नागरिकता महंगी, लेकिन 'ग्लोबल सिटिजन' बनने की रेस में भारतीय सबसे आगे!

यूरोपीय देश खासतौर पर इसलिए आकर्षक बने हुए हैं, क्योंकि वे आवेदकों को अपनी भारतीय नागरिकता छोड़े बिना भी वहां रहने का अधिकार देते हैं.

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महंगी हुई विदेशी नागरिकता (Photo-ITG) महंगी हुई विदेशी नागरिकता (Photo-ITG)

aajtak.in

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  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

कई देशों द्वारा नियम कड़े करने और निवेश की रकम बढ़ाने के बावजूद, विदेशों में रहने और दूसरी नागरिकता पाने को लेकर अमीर भारतीयों का क्रेज बरकरार है. माल्टा की एडवाइजरी फर्म 'इमिग्रेंट इन्वेस्ट' की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि यूरोपीय देशों में पैसा निवेश कर वहां रहने का अधिकार पाने के मामले में भारत, चीन और खाड़ी देशों के साथ सबसे आगे है.

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रिपोर्ट बताती है कि लोग विदेशों में रहने या वहां की नागरिकता इसलिए चाहते हैं ताकि वे आसानी से दुनिया भर में घूम सकें, बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला सकें, अपना बिजनेस बढ़ा सकें और अपनी संपत्ति को सुरक्षित रख सकें. 

यूरोप के इन्वेस्टमेंट माइग्रेशन प्रोग्राम्स ने भाग लेने वाले देशों के लिए कुल मिलाकर 21.8 अरब यूरो से अधिक की कमाई की है. यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक विरोध के बावजूद, वहां रहने का अधिकार देने वाले इन रास्तों का आकर्षण कम नहीं हुआ है. कई अमीर भारतीय परिवारों के लिए, ये कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, आसान यात्रा और व्यवसाय या बेहतर लाइफस्टाइल के लिए विदेश में बसने का मौका देते हैं. 

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दूसरी नागरिकता की कीमत

दूसरी ओर निवेश के जरिए नागरिकता पाने के कार्यक्रम अब काफी महंगे होते जा रहे हैं. सालों तक, कैरिबियाई देशों ने दूसरा पासपोर्ट पाने के लिए सबसे सस्ते रास्ते दिए, जहां निवेश की शुरुआत कभी 1 लाख डॉलर से भी कम में हो जाती थी, लेकिन वह दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है.

कैरिबियाई कार्यक्रमों में अब ग्रेनाडा सबसे कम 2,35,000 डॉलर में नागरिकता दे रहा है, और उम्मीद है कि 2027 तक इस पूरे क्षेत्र में न्यूनतम निवेश की रकम 2,50,000 डॉलर के आसपास तय हो जाएगी. कीमतें बढ़ने की वजह यह है कि वहां की सरकारें अपने कार्यक्रमों को 'प्रीमियम' बनाना चाहती हैं और अंतरराष्ट्रीय नियामकों, खासकर यूरोपीय संघ (EU) की चिंताओं को दूर करना चाहती हैं. बढ़ती लागत के साथ-साथ, सरकारें आवेदकों की जांच-पड़ताल के नियम भी कड़े कर रही हैं.

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सेंट किट्स और नेविस ने अप्रैल 2026 में अनिवार्य बायोमेट्रिक नियम लागू किए हैं, जबकि ग्रेनाडा वहां 30 दिन रहना जरूरी करने पर विचार कर रहा है. प्रशासन ने गड़बड़ियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है, तय रकम से कम भुगतान करने पर 13 लोगों की नागरिकता छीन ली गई है और दो अधिकृत एजेंटों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, अब इन स्थापित कार्यक्रमों में बेहतर सुरक्षा मानकों और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नियमों का पालन करना आम बात हो जाएगी.

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वीजा की पाबंदियां

नागरिकता चाहने वाले लोगों के लिए एक और बड़ी चुनौती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती सख्ती है. अमेरिका अब एंटीगुआ और बारबुडा और डोमिनिका के नागरिकों को B-1/B-2 विजिटर वीजा देने के लिए 5,000 से 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड भरने को कह रहा है. ब्रिटेन ने सेंट लूसिया और त्रिनिदाद और टोबैगो के नागरिकों के लिए वीजा जरूरी कर दिया है, जबकि डोमिनिका ने 2023 में ही ब्रिटेन के लिए अपनी वीजा-मुक्त यात्रा का अधिकार खो दिया था. इन बदलावों से साफ है कि कुछ नागरिकता कार्यक्रमों के साथ मिलने वाले वीजा-मुक्त यात्रा के फायदों को हमेशा के लिए तय या गारंटीड नहीं माना जा सकता.

नए और सस्ते विकल्प

जैसे-जैसे कैरिबियाई कार्यक्रम महंगे हो रहे हैं, बाजार में कम लागत वाले नए विकल्प सामने आने लगे हैं. साओ तोमे और प्रिंसिपे ने 2025 में 90,000 डॉलर के शुरुआती निवेश के साथ एक नागरिकता कार्यक्रम शुरू किया, जबकि नाउरू जून 2026 तक 90,000 डॉलर की प्रमोशनल कीमत की पेशकश कर रहा है. बोत्सवाना भी एक कार्यक्रम पर विचार कर रहा है जिसमें प्रस्तावित न्यूनतम निवेश 75,000 डॉलर है, जो इसे दुनिया का सबसे किफायती विकल्प बना सकता है.

भारतीय निवेशकों के लिए यह ट्रेंड दिखाता है कि भले ही वैश्विक निवास और दूसरी नागरिकता के अवसर अभी भी आकर्षक हैं, लेकिन अब ये पहले से कहीं अधिक महंगे, अधिक नियमों से बंधे और जियोपॉलिटिकल बदलावों के अधीन होते जा रहे हैं.

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