिविधियों के कारण नुकसान हुआ है. ईरान के मुताबिक, यह नुकसान खरबों डॉलर तक पहुंच चुका है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. 

यह दुनिया के सबसे जरूरी तेल रास्तों में से एक है. अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, 2024 में यहां से रोज करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरा था. 2025 की पहली छमाही में यह आंकड़ा करीब 2.09 करोड़ बैरल रोज रहा. यानी दुनिया में रोज इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम का करीब 20 फीसदी हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है.

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केशम द्वीप के पास क्या हुआ?

केशम द्वीप के पास समुद्र और तट के तीन हिस्सों में तेल प्रदूषण मिला है. शुरुआती सबूतों में एक विदेशी बल्क कैरियर जहाज को इसका संभावित कारण बताया गया है. हालांकि, अभी जहाज का नाम और उसकी राष्ट्रीयता की जानकारी सामने नहीं आई है. तेल कितनी मात्रा में फैला. इसका कारण क्या है, इसकी भी जांच चल रही है.

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समुद्र में तेल फैलने से पानी खराब हो सकता है. इसका असर मछलियों और दूसरे समुद्री जीवों पर पड़ सकता है. तट के आसपास रहने वाले लोगों और मछली पकड़ने वाले लोगों को भी इससे परेशानी हो सकती है.

ईरान ने क्यों उठाया जिम्मेदारी का मुद्दा?

बघई ने कहा कि होर्मुज से कई देशों के जहाज गुजरते हैं. इस रास्ते से कई देशों को फायदा होता है. ऐसे में अगर समुद्र और तटीय इलाकों को नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि भविष्य में होर्मुज को लेकर कोई भी समझौता या व्यवस्था होती है, तो उसमें पर्यावरण की सुरक्षा को जरूरी हिस्सा बनाया जाना चाहिए. उनका कहना है कि समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने वालों को सिर्फ कारोबार और सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा.

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दशकों से नुकसान का दावा

ईरान ने पुराने प्रदूषण और सैन्य गतिविधियों का भी मुद्दा उठाया है. बघई के मुताबिक, इन वजहों से ईरान के तटीय इलाकों को लंबे समय में बहुत बड़ा नुकसान हुआ है. ईरान का दावा है कि यह नुकसान खरबों डॉलर का है. ईरान चाहता है कि समुद्र और तटीय इलाकों को हुए नुकसान की भरपाई में उन सभी पक्षों की भूमिका हो, जिन्हें होर्मुज से होने वाले कारोबार से फायदा मिलता है.

होर्मुज इतना जरूरी क्यों?

होर्मुज से हर दिन बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है. इसलिए यहां कोई बड़ा हादसा या तेल रिसाव सिर्फ ईरान के लिए ही चिंता की बात नहीं है. EIA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में इस रास्ते से रोज करीब 2.09 करोड़ बैरल तेल गुजरा था.

फिलहाल केशम द्वीप के पास हुए तेल रिसाव की जांच जारी है. इस घटना के बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि होर्मुज को लेकर भविष्य की किसी भी व्यवस्था में समुद्र और पर्यावरण की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

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