ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडर मेजर जनरल मोहसेन रेजई ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण दावा किया है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका का जमीनी हमला फेल हो गया क्योंकि सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने युद्ध के मैदान की गलत गणना की. रेजई के अनुसार संघर्ष के अंतिम दिनों में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर सटीक ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए थे. ये दावे वर्तमान क्षेत्रीय तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रहे विवाद के बीच आए हैं.
पूर्व आईआरजीसी कमांडर मेजर जनरल मोहसेन रेजई ने कहा कि कुवैत स्थित अमेरिकी बेस को भारी नुकसान पहुंचा. उन्होंने यह भी दावा किया कि एर्बिल बेस खाली कर दिया गया. अमेरिकी कमांडरों को जॉर्डन से इजरायल स्थानांतरित किया गया.
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इन घटनाओं ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास सेंटकॉम के कमांड और सपोर्ट ऑपरेशनों को बाधित कर दिया. नतीजा ये हुआ कि अमेरिकी जमीनी हमला सफल नहीं हो सका. रेजई के अनुसार ईरान की तीव्र सटीक हमलों की रणनीति ने अमेरिकी मिशनों को उलझा दिया.
ये बयान ईरानी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रचार का हिस्सा लगते हैं. ऐसे दावे अक्सर सूचना युद्ध का रूप ले लेते हैं जहां दोनों पक्ष अपनी सफलता और दुश्मन की विफलता को उजागर करते हैं.
2026 में हुए हमले- क्यों बना विवाद का केंद्र
2026 में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद कई दौर के हवाई हमले और जवाबी कार्रवाइयां हुईं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इस विवाद का केंद्र बना. अमेरिका ने शिपिंग की सुरक्षा और स्वतंत्रता का हवाला देते हुए हमले किए जबकि ईरान ने अपने ठिकानों और क्षेत्रीय हितों की रक्षा का दावा किया. रेजई जैसे अधिकारी बार-बार अमेरिकी सैन्य योजनाओं की आलोचना करते रहे हैं. ईरानी जवाबी कार्रवाई की प्रभावशीलता पर जोर देते हैं.
रेजई ने पहले भी अमेरिकी ठिकानों पर हमलों और रणनीतिक दबाव का जिक्र किया है. उनके हालिया बयान में जमीनी हमले की योजना का उल्लेख है जिसका उद्देश्य होर्मुज को खोलना या दक्षिणी क्षेत्रों को अलग करना हो सकता था. लेकिन उनके मुताबिक गलत आकलन और ईरानी जवाबी हमलों ने इसे रोक दिया.
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पिछले कई मौकों पर ईरानी दावों को झूठा या प्रचार बताया है. सेंटकॉम ने अक्सर कहा है कि अमेरिकी बल सक्रिय हैं. हमले जारी हैं. ईरानी क्षमताएं कमजोर हुई हैं. कुवैत, एर्बिल या जॉर्डन से इजरायल कमांडरों के स्थानांतरण जैसे विशिष्ट दावों की आधिकारिक अमेरिकी पुष्टि नहीं मिली है. कुछ रिपोर्टों में बेसों पर हमलों का जिक्र जरूर है लेकिन भारी नुकसान या पूर्ण निकासी की बात विवादित है.
ऐसे बयान घरेलू मोर्चे पर मनोबल बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी कमजोरी दिखाने के लिए दिए जाते हैं. दोनों पक्ष सूचना युद्ध में लगे हुए हैं जहां वास्तविक सैन्य उपलब्धियों के साथ प्रचार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
रणनीतिक महत्व और आगे की संभावनाएं
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण या दबाव क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है. अगर ईरान के दावे सही होते तो यह अमेरिकी सैन्य योजनाओं में बड़ी खामी दर्शाता. लेकिन बिना स्वतंत्र सबूतों के इन्हें आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता. संघर्ष में ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और सटीक हमलों का बढ़ता इस्तेमाल दोनों पक्षों की रणनीति को बदल रहा है. जमीनी हमला किसी भी बड़े संघर्ष में जोखिम भरा होता है क्योंकि इससे कैजुअल्टी और जटिलता बढ़ती है.
रेजई के बयान से साफ है कि ईरान जवाबी क्षमता और अमेरिकी गलत आकलन पर जोर दे रहा है. वहीं अमेरिकी पक्ष अपनी सैन्य श्रेष्ठता और लक्ष्यों की प्राप्ति का दावा करता रहा है. इस तरह के दावे तनाव को बढ़ाने वाले हैं. क्षेत्र में शांति या बातचीत के प्रयासों के बीच सैन्य बयानबाजी जारी रहना चिंता का विषय है.
मेजर जनरल मोहसेन रेजई के दावे ईरान की ओर से अमेरिकी जमीनी हमले की विफलता को रेखांकित करते हैं. कुवैत बेस, एर्बिल निकासी और कमांडर स्थानांतरण जैसे विवरण नाटकीय हैं लेकिन स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं. यह सूचना युद्ध का उदाहरण है जहां सैन्य दावे राजनीतिक और प्रचार उद्देश्यों से जुड़े होते हैं. क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों पक्षों के बयानों की सावधानी से जांच जरूरी है.
ऋचीक मिश्रा