भयानक जासूसी... चीन ने लॉन्च किए तीन रेडियो ट्रैकिंग सैटेलाइट, जो कोई नहीं सुनता वो ड्रैगन सुनेगा

जिसे आंखें नहीं देख पातीं, अब उसका भी पता चलेगा. चीन ने ऐसे सैटेलाइट लॉन्च किए हैं जो अंतरिक्ष से रेडियो सिग्नल पकड़कर समुद्र में छिपे जहाज, रडार और जैमर की लोकेशन खोज सकते हैं.

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चीन ने तीन ऐसी सैटेलाइट लॉन्च की है जो किसी भी तरह के रेडियो वेव्स को सुन सकते हैं. (Photo: Representative/Getty) चीन ने तीन ऐसी सैटेलाइट लॉन्च की है जो किसी भी तरह के रेडियो वेव्स को सुन सकते हैं. (Photo: Representative/Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST

चीन ने रेडियो सिग्नल पकड़ने वाले तीन खास सैटेलाइट लॉन्च किए हैं. इन्हें डिटिंग-01 ए, बी और सी नाम दिया गया है. इन्हें 20 सितंबर 2026 को लिजियन-1 वाई18 रॉकेट से लॉन्च किया गया. इस रॉकेट के जरिए कुल 9 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए थे. इन तीनों डिटिंग-01 सैटेलाइट का काम अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो सिग्नल को पकड़ना और यह पता लगाना है कि ये सिग्नल कहां से आ रहे हैं.

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इन सैटेलाइट को तीन के ग्रुप में काम करने के लिए बनाया गया है. आसान भाषा में समझें तो कोई जहाज, रडार या दूसरा सिस्टम जब रेडियो सिग्नल भेजता है, तो तीनों सैटेलाइट उस सिग्नल को पकड़ते हैं. सिग्नल तीनों तक अलग समय पर पहुंचता है. इस समय के अंतर से सैटेलाइट यह पता लगा सकते हैं कि सिग्नल कहां से आया है.

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कैसे काम करेगा ये सिस्टम?

डिटिंग-01 सैटेलाइट किसी जहाज की तस्वीर लेकर उसे खोजने के बजाय उसके रेडियो सिग्नल को पकड़ेंगे. इसके लिए तीनों सैटेलाइट एक साथ काम करेंगे. अगर एक ही सिग्नल तीनों सैटेलाइट तक अलग-अलग समय पर पहुंचता है, तो उस अंतर से सिग्नल भेजने वाली जगह का पता लगाया जा सकता है.

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इसे रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग कहा जाता है. इसमें सैटेलाइट यह देखते हैं कि आसपास कौन से रेडियो सिग्नल मौजूद हैं. वे कहां से आ रहे हैं. चीन का कहना है कि डिटिंग-01 इसी तरह बड़े इलाके में रेडियो सिग्नल की जानकारी जुटाने के लिए बनाया गया है.

जहाज के सिग्नल से मिल सकती है लोकेशन

इस तकनीक से समुद्र में मौजूद जहाजों के रेडियो सिग्नल का पता लगाया जा सकता है. अगर किसी जहाज का रडार या कम्युनिकेशन सिस्टम सिग्नल भेज रहा है, तो सैटेलाइट उस सिग्नल को पकड़कर उसकी जगह का अंदाजा लगा सकते हैं.

यानी जहाज दिखाई न दे रहा हो, तब भी अगर वह रेडियो सिग्नल भेज रहा है तो उसकी लोकेशन का पता लगाने में मदद मिल सकती है. यही तकनीक रडार, जैमर और दूसरे रेडियो सिग्नल भेजने वाले सिस्टम के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ये सैटेलाइट हर जहाज को हर स्थिति में ढूंढ लेंगे. इसलिए जहाज या किसी दूसरे सिस्टम से रेडियो सिग्नल निकलना जरूरी है.

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आगे 60 सैटेलाइट का नेटवर्क

डिटिंग-01 सिर्फ तीन सैटेलाइट तक सीमित नहीं है. चीन आगे इस तरह के करीब 60 सैटेलाइट का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इन्हें एलईओ यानी लो अर्थ ऑर्बिट में रखा जाएगा. इससे बड़े इलाके में रेडियो सिग्नल पर नजर रखना आसान हो सकता है. 

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इन तीन सैटेलाइट को चीन की कॉमर्शियल स्पेस इंडस्ट्री ने तैयार किया है. डिटिंग-01 को इस पूरे नेटवर्क की शुरुआती खेप माना जा रहा है. फिलहाल चीन ने तीन सैटेलाइट के जरिए इस तकनीक की शुरुआत की है. आगे अगर 60 सैटेलाइट का नेटवर्क तैयार होता है, तो चीन के पास अंतरिक्ष से बड़े इलाके के रेडियो सिग्नल की जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ सकती है.

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