प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु, हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई को जोड़ने वाले 'सदर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर' को मंजूरी दे दी है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर को बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद अपने संबोधन में ये जानकारी दी थी. इस प्रोजेक्ट से दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए इन शहरों के बीच सफर करने वाले लोगों को फायदा मिलेगा. (AI Image)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित बुलेट ट्रेन बेंगलुरु से चेन्नई के बीच की करीब 359 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 73 मिनट में तय करेगी. वहीं, बेंगलुरु से हैदराबाद पहुंचने में करीब 2 घंटे 10 मिनट लगेंगे. इसका मतलब है कि शहरों के बीच सफर में यात्रियों का काफी समय बचेगा. रेल मंत्री ने कहा कि इस कनेक्टिविटी से बेंगलुरु और चेन्नई एक ही शहर के दो छोर जैसे हो जाएंगे. अभी सबसे तेज वंदे भारत एक्सप्रेस भी इस दूरी को तय करने में करीब 4 घंटे 25 मिनट लेती है. यानी बुलेट ट्रेन से यात्रियों के 3 घंटे से ज्यादा बच सकते हैं. (AI Image)
ट्रेन दक्षिण भारत के 4 शहरों को जोड़ेगी
सदर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए बेंगलुरु, हैदराबाद, अमरावती और चेन्नई को जोड़ने की योजना है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रस्तावित सदर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर देश के बड़े टेक्नोलॉजी और आर्थिक केंद्रों को करीब लाएगा. इससे इन शहरों के बीच आने-जाने में लगने वाला समय काफी कम होगा. सरकार का मकसद तेज रेल कनेक्टिविटी के साथ इन शहरों को एक बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना है. फिलहाल चेन्नई-मैसूर वंदे भारत एक्सप्रेस (20607/20608) इस रूट पर सबसे तेज ट्रेन है. यह बेंगलुरु और चेन्नई के बीच सफर में करीब 4 घंटे 25 मिनट लेती है. इसकी औसत रफ्तार लगभग 81 किलोमीटर प्रति घंटा है. (AI Image)
फ्लाइट के बराबर होगा सफर का समय
बेंगलुरु और चेन्नई के बीच सीधी फ्लाइट का औसत समय करीब 1 घंटा 4 मिनट है. वहीं, बुलेट ट्रेन से यह सफर 1 घंटा 13 मिनट में पूरा होने का अनुमान है. यानी दोनों ट्रैवल मोड से यात्रा का समय लगभग बराबर होगा. हालांकि, फ्लाइट में एयरपोर्ट पहुंचने, चेक-इन और सिक्योरिटी में भी समय लगता है. ट्रेन का फायदा यह होगा कि यात्री सीधे एक शहर से दूसरे शहर पहुंच सकेंगे. (AI Image)
295 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार
बेंगलुरु और चेन्नई के बीच करीब 359 किलोमीटर की दूरी को 73 मिनट में पूरा करने के लिए ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 295 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए. तुलना करें तो मौजूदा वंदे भारत की औसत रफ्तार करीब 81 किलोमीटर प्रति घंटा है. इस हिसाब से प्रस्तावित बुलेट ट्रेन करीब 3.6 गुना तेज हो सकती है. (AI Image)
प्रोजेक्ट का स्ट्रक्चर डिजाइन तैयार हो रहा
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने बेंगलुरु-चेन्नई सदर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर और दिल्ली-वाराणसी नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन तैयार करने को लेकर इस साल जुलाई में बोलियां आमंत्रित की थीं. यह कदम इन दोनों प्रस्तावित हाई स्पीड रेल परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. दरअसल, केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार के अगले चरण के तहत इन दोनों कॉरिडोर की घोषणा की थी. (AI Image)
7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की है प्लानिंग
इनके अलावा पांच अन्य नए रूट भी प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें बेंगलुरु-चेन्नई और दिल्ली-वाराणसी के अलावा मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई और वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट शामिल हैं. NHSRCL के मुताबिक, इन 7 कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 4,000 रूट किलोमीटर होगी. इनमें से 4 कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी 3 के लिए सर्वे का काम चल रहा है. इसके साथ ही प्रस्तावित रूट की जांच और टेंडर से पहले जमीन की स्थिति समझने के लिए जियोटेक्निकल इन्वेस्टिगेशन भी की जा रही है. (AI Image)
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन के मुताबिक इतने बड़े बुलेट ट्रेन नेटवर्क का काम तेजी से पूरा करने के लिए मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में अपनाए गए डिजाइन और निर्माण के तरीकों को और बेहतर बनाया जाएगा. इसी मकसद से अलग-अलग तरह के ढांचों के डिजाइन को एक जैसा और स्टैंडर्डाइज्ड करने की तैयारी है. इन कॉरिडोर के लिए ट्रेन की परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा और डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है. डिजाइन तैयार करते समय जमीन की स्थिति, पर्यावरण और निर्माण सामग्री जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा. (AI Image)