15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि डिफेंस प्रोडक्शन करीब चार गुना बढ़ गया है. भारत एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है.
दो रक्षा औद्योगिक गलियारों में लगभग 70,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं आई हैं. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले एक दशक में भारत की सैन्य क्षमताएं न सिर्फ मजबूत हुई हैं बल्कि देश आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है.
रक्षा क्षेत्र की यह यात्रा दशकों पुरानी है लेकिन कुछ दशक दूसरे दशकों से कहीं ज्यादा योगदान देते हैं. 2014 के बाद का समय ऐसा ही रहा है. आत्मनिर्भर भारत अभियान, लगातार सुधार, निवेश और स्वदेशी नवाचार ने रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई दी है. घरेलू औद्योगिक आधार का विस्तार हुआ है. भारत अब अपनी संप्रभुता की रक्षा के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा में भी योगदान देने के लिए ज्यादा आत्मविश्वास से भरा दिखता है.
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रक्षा बजट 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह करीब 3.1 गुना वृद्धि है. पूंजीगत व्यय भी 2014-15 के 94,587 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, यानी 2.3 गुना वृद्धि.
इस बढ़े हुए बजट ने आधुनिकीकरण को निरंतर गति दी है. 2025-26 में डिफेंस प्रोडक्शन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसमें 76% हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र का और 24% निजी क्षेत्र का रहा. रक्षा अनुसंधान एवं विकास का आवंटन 2014-15 के 13,716 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 29,100 करोड़ रुपये हो गया है, जो 112 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि है.
2022-23 से रक्षा आरएंडडी बजट का 25% हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमी के लिए खोला गया है. 24 डीआरडीओ प्रयोगशालाओं की परीक्षण सुविधाएं अब डिजिटल पोर्टल के जरिए घरेलू निर्माताओं को उपलब्ध हैं.
निर्यात में 56 गुना उछाल और वैश्विक साझेदारी
सबसे प्रभावशाली उपलब्धि रक्षा निर्यात में दिखती है. 2013-14 में मात्र 686 करोड़ रुपये का निर्यात 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यह 56 गुना वृद्धि है और 12 वर्षों में 5500 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी. भारत अब 80 से ज्यादा देशों को रक्षा सामान भेज रहा है. निजी क्षेत्र का योगदान 45% के करीब है. सरकार का लक्ष्य 2029 तक सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस प्रोडक्शन और 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करना है.
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के दो रक्षा औद्योगिक गलियारों में कुल मिलाकर करीब 70,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं आई हैं. उत्तर प्रदेश में 42,057 करोड़ और तमिलनाडु में 32,699 करोड़ रुपये के निवेश का वादा हुआ है. लखनऊ में ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा शुरू हो चुकी है.
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आईडीईएक्स योजना के तहत 676 स्टार्टअप और एमएसएमई जुड़े हैं. एडीआईटीआई और प्रौद्योगिकी विकास कोष जैसी योजनाओं से नवाचार को बढ़ावा मिला है. सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में 5521 वस्तुएं शामिल की गई हैं. सेना ने 175 में से 159 गोला-बारूद किस्मों को स्वदेशी बना लिया है, जिससे 91 प्रतिशत आत्मनिर्भरता हासिल हुई.
अग्नि-4, अग्नि-5, रुद्रम-2, कुशा लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और अन्य कई स्वदेशी हथियारों का सफल परीक्षण हुआ है. नौसेना ने कई स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल की हैं जिनमें 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री है.
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में सुधार, औद्योगिक लाइसेंस की अवधि बढ़ाना, एफडीआई सीमा 74 प्रतिशत तक स्वचालित मार्ग से बढ़ाना और डिजिटल पोर्टल जैसी सुविधाओं ने कारोबार को आसान बनाया है. ये बदलाव भारत को 2047 तक तकनीकी रूप से उन्नत रक्षा शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. भूमि, वायु और समुद्री क्षेत्रों में क्षमताएं बढ़ रही हैं. निर्यात और साझेदारियां भारत को भरोसेमंद वैश्विक खिलाड़ी बना रही हैं.
कुल मिलाकर 2014 के बाद का दशक रक्षा क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी रहा है. बजट, उत्पादन, निर्यात और स्वदेशीकरण में हुई वृद्धि न सिर्फ सैन्य ताकत बढ़ा रही है बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास को भी गति दे रही है. भारत अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और निर्यातक के रूप में उभर रहा है.
ऋचीक मिश्रा